<?xml version='1.0' encoding='UTF-8'?><?xml-stylesheet href="http://www.blogger.com/styles/atom.css" type="text/css"?><feed xmlns='http://www.w3.org/2005/Atom' xmlns:openSearch='http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/' xmlns:georss='http://www.georss.org/georss' xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878</id><updated>2011-09-19T10:22:14.456-07:00</updated><category term='डाकू राजू कोल'/><category term='प्रकाश की'/><category term='के बाद शाम चार बजे के'/><category term='धर्मनगरी'/><category term='फैला शांत'/><category term='चित्रकूट के विकास के'/><category term='&apos;फ्री जोन&apos; घोषित कर दिया'/><category term='विलक्षण तीर्थ'/><category term='बढ़ाते दिखे।'/><category term='बाबा तुलसी दास का लगाया'/><category term='मजाक लगातार जारी'/><category term='अध्यक्ष नीलांशु चतुर्वेदी को'/><category term='पैदल परिक्रमा करने वालों'/><category term='आधे संघर्ष पर'/><category term='तीर्थ में देखने को'/><category term='प्रयासरत हैं।'/><category term='विशेष स्थापत्य कला'/><category term='बुरे संस्कार समाप्त हो जाते'/><category term='रंगकर्मियों'/><category term='के लिए मिसाल'/><category term='प्लेटफार्म'/><category term='परत है'/><category term='श्रद्धालुओं की मजबूरी'/><category term='गिरफ्त में'/><category term='डा. नंदिता पाठक'/><category term='कृष्ण गोपाल गुप्ता को साधुवाद'/><category term='उसे सीख कर'/><category term='साथ ही अन्य जगहों से'/><category term='विपदा'/><category term='उनको छात्रों'/><category term='संयुक्त'/><category term='प्रबंधन'/><category term='नाना जी के'/><category term='यहिदेश।'/><category term='मंदिर परिसर'/><category term='सड़क से होकर'/><category term='अहोभाग्य समझते हैं।'/><category term='शीतलहरी की परवाह किये बगैर'/><category term='विन्ध्य पर्वत'/><category term='लक्ष्मी नारायण'/><category term='शुक्रवार'/><category term='उप्र और मप्र की'/><category term='शुभारंभ'/><category term='&quot;चित्रकूट&quot;'/><category term='निर्मित है या नहीं'/><category term='महायोजना को बनाये जाने का प्रस्ताव'/><category term='कोंपलें निकलवायी तो'/><category term='दीपावली की रात'/><category term='आठ पत्रक भरकर समिति'/><category term='परियोजनाओं का शिलान्यास'/><category term='आवत'/><category term='शंकर जी का मंदिर या'/><category term='श्रीलंका-भारत समुद्री क्षेत्र'/><category term='रामभद्राचार्यविश्वविद्यालय यहीं'/><category term='किया।'/><category term='एक श्रद्धांजलि सभा'/><category term='से सहमत नहीं हूं&apos;ं'/><category term='महर्षि वाल्मीकि'/><category term='का न्योता'/><category term='लोकप्रिय बनाने'/><category term='ईश्वर'/><category term='लक्ष्मण का नाम'/><category term='भी संचालित'/><category term='पूजा पाठ'/><category term='करना चाहिये।'/><category term='संदीप'/><category term='अलौकिक इस परिक्षेत्र'/><category term='चित्रकूट का'/><category term='हर नदी में जलस्रोत'/><category term='खबर पढ़कर'/><category term='है'/><category term='धर्म-नगरी'/><category term='धर्म नगरी की मंदाकिनी'/><category term='सभी ने नाना जी'/><category term='संदीप रिछारिया'/><category term='आयोजित बैठक के बाद 8 फरवरी'/><category term='वापस'/><category term='पर्यटकों में इजाफा'/><title type='text'>चित्रकूट धाम</title><subtitle type='html'>एक ऐसा स्‍थान जो विश्‍व भर के लोगो के लिये किंवदंतियों कथाओं कथानकों के साथ ही यथार्थ चेतना का पुंज बना हुआ है। प्रजापति ब्रह़मा के तपोबल से उत्‍पन्‍न पयस्‍वनी व मां अनुसुइया के दस हजार सालों के तप का परिणाम मां मंदाकिनी के साथ ही प्रभु श्री राम के ग्‍यारह वर्ष छह माह और अठारह दिनों के लिये चित्रकूट प्रवास के दौरान उनकी सेवा के लिये अयोध्‍या से आई मां सरयू की त्रिवेणी आज भी यहां पर लोगों को आनंद देने के साथ ही पापों के भक्षण करने का काम कर रही है।</subtitle><link rel='http://schemas.google.com/g/2005#feed' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/posts/default'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default?max-results=100'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/'/><link rel='hub' href='http://pubsubhubbub.appspot.com/'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><generator version='7.00' uri='http://www.blogger.com'>Blogger</generator><openSearch:totalResults>86</openSearch:totalResults><openSearch:startIndex>1</openSearch:startIndex><openSearch:itemsPerPage>100</openSearch:itemsPerPage><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-6765280175680628668</id><published>2011-03-27T22:15:00.000-07:00</published><updated>2011-03-27T22:15:37.242-07:00</updated><title type='text'>खुद अपने हाथों लिख रहे मेहनतकश अपनी तकदीर</title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;क्रासर- सूखी सिंघन नदी में निकला पानी &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/-xwnLkx2Mifc/TZAY3oNpGuI/AAAAAAAAAd4/cuLHN8ep_HQ/s1600/27chi01.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="0" r6="true" src="http://2.bp.blogspot.com/-xwnLkx2Mifc/TZAY3oNpGuI/AAAAAAAAAd4/cuLHN8ep_HQ/s320/27chi01.jpg" width="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;चित्रकूट, संवाददाता: भय, भूख और भ्रष्टाचार को सहने की बेबसी से जब ग्रामाणों ने आगे निकलकर सोचा तो एक नई इबारत लिख डाली। मानव और पशुओं की सूखती काया को जीवनदान देने का काम खुद अपने ही हाथों कर डाला। बरगढ़ के पास गांव सत्यनारायण नगर के भौंटी कैमहाई के पास सूखी पड़ी सिंघन नदी को एक बार फिर जिंदा कर दिया गया। लगभग साठ मीटर दूरी पर तीन फिट गहरी व सोलह फिट दूरी की नदी को बहते देख जितनी प्रसन्नता गांव वालों को हो रही है उससे ज्यादा प्रसन्नता वहां पर पहुंचे पुलिस अधीक्षक डा. तहसीलदार सिंह को हुई। वे अपने आपको रोक न पाये और खुद ही फावड़ा लेकर श्रमदान करने के लिये जुट गये। इस दौरान काम कर रहे ग्रामीणों में भी काफी उत्साह आ गया और वे भी प्रेरणा गीत गाकर उमंग के साथ काम में जुट गये। इसके बाद पुलिस अधीक्षक ने वहीं पर चौपाल लगाकर ग्रामीणों के साथ बातचीत की। ग्रामीणों ने उन्हें जानकारी दिया कि विकास खंड के छितैनी गांव में पिछले तीन माह से फ्रांस के अलेक्सिस व अमेरिका के जैफ फ्री मैन बरसात के पानी की एक-एकबूंद को बचाने के लिये ग्रामीणों को समझाने का काम कर रहे हैं। वे यहां पर सर्वोदय सेवा आश्रम द्वारा लाये गये हैं। पिछले दिनों जब पानी की कमी के कारण दिक्कतें बढ़ी और पलायन होने लगा तो आश्रम के अभिमन्यु सिंह ने जलपुरूष राजेन्द्र सिंह द्वारा पानी की कमी वाले राजस्थान में सूखी नदी को जिंदा करने की कथा सुनाई। ग्रामीणों में उत्साह भरा कि अगर वे चाहे तो यहां पर भी ऐसा हो सकता है। पानी की कमी के कारण बेबसी का सामना करने वाले मेहनतकशों ने कमर कसी और फावड़ा लेकर नदी में खुदाई प्रारंभ कर दी। देखते ही देखते नदी की सिल्ट हटी और जलस्रोत फूटने लगे। ग्रामीणों के साथ ही सर्वोदय सेवा आश्रम के संतोष, अखिलेश, कमलेश, रीतू, बबलू व भीमसेन आदि तो खुशी के मारे नाचने लगे। ग्रामीणों ने बताया कि पांच गांवों के लोग इस नदी से कभी पानी पीने आया करते थे अब फिर से पशुओं व सिंचाई के लिये पानी मिल सकेगा। &lt;br /&gt;सर्वोदय सेवा आश्रम के मंत्री अभिमन्यु सिंह ने बताया कि अभी तो यह शुरुआत है अब जनसहयोग से बरगढ़ क्षेत्र की नेवादा, कितहाई, मेडना, मौना व मादा नदी को पुर्नजीवित करने का काम किया जायेगा। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी ने सभी नदियों में खुदाई के काम को मनरेगा से करवाने के आदेश दिये है। इससे तो सभी ग्रामीणों में बड़ी आशा का संचार हुआ है पर यहां पर तो पिछले पन्द्रह दिनों में ग्रामीणों ने लगभग साठ मीटर नदी खोद डाली है पर बीडीओ के आने के बाद भी ग्राम प्रधान ने इसे प्रस्ताव में शामिल नही किया है। बल्कि रविवार को ही ग्राम प्रधान काम कर रहे मजदूरों को लालच देकर सड़क बनाने के काम के लिये ले गये हैं। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-6765280175680628668?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/6765280175680628668/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2011/03/blog-post_4084.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/6765280175680628668'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/6765280175680628668'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2011/03/blog-post_4084.html' title='खुद अपने हाथों लिख रहे मेहनतकश अपनी तकदीर'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/-xwnLkx2Mifc/TZAY3oNpGuI/AAAAAAAAAd4/cuLHN8ep_HQ/s72-c/27chi01.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-8296711860201472599</id><published>2011-03-27T22:09:00.000-07:00</published><updated>2011-03-27T22:09:57.703-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='हर नदी में जलस्रोत'/><title type='text'>जल्द ही जिले की हर नदी में होगा पानी</title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;चित्रकूट, संवाददाता: बरदहा, ओहन, गेडुवा व बाल्मीकि के साथ ही जिले की अन्य सभी नदियों पर एक बार फिर सिंघन नदी की तरह ही पानी आने की प्रबल संभावना का जन्म हो चुका है। जहां बरगढ़ इलाके में नेबादा, कितहाई, मेडना, मौना आदि नदियों पर तो लोग खुद ही पहल कर अपने मेहनतकश हाथों से पानी निकालने का काम प्रारंभ करने वाले हैं वहीं जिलाधिकारी ने भी अपनी ओर से सभी नदियों और नालों को पुर्नजीवन देने के लिये मनरेगा से उन्हें मजदूरी दिये जाने के आदेश जारी कर दिये हैं। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;हो सकता है कि आने वाली गर्मी में बंधोईन के आगे दम तोड़ चुकी मंदाकिनी को पुर्नजीवन मिल जाये। जिलाधिकारी दलीप कुमार गुप्ता द्वारा मंदाकिनी सहित जिले कीअन्य सभी नदियों और नालों को मनरेगा के द्वारा खुदाई व सफाई कराने के सभी खंड विकास अधिकारियों को दिये गये आदेश के बाद तो लोगों में खुशी का संचार हुआ है। &lt;br /&gt;वैसे एक नहीं लगभग आधा दर्जन नदियों और दर्जनों नालों वाले इस जिले में इधर गर्मी ने दस्तक दी तो उधर गंभीर जल संकट ने अपने पैर फैलाने प्रारंभ कर दिये हैं। लेकिन पेयजल को लेकर हाहाकार मचे इसके पहले ही जिलाधिकारी ने खुद बढ़कर ऐसी पहल कर डाली है जिससे आने वाले में जल संकट को न केवल दूर किया जायेगा बल्कि पेयजल की उपलब्धता को लेकर जिले की दशा और दिशा दोनो बदल सकती है। &lt;br /&gt;मामला जिले के प्रमुख नदी मंदाकिनी के साथ ही अन्य नदियों और नालों की जल धाराओं के टूटने का है। जिलाधिकारी दलीप कुमार गुप्ता ने इसका उपाय सरकारी और &lt;br /&gt;गैरसरकारी दोनो स्तरों पर खोज लिया है। उन्होंने जिले के समस्त खंड विकास अधिकारियों को बैठक कर आने वाले दिनों में पाठा के साथ ही पूरे जिले में आने वाले जल संकट की भयावहता से परिचित कराते हुये कहा कि वे लोग अपने -अपने इलाकों की नदियों और नालों पर मजदूरों से खुदाई करवाना प्रारंभ करवा दें जिससे नदी की सिल्ट के साफ होने के साथ ही दबे पड़े जल स्रोत भी सामने आ सकें। &lt;br /&gt;जिलाधिकारी ने जागरण से बातचीत में कहा कि नदियां जीवनदायिनी हैं। इसलिये ही इन्हें भारतीय संस्कृति में मां का दर्जा दिया गया है। अगर समय रहते इन पर ध्यान नही दिया गया तो ये गंदगी की आगोश में आकर विलुप्त हो सकती हैं। जिलाधिकारी कहते हैं कि मंदाकिनी सहित सभी नदियों और नालों पर खुदाई का काम करवाया जायेगा। सिल्ट साफ होने पर लगभग हर नदी में जलस्रोत अपने आप खुल जायेगे और इलाके से पानी की कमी दूर होगी। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-8296711860201472599?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/8296711860201472599/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2011/03/blog-post_27.html#comment-form' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/8296711860201472599'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/8296711860201472599'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2011/03/blog-post_27.html' title='जल्द ही जिले की हर नदी में होगा पानी'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-8225641963736176378</id><published>2011-03-06T06:32:00.000-08:00</published><updated>2011-03-06T06:32:40.661-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='अलौकिक इस परिक्षेत्र'/><title type='text'>केंद्र सरकार से चित्रकूट का वैभव बचाने की अपील</title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;&amp;nbsp;राष्ट्रीय रामायण मेले के 38 वें संस्करण के शाम की विद्वत गोष्ठी विद्वानों ने चित्रकूट को ही समर्पित कर इसके अलग स्वायत्तशाषी राज्य बनाये जाने की वकालत की। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;बांदा से आये हिंदी के विद्वान डा. चंद्रिका प्रसाद दीक्षित ललित ने कहा कि चित्रकूट की संस्कृति तो सिंधु घाटी की सभ्यता से पुरानी है। इसे काल के अंतराल में बांटने का काम कोई कर ही नही सकता। आवश्कता तो इस क्षेत्र में अभी और उत्खनन के कार्य करके पुराने रहस्यों को उजागर करने की है। उन्होंने अद्भुत, अनोखे और अलौकिक इस परिक्षेत्र को राज्यों की मांग के बीच पिसने के कारण बर्बादी की कगार पर पहुंचने की बात कहते हुये कहा कि चित्रकूट में उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश है चित्रकूट सबका है। इसे सबका रहने दिया जाये। केंद्र सरकार इसे सीधे अपने संरक्षण में लेकर इसका समुचित विकास करे तभी पूरे विश्व को यहां के बारे में सही जानकारी मिल सकेगी व उसका फायदा मिलेगा। &lt;br /&gt;उन्होंने कविता के रूप में परिभाषित करते हुये कहा कि 'ऋषि राम रहीम जहां पर पैयस्वनी का जल है, संस्कृतियों के संगम वाला चित्रकूट स्थल है।' यह सृष्टि का सार्वभौमिक महत्व का अरण्य तीर्थ है। इसकी प्राकृतिक संपदा इसकी सौन्दर्य छवियां विश्व में सर्वाधिक मनोहारी है। चित्रकूट की संस्कृति जनवादी लोक व्यापी एवं त्याग तपस्या पर आधारित रही है। सिंधु घाटी की सभ्यता से प्राचीन पयस्वनी घाटी की सभ्यता या चित्रकूट की सभ्यता अनुसंधान का विषय है। यहां की आग्नेय घाटी ज्वालामुखी, जल उद्गम्य श्रोत, पर्वतों से निकलने वाली जल धारायें झरने सभी कुछ आदिम और नैसर्गिक रूप को अभी भी सुरक्षित हैं। ऐसे में आवश्यकता है चित्रकूट को स्वायत्तशाषी क्षेत्र बना देने की। जो राजनीति से सर्वथा मुक्त हो। जिसका भूगोल, इतिहास, संस्कृति, भाषाई सौहार्द एवं इस धरती में आने वाले विभिन्न संप्रदायों एवं मत-मतान्तरों से ऊपर उठकर एक सर्वव्यापी संस्कृति का स्वर प्राणवान हो सके। चित्रकू ट की संस्कृति जोड़ने वाली है तोड़ने वाली नही, राम राज्य की मूल परिकल्पना लोक तंत्र की अवधारणा के बीच सबसे पहले इस धरती पर अवतरित हुई। जहां राज सत्ता पर चरित्र की विजय हुई जहां राम राज्य मुकुट उतारकर नंगे पांव परिभ्रमण करते हैं जहां आकांक्षाओं के अनुरूप दलितों, नारियों और वनवासियों की पीड़ा को अपनत्व प्रदान करते हैं। यही वह संस्कृति का स्थान है जो चित्रकूट को विश्व के सबसे प्रथम स्वतंत्र और सर्वोपरि महत्व प्रदान करती है। &lt;br /&gt;अयोध्या से पधारे संत फलाहारी महराज ने कहा कि राम दलितों और निर्धनों के सम्बल बनकर चित्रकूट में आये। रामायण मेला के आयोजन के लिये डा. लोहिया ने चित्रकूट को इसलिये चुना कि वे यहां से एक लोक संस्कृति का नया संदेश दे सकें। जब तक जनता का मनोबल ऊंचा नहीं होगा और शोषण से मुक्ति नही मिलेगी तब तक हमारा प्रयास चलता रहेगा। &lt;br /&gt;मेरठ के डा. सुधाकराचार्य ने कहा कि रामेश्वरम की स्थापना में जिन पत्थरों के तैरने का प्रसंग आता है वे वास्तव में पत्थरों को काट-काट कर बीच में पोला कर करके पम्पन पुल के रूप में बनाया गया था। जहा पर बीच में शिलाओं को जोड़कर बनाया गया। &lt;br /&gt;अमरोहा के डा. राम अवध शास्त्री ने कहा कि राम कथा का नया संदर्भ ग्रहण किया जाना चाहिये। लखनऊ की विद्या विदुषी ने लोक गाथाओं में फैले हुये मां सीता के चरित्र को रेखांकित करते हुये कहा कि सीता ने कई बार राम का प्रतिरोध करने का मन बनाया। जब तक नारियों और बेटियों को समान दर्जा नही दिया जाता तब तक रामायण की कथा का कोई मूल्य नही है। अयोध्या से आये डा. हरि प्रसाद दुबे, गौहाटी से डा. देवेन्द्र चंद्र दास, तिरूपति से आये डा. आर उस त्रिपाठी, भागलपुर से आयी डा. राधा सिंह, बांदा के डा. सीताराम विश्वबंधु, बांदा से आये रस नायक, आगरा से डा. सरोज गुप्ता, डा. ओम प्रकाश शर्मा, ग्वालियर श्री लाल पचौंरी, भोपाल से अवधेश कुमार शुक्ला आदि विद्वानों ने अपने विचार रखे। &lt;br /&gt;एक दूसरी विद्वत गोष्ठी में वृन्दावन से आये दामोदर शर्मा, कानपुर से आये डा. यतीन्द्र तिवारी, मेरठ के नरेन्द्र कुमार, चित्रकूट की डा. कुसुम सिंह, डा. प्रज्ञा मिश्र, डा. मानस मुक्ता यशुमति ने भी श्री राम चरित मानस के नायक राम के विभिन्न स्वरूपों को सामने लाने का प्रयास किया। &lt;br /&gt;संचालन डा. सीताराम विश्वबंधु ने किया। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-8225641963736176378?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/8225641963736176378/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2011/03/blog-post_2660.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/8225641963736176378'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/8225641963736176378'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2011/03/blog-post_2660.html' title='केंद्र सरकार से चित्रकूट का वैभव बचाने की अपील'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-2227249668201122911</id><published>2011-03-06T06:30:00.000-08:00</published><updated>2011-03-06T06:30:41.403-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='संदीप'/><title type='text'>डा. लोहिया की परिकल्पना से भटक गया रामायण मेला</title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;संदीप रिछारिया, चित्रकूट : धर्म दीर्घकालीन राजनीति है। राजनीति अल्प कालीन धर्म। धर्म का काम है अच्छा करें और उसकी स्तुति करें। राजनीति का काम है बुराई से लड़े और उसकी निंदा करे। किंतु जब धर्म अच्छाई न कर केवल स्तुति भर करता है तो वह निष्प्राण हो जाता है और राजनीति जब बुराई से लड़ती नही तो वह कलंकित हो जाती है। पर यह सही है कि धर्म और राजनीति का अविवेकी मिलन दोनो को भ्रष्ट कर देता है। किसी एक धर्म को किसी एक राजनीति से नही मिलना चाहिये। इससे संप्रदायिक कट्टरता पनपती है। यह बातें चित्रकूट में रामायण मेला की कल्पना करने वाले समाजवादी आंदोलन के नायक डा. राम मनोहर लोहिया ने अपने घोषणा पत्र में लिखी थी। घोषणा पत्र में भले ही डा. लोहिया ने इसे राजनीति से सर्वथा अलग बताते हुये साफ तौर पर लिखा था कि रामायण मेले की पृष्ठभूमि में कोई राजनीतिक चाल नहीं है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;उनके शब्द थे कि 'मैं एक बात और स्पष्ट कर दूं कि चित्रकू ट के इस रामायण मेला से दल विशेष का संबंध नही है और न ही मेरी पार्टी सोसलिस्ट पार्टी से। हां सोसलिस्ट कार्यकर्ता जनहित का काम समझकर वैयक्तिक रूप में इसमें विशेष कार्य करें, उसी प्रकार वैयक्तिक रूप में कांग्रेस, कम्युनिष्ट व जनसंघ आदि पार्टियों से सम्बद्ध व्यक्ति भी रामायण मेला को कार्यान्वित करने में रूचि लें और सहयोग करें।' &lt;br /&gt;कम्युनिष्टों से आज तक मेले में सहयोग लेने की कभी जरूरत नहीं समझी गई जबकि यहां के &lt;br /&gt;सांसद और विधायक के पद पर कई बार भारतीय कम्युनिष्ट पार्टी के लोग विद्यमान रहे। जिसकी जितनी संख्या भारी उसकी उतनी हिस्सेदारी के विपरीत जिसकी सरकार उसकी खुशामद के रूप मे यहां मामला चलता रहा। कांग्रेस के बाद भाजपा, सपा और बसपा के नेताओं को सरकारों के हिसाब से वरीयता दी गई। पिछले तीन सालों में रामायण मेला बसपा मय ही रहा। कुछ इसी तरह का हाल इस साल भी रहा। उद्घाटन सत्र पर पूर्व स्वागताध्यक्ष पूर्व सांसद भीष्म देव दुबे के पुत्र प्रदुम्न दुबे के अलावा मंच पर बसपा के अलावा किसी दूसरी पार्टी का कोई नेता नजर नहीं आया। &lt;br /&gt;राष्ट्रीय रामायण मेले के 38 साल के सफरनामे पर भी नजर डाली जाये जो इस बात की पुष्टि होती है कि एक बार प्रधानमंत्री के रूप में मोरार जी देसाई तो विदेश मंत्री के रूप में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई के अलावा राज्यपालों व राज्यमंत्रियों, कुलपतियों ने समय-समय पर उद्घाटन और समापन किया। जबकि सत्ता से अलग रही दूसरी पार्टियों के राजनेताओं और जिला स्तर के नेताओं को भी इस विशेष सम्मेलन में वरीयता नही दी गई। इस बार के आयोजन में उद्घाटन सत्र से लेकर अभी तक के कार्यक्रमों में बसपा नेताओं के अलावा सपा व भाजपा के नेताओं की मौजूदगी उस महामहोत्सव के दौरान बिल्कुल नहीं दिखी जिसे चित्रकूट का विकास का पर्याय माना जाता है। &lt;br /&gt;गौरतलब है कि जब डा. लोहिया ने राष्ट्रीय रामायण मेला का पूरा कार्यक्रम तैयार कर घोषणा पत्र इसके आयोजकों को समर्पित किया था उनके जेहन में इस बात को लेकर बात साफ थी कि आने वाला समय चित्रकूट का होगा। रामायण मेला अगर उत्तरोत्तर प्रगति करता गया तो इससे चित्रकूट का विकास होगा। भौतिक संसाधन बढे़गे और यहां की गरीबी भी दूर होगी। पर क्या वास्तविकता में ऐसा हो पाया है? &lt;br /&gt;सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष राजबहादुर यादव, कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष पुष्पेन्द्र सिंह, भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष लवकुश चतुर्वेदी व सपा नेता कमल सिंह मौर्या इस मुद्दे पर एक राय होकर कहते हैं कि रामायण मेला से वास्तव में चित्रकूट को एक नई पहचान मिली है पर यह तो अब पूरी तरह से वंशवाद का अखाड़ा बन गया है। यहां साल भर में शादियों, राम व भागवत कथाओं व अन्य आयोजनों के जरिये लाखों की आमदनी होने के बावजूद इसके संचालकों द्वारा मेले के आयोजन के लिये धनाभाव या सरकार की ओर से अनुदान कम मिलने की बात कहना हास्यास्पद लगता है। आयोजक धनाभाव बताकर अच्छे कार्यक्रम निरस्त कर लोगों की भावनाओं पर तुषाराघात कर रहे हैं। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-2227249668201122911?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/2227249668201122911/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2011/03/blog-post_06.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/2227249668201122911'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/2227249668201122911'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2011/03/blog-post_06.html' title='डा. लोहिया की परिकल्पना से भटक गया रामायण मेला'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-9055722426998818453</id><published>2011-03-05T07:12:00.000-08:00</published><updated>2011-03-05T07:12:08.455-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='किया।'/><title type='text'>केंद्र सरकार से चित्रकूट का वैभव बचाने की अपील</title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;राष्ट्रीय रामायण मेले के 38 वें संस्करण के शाम की विद्वत गोष्ठी विद्वानों ने चित्रकूट को ही समर्पित कर इसके अलग स्वायत्तशाषी राज्य बनाये जाने की वकालत की। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;बांदा से आये हिंदी के विद्वान डा. चंद्रिका प्रसाद दीक्षित ललित ने कहा कि चित्रकूट की संस्कृति तो सिंधु घाटी की सभ्यता से पुरानी है। इसे काल के अंतराल में बांटने का काम कोई कर ही नही सकता। आवश्कता तो इस क्षेत्र में अभी और उत्खनन के कार्य करके पुराने रहस्यों को उजागर करने की है। उन्होंने अद्भुत, अनोखे और अलौकिक इस परिक्षेत्र को राज्यों की मांग के बीच पिसने के कारण बर्बादी की कगार पर पहुंचने की बात कहते हुये कहा कि चित्रकूट में उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश है चित्रकूट सबका है। इसे सबका रहने दिया जाये। केंद्र सरकार इसे सीधे अपने संरक्षण में लेकर इसका समुचित विकास करे तभी पूरे विश्व को यहां के बारे में सही जानकारी मिल सकेगी व उसका फायदा मिलेगा। &lt;br /&gt;उन्होंने कविता के रूप में परिभाषित करते हुये कहा कि 'ऋषि राम रहीम जहां पर पैयस्वनी का जल है, संस्कृतियों के संगम वाला चित्रकूट स्थल है।' यह सृष्टि का सार्वभौमिक महत्व का अरण्य तीर्थ है। इसकी प्राकृतिक संपदा इसकी सौन्दर्य छवियां विश्व में सर्वाधिक मनोहारी है। चित्रकूट की संस्कृति जनवादी लोक व्यापी एवं त्याग तपस्या पर आधारित रही है। सिंधु घाटी की सभ्यता से प्राचीन पयस्वनी घाटी की सभ्यता या चित्रकूट की सभ्यता अनुसंधान का विषय है। यहां की आग्नेय घाटी ज्वालामुखी, जल उद्गम्य श्रोत, पर्वतों से निकलने वाली जल धारायें झरने सभी कुछ आदिम और नैसर्गिक रूप को अभी भी सुरक्षित हैं। ऐसे में आवश्यकता है चित्रकूट को स्वायत्तशाषी क्षेत्र बना देने की। जो राजनीति से सर्वथा मुक्त हो। जिसका भूगोल, इतिहास, संस्कृति, भाषाई सौहार्द एवं इस धरती में आने वाले विभिन्न संप्रदायों एवं मत-मतान्तरों से ऊपर उठकर एक सर्वव्यापी संस्कृति का स्वर प्राणवान हो सके। चित्रकू ट की संस्कृति जोड़ने वाली है तोड़ने वाली नही, राम राज्य की मूल परिकल्पना लोक तंत्र की अवधारणा के बीच सबसे पहले इस धरती पर अवतरित हुई। जहां राज सत्ता पर चरित्र की विजय हुई जहां राम राज्य मुकुट उतारकर नंगे पांव परिभ्रमण करते हैं जहां आकांक्षाओं के अनुरूप दलितों, नारियों और वनवासियों की पीड़ा को अपनत्व प्रदान करते हैं। यही वह संस्कृति का स्थान है जो चित्रकूट को विश्व के सबसे प्रथम स्वतंत्र और सर्वोपरि महत्व प्रदान करती है। &lt;br /&gt;अयोध्या से पधारे संत फलाहारी महराज ने कहा कि राम दलितों और निर्धनों के सम्बल बनकर चित्रकूट में आये। रामायण मेला के आयोजन के लिये डा. लोहिया ने चित्रकूट को इसलिये चुना कि वे यहां से एक लोक संस्कृति का नया संदेश दे सकें। जब तक जनता का मनोबल ऊंचा नहीं होगा और शोषण से मुक्ति नही मिलेगी तब तक हमारा प्रयास चलता रहेगा। मेरठ के डा. सुधाकराचार्य ने कहा कि रामेश्वरम की स्थापना में जिन पत्थरों के तैरने का प्रसंग आता है वे वास्तव में पत्थरों को काट-काट कर बीच में पोला कर करके पम्पन पुल के रूप में बनाया गया था। जहा पर बीच में शिलाओं को जोड़कर बनाया गया। &lt;br /&gt;अमरोहा के डा. राम अवध शास्त्री ने कहा कि राम कथा का नया संदर्भ ग्रहण किया जाना चाहिये। लखनऊ की विद्या विदुषी ने लोक गाथाओं में फैले हुये मां सीता के चरित्र को रेखांकित करते हुये कहा कि सीता ने कई बार राम का प्रतिरोध करने का मन बनाया। जब तक नारियों और बेटियों को समान दर्जा नही दिया जाता तब तक रामायण की कथा का कोई मूल्य नही है। अयोध्या से आये डा. हरि प्रसाद दुबे, गौहाटी से डा. देवेन्द्र चंद्र दास, तिरूपति से आये डा. आर उस त्रिपाठी, भागलपुर से आयी डा. राधा सिंह, बांदा के डा. सीताराम विश्वबंधु, बांदा से आये रस नायक, आगरा से डा. सरोज गुप्ता, डा. ओम प्रकाश शर्मा, ग्वालियर श्री लाल पचौंरी, भोपाल से अवधेश कुमार शुक्ला आदि विद्वानों ने अपने विचार रखे। &lt;br /&gt;एक दूसरी विद्वत गोष्ठी में वृन्दावन से आये दामोदर शर्मा, कानपुर से आये डा. यतीन्द्र तिवारी, मेरठ के नरेन्द्र कुमार, चित्रकूट की डा. कुसुम सिंह, डा. प्रज्ञा मिश्र, डा. मानस मुक्ता यशुमति ने भी श्री राम चरित मानस के नायक राम के विभिन्न स्वरूपों को सामने लाने का प्रयास किया। &lt;br /&gt;संचालन डा. सीताराम विश्वबंधु ने किया। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-9055722426998818453?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/9055722426998818453/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2011/03/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/9055722426998818453'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/9055722426998818453'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2011/03/blog-post.html' title='केंद्र सरकार से चित्रकूट का वैभव बचाने की अपील'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-1987700581231064907</id><published>2011-02-03T07:08:00.000-08:00</published><updated>2011-02-03T07:11:51.668-08:00</updated><title type='text'>स्‍वामी कामतानाथ जी महाराज</title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/TUq_1cdaa9I/AAAAAAAAAdk/elxQzAXh1vI/s1600/28crt-100.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="292" s5="true" src="http://2.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/TUq_1cdaa9I/AAAAAAAAAdk/elxQzAXh1vI/s320/28crt-100.jpg" width="320" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-1987700581231064907?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/1987700581231064907/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2011/02/blog-post_03.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/1987700581231064907'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/1987700581231064907'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2011/02/blog-post_03.html' title='स्‍वामी कामतानाथ जी महाराज'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/TUq_1cdaa9I/AAAAAAAAAdk/elxQzAXh1vI/s72-c/28crt-100.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-6577297896928890085</id><published>2011-02-03T06:44:00.000-08:00</published><updated>2011-02-03T22:15:33.958-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='संदीप रिछारिया'/><title type='text'>चित्रकूट के घाट पर..</title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;प्रागैतिहासिक काल की गुफाओं, झरनों, उच्च शैल शिखरों व हैरान करने वाली कंदराओं के बीच चित्रकूट आज भी विश्वयुगीन समस्याओं के समाधान के केंद्र के रुप में विख्यात है। कर्मकांडीय ब्राहमण हों या फिर राजसत्ता भोगने वाले- सभी यहां आकर नैसर्गिक प्राकृतिक हास्य को देखकर अपनी सुधबुध खो बैठते हैं। शैव, शाक्य, वैष्णव, जैन, प्रणामी संप्रदाय के साथ ही बौद्धों की श्रद्धा का केंद्र चित्रकूट आज भी अपने अतीत के वैभव को जीता सा दिखाई देता है। मुगलिया सल्तनत के दौरान शहंशाह अकबर के दरबार के नौरत्नों में से प्रमुख संगीत सम्राट तानसेन व राजा बीरबल का संबंध भी यहां से रहा है। भक्तिकाल के प्रमुख कवि अब्दुल रहीम खानखाना ने तो अपने बुरे दिनों में यहां पर आकर भाड भूजनें का काम भी किया है। उनके लिखे- चित्रकूट में रम रहे रहिमन अवध नरेश, जापर विपदा परत है सो आवत यहि देश, को आज कौन नही जानता। &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;धार्मिक स्थल &lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;स्वामी कामतानाथ का मंदिर व परिक्रमा: मान्यताओं के अनुसार आदिकाल में पर्वत से निकलकर प्रभु कामदनाथ विग्रह के रूप में प्रकटे। मानवी काया के अनुसार उनके मुख पर दांत भी हैं। सात शालीग्राम रूपी दांतों में पांच का पूजन रोजाना किया जाता है। साढे पांच किलोमीटर की परिक्रमा मुख्य द्वार से प्रारंभ होती है। चारों दिशाओं में चार द्वार हैं जिनमें विग्रह विराजमान हैं। इसके साथ ही अलौकिक छटायुक्त पर्वत के चारों ओर शनि मंदिर, महलों वाले मंदिर के पीछे गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा लगाया गया पीपल का वृक्ष, उनके द्वारा लिखी गई रामचरितमानस की हस्तलिखित प्रति, मां पयस्वनी का उद्गम स्थल, ब्रह्मकुंड, साक्षी गोपाल, कामधेनु, भरत मिलाप, रामबन पथ गमन स्थल ,लक्ष्मण पहाडी, स्वर्गाश्रम पीलीकोठी, बरहा के हनुमान जी, सरयू धारा आदि स्थान यहां पर देखने योग्य हैं। &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;मंदाकिनी के घाट:&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&amp;nbsp;वैसे तो मंदाकिनी अनुसुइया के जंगलों से निकलती हैं। लेकिन इसके बहाव के स्थानों पर अलग-अलग घाट अपनी अलग विशेषताओं के कारण प्रसिद्ध हैं। टाठी घाट जंगलों के मध्य स्थित देवरहा बाबा की साधना का स्थल माना जाता है। यहां की धारा में थाली घूमने लगती है। सर्वाधिक लोकप्रिय स्थल राघव प्रयाग घाट व रामघाट, भरत घाट है। राघव प्रयाग घाट पर सरयू व पयस्वनी का संगम है। यहां पर राम ने अपने पिता दशरथ का पिंड तर्पण किया था। इसके साथ ही यहां पर चित्रकूट के क्षेत्राधिपति स्वयं शंकर स्वामी मत्स्यगयेन्द्र नाथ के विग्रह के रूप में विराजमान हैं। इसके साथ ही स्फटिक शिला पर राम ने मां जानकी का पुष्पों से श्रंगार किया था। यह विशालकाय शिला आज भी अपने पूरे वैभव के साथ मौजूद है। इसके साथ ही जानकीकुंड, पंचवटी घाट, प्रमोदवन घाट, सूरजकुंड का घाट जहां मां मंदाकिनी पश्चिम मुखी हो जाती हैं देखने योग्य हैं। &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अनुसुइया आश्रम: &lt;/strong&gt;महर्षि कर्दम की पुत्री और महर्षि अत्रि की पत्नी महासती अनुसुइया का विशाल गुरुकुल वाला स्थान धर्मनगरी से लगभग 15 किलोमीटर दूर है। यहां पर नैसर्गिक प्राकृतिक सुषमा से युक्त पर्वत व झरनों के साथ सुगंधित जडी बूटियों के पहाड लोगों का मन मोह कर एक नया उत्साह प्रकट करते हैं। यहां पर योगिनी शिला, हनुमान मंदिर, वनवासी राम मंदिर, परमहंस आश्रम आदि दर्शनीय हैं। इसके साथ ही मां मंदाकिनी की सैकडों धाराओं को यहां से निकलते देखा जा सकता है। &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अमरावती: &lt;/strong&gt;राम अपने कुल के पहले चित्रकूट आने वाले वनवासी नही थे। इस बात का प्रमाण आम के वृक्षों की अमराई वाले अमरावती में दिखाई देता है। दृष्टांतों के आधार पर राम की दसवीं पीढी के पूर्वज अयोध्या नरेश महाराज अम्बरीश ने यहां पर आकर कठोर तप किया था। यह स्थान अनुसुइया आश्रम से लगभग तीन किलोमीटर दूर जंगलों के बीच में दुर्गम है। &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;भभका उद्गम: &lt;/strong&gt;यह स्थान भी अनुसुइया आश्रम से लगभग दो किलोमीटर दूर झूरी नदी का उद्गम स्थल है। यह स्थान गुरु गोरखनाथ की प्राचीन तपस्या स्थली माना जाता है। &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;गुप्त गोदावरी:&lt;/strong&gt; प्रकृति की अनमोल धरोहर गुप्त गोदावरी ऐसा स्थान है जहां पर आकर पर्यटक अपनी सुधबुध खो देता है। प्रकृति की विलक्षण कारीगरी वाली गुफाओं में नक्काशी देखते ही बनती है। एक गुफा तो सूखी है। यहां पर गोदावरी मां के साथ ही अन्य देवता गण स्थापित है और यहां पर राजा इंद्र का पुत्र जयंत खटखटा चोर के रूप में आज भी लटका हुआ है। गोदावरी धारा की विशाल जलराशि वाली दूसरी गुफा से जल निकलकर बाहर कुंड के बाद दिखाई नही देता इसका रहस्य अभी सामने नही आया है। &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;हनुमान धारा: &lt;/strong&gt;रामघाट से तीन किलोमीटर दूर पर्वत श्रेणी पर विराजमान हनुमान के हाथों से निकलने वाली धारा का दृश्य अत्यंत मनोहारी है। इसके स्थान के ठीक ऊपर सीता रसोई है। हनुमान धारा के नीचे नरसिंह धारा, पंचमुखी हनुमान मंदिर है। रामघाट से हनुमान धारा जाने के बीच में ही वनदेवी नामक विलक्षण स्थान है। &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;और भी हैं विलक्षण स्थान &lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;जहां चित्रों के कूट चित्रकूट के दस किलोमीटर के क्षेत्रफल में तमाम मंदिरों के समूह हैं। वहीं धार्मिक, ऐतिहासिक और प्रागैतिहासिक काल के तमाम स्थान अवलोकनीय है। &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;वाल्मीकि आश्रम लालापुर: &lt;/strong&gt;महर्षि वाल्मीकि की तपस्थली लालापुर चित्रकूट से इलाहाबाद जाने के रास्ते पर मिलती है। झुकेही से निकली तमसा नदी इस आश्रम के समीप से बहती हुई सिरसर के समीप यमुना में मिल जाती है। पूरी पहाडी पर अलंकृत स्तंभ और शीर्ष वाले प्रस्तर खंड बिखरे पडे हैं जिनसे इस स्थल की प्राचीनता का बोध होता है। इस गुफा में श्वेतवर्ण से अंकित ब्राही लिपि भी मिल चुकी है। चंदेलकालीन आशांबरा देवी का मंदिर इसी स्थान पर है और कहा जाता है कि यही पर स्वामी प्राणनाथ को दिव्य ज्ञान की अनुभूति हुई थी। उन्होंने बाद में पन्ना नगरी में जाकर प्रणामी संप्रदाय की शुरुआत की। &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;रसियन:&lt;/strong&gt; चित्रकूट से इलाहाबाद जाते समय मऊ से उत्तर दिशा में 14 किलोमीटर दूर रसियन नामक स्थान पडता है। चौरासी हजार देवताओं की साधनास्थली के बारे में कहा जाता है कि पूज्य देवरहा बाबा ने यहां पर उग्र तप किया था। वैसे यह स्थान चित्रकूट धाम का प्रवेश द्वार भी माना जाता है। बाणासुर की धर्मपत्‍‌नी बरहा के नाम पर गांव का नाम ही बरहा कोटरा रख दिया गया था। प्रख्यात शिव मंदिर के ध्वंसावशेष यहां पर बिखरे पडे दिखाई देते हैं। इस मंदिर का सूक्ष्म अलंकरण और भव्य वास्तुकला विस्मित कर देती है। पुरातत्वविद बाणासुर के दुर्ग के पास बने बांध के ध्वंसावशेषों को सिंधु काल की सभ्यता के समकालीन बताते हैं। मन को विस्मित कर देने वाले इस स्थान पर जाते ही अद्भुत शांति का अनुभव होता है। वैसे यहां पर पास ही पहाडी पर आदि काल के मानव-निर्मित शैल चित्रों के साथ ही बौद्ध मूर्तियों के भग्नावशेष भी देखने योग्य हैं। जाने का दुर्गम रास्ता और शासन के ध्यान न देने के कारण पौराणिक, ऐतिहासिक और धार्मिक स्थान लगभग उपेक्षित सा ही है। &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;बांकेसिद्ध, कोटितीर्थ, देवांगना:&lt;/strong&gt; चित्रकूट की पंचकोसी यात्रा का प्रथम पडाव अनुसुइया के भ्राता सांख्यदर्शन के प्रणेता महर्षि कपिल का स्थान बांकेसिद्ध के नाम से प्रसिद्ध है। इस गुफा में जहां बीस हजार वर्ष पूर्व के शैल चित्र विद्यमान हैं जो अब मानव भूलों के कारण अंतिम सांसे ले रहे हैं। साल भर गंधक युक्त झरनों और विशेष किस्म के फूलों से सुशोभित इस स्थान को चित्रकूट का हृदय कहा जाता है। देवांगना में भी झरने और पुष्पों की लताओं से लदे पेड दर्शनीय है कोटितीर्थ और पंपासर में हनुमान मंदिर आज भी लाखों लोगों की आस्था का केंद्र हैं। इसके आगे पर्वतीय मार्ग पर सरस्वती नदी, यमतीर्थ, सिद्धाश्रम, गृधाश्रम, मणिकर्णिका आश्रम इत्यादि हैं। पास ही मध्य में चंद्र, सूर्य, वायु, अग्नि और वरुण तीर्थ मिलते हैं। इन पांच देवताओं के यहां पर निवास करने के कारण इसे पंचतीर्थ कहते हैं और कुछ ही दूरी पर ब्रह्मपद तीर्थ है। &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;मडफा:&lt;/strong&gt; चित्रकूट से बीस किलोमीटर दूर घुरेटनपुर के पास पर्वत पर भगवान शंकर अपने पंचमुखी रूप में सशरीर विद्यमान हैं। किंवदती के अनुसार ऋषि मांडव्य की इस तपस्थली में महाराज दुष्यंत की पत्‍‌नी शकुंतला ने पुत्र भरत को जन्म दिया था। चंदेलकालीन वैभवशाली नगर के ध्वंशावशेष यहां पर बिखरे पडे दिखाई देते हैं। जैन धर्म के प्रर्वतक आदिनाथ के साथ ही अन्य जैन मूर्तियां यहां अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही हैं। अत्रि आश्रम: महर्षि वाल्मीकि और महाकवि कालीदास ने इस स्थान का काफी रोचक वर्णन अपने ग्रंथों में किया है। चित्रकूट से लगभग 15 किलोमीटर दूर दक्षिण में मंदाकिनी के किनारे अत्रि-अनुसुइया और उनके पुत्र चंद्रमा, दत्तात्रेय व दुर्वासा के स्थान हैं। यहां पर पाए जाने वाले शैलचित्र इसे पुराप्राचीन काल का घोषित करते हैं। मंदाकिनी नदी के उत्तरी किनारे पर भवनों के ध्वंसावशेष मिलते हैं जो कुलपति कण्व के आश्रम के माने जाते हैं। इस आश्रम की निकटवर्ती पहाडियों पर काफी मात्रा में शैलाश्रय और उनमें रामकथाश्रित शैलचित्र प्राप्त हुए हैं। सप्तर्षियों में सम्मिलित महर्षि अत्रि का विद्यापीठ प्राचीन भारत के महान विद्यापीठों में गिना जाता है। यहां से दंडकारण्य की सीमा प्रारंभ हो जाती है और तीन मील दूर एक झरना और हनुमान जी की मूर्ति प्रतिष्ठित है यहीं पर विराध कुंड है। &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;शरभंग आश्रम:&lt;/strong&gt; सतना के वीरसिंहपुर से लगभग 12 किलोमीटर दूर यह स्थान राम और ऋषि शरभंग के अद्भुत मिलन का स्थल है। यहीं पर भगवान विष्णु से कुपित होकर ऋषि ने अपने शरीर का हवन किया था। यहां पर दो दिव्य कुंड हैं जो ऋषि शरभंग के तप बल की पुष्टि करती है। विराध कुंड की गहराई मापने के कई प्रयास हो चुके हैं पर अभी तक इसमें सफलता नही मिली है। &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;राजापुर:&lt;/strong&gt; यमुना के किनारे बसी गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज की जन्म स्थली। राम बोला से तुलसीदास जी ने जब रत्नावली के द्वारा ज्ञान प्राप्त किया तो चित्रकूट में आकर गुरु से दीक्षा लेकर रामचरितमानस के साथ ही अनेक ग्रंथ अपने आराध्य राम के बारे में लिख डाले। यहां पर उनके द्वारा स्थापित संकटमोचन हनुमान मंदिर व उनके द्वारा पूजित लगभग 15 किलोमीटर दूर नांदी के हनुमान जी का मंदिर दर्शनीय है। वैसे पहाडी के पास ही साईपुर में दाता साई का मंदिर व स्थान दर्शनीय है। यहां पर हिंदू और मुस्लिम एकता को बढाने वाला मेला लगता है। &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कैसे पहुंचे &lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;चित्रकूट के लिए कर्वी निकटतम रेलवे स्टेशन है। यह दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, बनारस, लखनऊ, भोपाल, जबलपुर व रायपुर से सीधा जुडा हुआ है। चित्रकूट से 30 किलोमीटर दूर माणिकपुर जंक्शन भी है। यहां से देश के अन्य भागों के लिए ट्रेने मिलती हैं। इसके साथ ही राष्ट्रीय राजमार्ग 76 पर कर्वी का बस स्टाप है यहां से लखनऊ, बनारस, कानपुर, इलाहाबाद आदि स्थानों के लिए सीधी बस सेवा है। वैसे जानकीकुंड में भी अन्तर्राज्यीय बस स्टैंड हैं। यहां से सतना, रीवा, जबलपुर, पन्ना, मैहर आदि के लिए बसें मिलती हैं। निकटतम हवाई अड्डा खजुराहो, लखनऊ व बनारस हैं। इसके अलावा टैक्सी सेवा हर समय यहां पर मिलती है। &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कहां रुकें &lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;चित्रकूट में रुकने के लिए वैसे तो तमाम धर्मशालाएं, लॉज और यात्री निवास हैं। इनमें प्रमुख उप्र और मप्र के टूरिस्ट बंगले, जयपुरिया स्मृति भवन, कामदगिरि भवन, विनोद लाज, पंचवटी ,रामदरबार होटल आदि हैं। वैसे हर मठ और मंदिर ने भी अपने गेस्ट हाउस बना रखे हैं। उत्तर प्रदेश सरकार का विश्राम गृह कर्वी में जबकि मप्र सरकार का विश्राम गृह सिरसावन में है। &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;घूमने का मौसम &lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;वैसे तो वर्ष भर यहां पर घूमने का मौसम रहता है। पर जुलाई से लेकर मार्च-अप्रैल तक का समय पर्यटकों व दर्शनार्थियों के लिए ज्यादा मुफीद बताया जाता है। &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;सुतीक्षण आश्रम: &lt;/strong&gt;वीरसिंहपुर से 10 किलोमीटर दूर यह स्थान शातकर्णी ऋषि के पंचाप्सर तीर्थ और शरभंग आश्रम के मध्य स्थित है। सुतीक्षण के भाई अगस्त्य ऋषि का आश्रम यहां से लगभग 50 किलोमीटर दूर स्थित है। इस स्थान को ब्रह्म लोक के समान पवित्र कहा गया है। &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;सरहट:&lt;/strong&gt; चित्रकूट से तीस किलोमीटर दूर मानिकपुर के पास सरहट नामक स्थान पर प्राचीनतम शैलचित्र भारी संख्या में मौजूद हैं। ये तीस हजार साल पुराने बताए जाते हैं। सरहट के पास ही बांसा चूहा, खांभा, चूल्ही में भी इस तरह के शैलचित्र मिलते हैं। सरहट के 20 किलोमीटर दक्षिण पूर्व में करपटिया में 40 शिलाश्रयों का समूह दर्शनीय है। &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;भरतकूप व रामशैया: &lt;/strong&gt;चित्रकूट से लगभग 15 किलोमीटर दूर इस स्थान पर राम के राज्याभिषेक के लिए लाए गए सभी नदियों व सरोवर के पवित्र जल को एक कुंए में डाल दिया गया था। यह स्थान दर्शनीय है। यहीं पास में रामशैया नामक स्थान भी है। कहा जाता है कि यहां पर राम ने चित्रकूट में पर्दापण करने के बाद पहली रात्रि का विश्राम किया था। शिवरामपुर के पास पथरौंडी गांव की पहाडी पर भी दाता साई का स्थान है। यहां के बारे में मान्यता है कि जो भी संत इस गद्दी पर विराजमान होता है वह अपनी पूरी जिंदगी पहाड से नीचे नही उतरता। सूरजकुंड: सूर्य भगवान के तप्त वेग के प्रभाव से जहां मंदाकिनी भी पश्चिम मुखी होकर बहने लगती है। सूर्य का प्रभाव यहां पर पत्थरों में नजर आता है। अपने ताप से बचने के लिए ब्राह्मणों को छाता और जूता दान देने की प्रक्रिया की शुरुआत करने वाला स्थान। &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;धारकुंडी:&lt;/strong&gt; चित्रकूट से लगभग पचास किलोमीटर दूर जंगलों के मध्य दिव्य स्थान। यहां पर अघमर्षण कुंड पर महाभारत काल में धर्मराज युधिष्ठिर द्वारा यक्ष के प्रश्नों के उत्तर देने के साथ ही स्थानीय जाति की राजकुमारी हिडिंबा का विवाह भीम के साथ होने की कथा कही जाती है। गंधक के साथ ही अन्य जडी बूटियों से मिश्रित झरने के पानी के स्नान व सेवन को चर्म रोगों से मुक्ति का साधन भी माना जाता है। &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अन्य दर्शनीय स्थान&lt;/strong&gt; &lt;br /&gt;बाला जी का मंदिर: चित्रकूट में मंदाकिनी के किनारे शहंशाह औरंगजेब के द्वारा बनवाया गया बाला जी का मंदिर दर्शनीय है। &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;गणेश बाग:&lt;/strong&gt; मुंबई में बेसिन की संधि के बाद यहां की जागीर मराठों को देने के बाद उनके वंशज अमृतराय द्वारा बनवाया गया शिल्प का अद्भुत नमूना, इसे मिनी खजुराहो के नाम से भी जाना जाता है। यहां की सात खंडों की बावली भी दर्शनीय है। &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;तरौंहा का किला व झारखंडी मां का मंदिर:&lt;/strong&gt; सुर्की राजवंश की अमर कहानी कहता यह किला कर्वी के तरौंहा में स्थित है। वैसे अब तो यह किला बदहाल है पर यहां की वादियों में इतिहास का पूरा एक अध्याय सांस लेता है। बीरबल हों या तानसेन दोनो ही यहां के सुर्की सम्राट राजा राम कृष्ण जूदेव के दरबार से दिल्ली गए थे। यहीं पर मां झारखंडी देवी का मंदिर भी है जिसके बारे में कहा जाता है कि यह देश के 51 शक्तिपीठों में एक है। &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;चर का सोमनाथ मंदिर: &lt;/strong&gt;सोमनाथ के मंदिर की तर्ज पर नाम पर बना शिल्प कला का अद्भुत नमूना। यहां पर शिव लिंग के अनेक प्रकार लोगों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं। इसके साथ ही दशरथ घाट व कलवलिया का शिव मंदिर भी दर्शनीय है। &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;चित्रकूट में यहां-यहां पडे राम चरण&lt;/strong&gt; &lt;br /&gt;जिले के प्रवेश द्वार मुरका नामके गांव का माना जाता है। यहां पर सर्वप्रथम राम के चरण पडे। इसके बाद ऋषियन व सीतापहाडी पर विश्राम करने के बाद व यमुना नदी के गरौली घाट पर आए। यहां पर तेहि अवसर एक तापस आवा वाली घटना हुई। रामनगर के कुमार द्वय तालाब पर स्नान करने के बाद रैपुरा पहुंचे। कहा जाता है कि यहां पर श्रीराम ने अयोध्या से निकलने के बाद पांचवी रात्रि का विश्राम किया। चित्रकूट में प्रवास के दौरान उन्होंने मांडव्य ऋषि के आश्रम मडफा, भरतकूप, अमरावती, विराध कुंड, पुष्करणी सरोवर, मांडकर्णी आश्रम, श्रद्धा पहाड सहित अन्य स्थानों का भ्रमण किया। &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;लुप्तप्राय स्थान:&lt;/strong&gt; सुभद्रक कुंड, सर्वतोभद्र कुंड, मणि भद्रक तीर्थ, आर्वे आश्रम, काम स्थान, मंडल तीर्थ, गौरी देवी स्थान, योगिना देवी, भार्गव तीर्थ, सावित्री देवी, दिव्य साकेत, महामाया पीठ, शीतला पीठ, मारकुंडी, वन देवी, हंस तीर्थ, फलकी वन, तुंगारण्य, व्यास कुंड, सारंग ऋषि आश्रम, ब्रहस्पति कुंड। &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;विशेष स्थान:&lt;/strong&gt; मारकुंडी के निकट पर्वतों के बीच में चट्टानों से निर्झरित होती विशाल जलराशि जब विशालकाय कुंड में गिरती है तो उसे देखकर लोग आश्चर्यचकित रह जाते हैं। शबरी प्रपात के नाम से विख्यात विशाल कुंड और झरना बाहर से आने वाले पर्यटकों का मन मोह लेता है। यह स्थान शासन की उपेक्षा के चलते अभी ज्यादा ख्याति अर्जित नही कर सका है। अगर इस स्थान पर शासन स्तर पर ध्यान दिया जाए तो यह विशेष स्थान न केवल बाहर से आने वालों के लिए एक विशेष स्थान सिद्ध होगा बल्कि गरीब ग्रामवासियों के लिए रोजगार के साधन मुहैया कराने का भी बडा काम करेगा। &lt;br /&gt;इन स्थानों के अतिरिक्त तमाम और स्थान चित्रकूट के ऊपर लिखे गए लगभग पांच सौ ग्रंथों व पुस्तकों में हैं जिनके बारे में अब जानकारी नही मिलती है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="background-color: red;"&gt;लेख व फोटो: संदीप रिछारिया &lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;दैनिक जागरण यात्रा से साभार &lt;br /&gt;दिनांक 30 .1. 11 &lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/TUq_SAh7pPI/AAAAAAAAAdg/AhwimHIOSxw/s1600/78.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" s5="true" src="http://1.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/TUq_SAh7pPI/AAAAAAAAAdg/AhwimHIOSxw/s1600/78.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-6577297896928890085?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/6577297896928890085/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2011/02/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/6577297896928890085'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/6577297896928890085'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2011/02/blog-post.html' title='चित्रकूट के घाट पर..'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/TUq_SAh7pPI/AAAAAAAAAdg/AhwimHIOSxw/s72-c/78.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-4656056668372401841</id><published>2010-12-23T02:59:00.000-08:00</published><updated>2010-12-23T02:59:20.382-08:00</updated><title type='text'>जेहि पर विपदा परत है सोई आवत यहि देश</title><content type='html'>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/TRMrcflgsLI/AAAAAAAAAcY/3NpML09J1PU/s1600/fea9-1_1239478526_m.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" n4="true" src="http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/TRMrcflgsLI/AAAAAAAAAcY/3NpML09J1PU/s1600/fea9-1_1239478526_m.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;यूपी और एमपी के अधिसंख्य प्रत्याशी चुनाव से पहले और बाद में हाजिरी लगाते हैं भगवान कामतानाथ के दरबार में। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;चित्रकूट में रम रहे रहिमन अवध नरेश, जेहि पर विपदा परत है सोई आवत यहि देश।' शहंशाह जलालुद्दीन अकबर के नवरत्नों में एक रहे भक्तिकाल के महान कवि अब्दुल रहीम खानखाना ने उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश के मिलनस्थल चित्रकूट को अपने प्रवासकाल में विपत्ति निवारण करने के स्थान के रूप में वर्णित किया था, जो आज भी सर्वथा सही है। आज भी यहां क्या आम और क्या खास, सभी लोग इसी आस से लाइन लगाते हैं। &lt;br /&gt;इसी संदर्भ में संत तुलसीदास रचित श्री रामचरितमानस की पंक्तियां 'कामदगिरि भए राम प्रसादा, अवलोकत अपहरद विषादा' उस सत्य को परिभाषित कर देती हैं, जो कि आजकल लोकसभा के चुनाव मैदान में उतरने वाले हर प्रत्याशी के दिलों से होकर गुजर रहा है। उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश में बंटे बुंदेली भूभाग के अठारह जिलों के साथ ही सेंट्रल यूपी में चुनाव के मैदान में अपनी दावेदारी ठोंकने के उद्देश्य से उतरे प्रत्याशी कम से कम दो बार तो यहां पर आकर अपनी हाजिरी जरूर लगाते हैं। इन दो प्रदेशों के साथ ही राजस्थान और बिहार के तमाम ऐसे राजनेता भी हैं, जो अपनी पहचान छिपाकर भगवान कामता नाथ के दरबार में हाजिरी लगाकर चले जाते हैं। &lt;br /&gt;प्राचीन श्री कामतानाथ मुखार बिंद के पुजारी प्रेम चंद्र मिश्र बताते हैं कि यहां पर चुनाव के दौरान अथवा चुनाव के बाद राजनेताओं का आना नया नहीं है। इस धर्म क्षेत्र में आने वाला प्रत्येक वीआईपी इस मंदिर में आकर मत्था जरूर टेकता है। इसके साथ ही वह पांच किलोमीटर की परिक्रमा भी लगाता है। चुनाव के पहले प्रत्याशी टिकट के लिये व टिकट मिलने के बाद जीत के लिये मनौती मांगते है। चुनाव जीतने के बाद लोग भंडारे भी करते हैं। &lt;br /&gt;जगद्गुरु स्वामी राम भद्राचार्य जी महाराज कहते हैं कि चित्रकूट केवल विपत्तियों को हरने वाला स्थान नही बल्कि मनुष्य को नई सोच देने वाला स्थान भी है। भगवान राम को भी राक्षसों के विनाश के लिये नई सोच यहीं से मिली थी। चुनावों के दौरान नेताओं का आगमन तो उनकी स्वयं के कार्य की सिद्धि के लिये होता है, उनकी मनवांछित कामनायें प्रभु पूरी भी करते हैं। &lt;br /&gt;इस स्थान की सबसे खास बात यह है कि यहां किया वादा आपको निभाना भी पड़ता है। चित्रकूट के राजवंश के हेमराज जू चौबे 'नन्हे भइया' कहते हैं, ''स्वामी कामतानाथ ऐसे देव हैं जो उपेक्षा बर्दाश्त नहीं करते। मनवांछित फल देने के साथ ही पदच्युत करने के भी कई उदाहरण सामने है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह, रक्षा मंत्री जार्ज फर्नाडिस इसी कोप के शिकार हो चुके हैं!'' &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;[संदीप रिछारिया] &lt;/strong&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-4656056668372401841?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/4656056668372401841/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/12/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/4656056668372401841'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/4656056668372401841'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/12/blog-post.html' title='जेहि पर विपदा परत है सोई आवत यहि देश'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/TRMrcflgsLI/AAAAAAAAAcY/3NpML09J1PU/s72-c/fea9-1_1239478526_m.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-8549165294834225766</id><published>2010-11-25T21:47:00.000-08:00</published><updated>2010-11-25T21:47:51.366-08:00</updated><title type='text'>शूटिंग में पदक के लिए होगी मशक्कत</title><content type='html'>&lt;strong&gt;धर्मनगरी की वादियों में शूटिंग रेंज स्थापित करने की पहल&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;चित्रकूट, संवाददाता: जल्द ही धर्मनगरी की वादियों में बंदूकों के गरजने की आवाजें आम हो जाएंगी। चौंकिये मत, यह बंदूक की आवाजें डाकुओं और पुलिस के बीच मुठभेड़ की नही बल्कि ओलंपिक का तमगा अपनी धरती पर लाने के लिये होंगी। नेशनल कैडिट कोर मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के उपमहानिदेशक बिग्रेडियर आर विनायक ने चित्रकूट के शांत वातावरण को शूटिंग के अनुरुप पाकर यहां पर शूटिंग रेंज स्थापित किये जाने के प्रस्ताव पर अपनी सैद्धान्तिक मुहर लगाते हुये कहा कि उनका सपना तो अगला ओलंपिक का पदक चित्रकूट के बच्चे के हाथ में देखकर पूरा होगा। &lt;br /&gt;दीन दयाल शोध संस्थान के उद्यमिता विद्या पीठ में जागरण से बात करते हुये बिग्रेडियर ने कहा कि नेशनल कैडिट कोर भविष्य बनाता नही बल्कि बच्चों को भविष्य के लिये तैयार करता है। इस समय देश भर में तेरह लाख कैडिट हैं अगले पांच सालों में दो लाख कैडिटों के लिये और भी एनसीसी में आने के अवसर बन रहे हैं। चित्रकूट के आयुर्वेदिक कालेज में भी एनसीसी की यूनिट के लिये जल्द ही सीनियर डिवीजन की एनसीसी की स्वीकृति कर दी जायेगी। &lt;br /&gt;उन्होंने गर्व के साथ बताया कि मध्य प्रदेश के राज्यपाल, छत्तीसगढ़ के राज्यपाल, मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री समेत सुषमा स्वराज्य, जया बच्चन, फारुक अब्दुला जैसी तमाम हस्तियां नेशनल कैडिट कोर के सदस्य रह चुके हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में जल्द ही 5 फेस में 10 नयी यूनिटों को खोले जाने का काम प्रारंभ किया जायेगा। इसका शुभारंभ रींवा जिले से होगा। इससे यह फायदा होगा कि जो विद्यालय एनसीसी की प्रतीक्षा सूची में चल रहे हैं उनको भी अपने छात्रों को एनसीसी का प्रशिक्षण दिलाने का मौका मिल जायेगा। रींवा संभाग के सीओ लेफ्टीनेंट कर्नल एसआर सिंह ने कहा कि सन् 1971 के बाद इतना बड़ा विस्तार पहली बार किया जा रहा है। चित्रकूट में जल्द ही फायरिंग रेंज बनाने का काम प्रारंभ कर दिया जायेगा।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-8549165294834225766?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/8549165294834225766/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/11/blog-post_3033.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/8549165294834225766'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/8549165294834225766'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/11/blog-post_3033.html' title='शूटिंग में पदक के लिए होगी मशक्कत'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-2908680645313915282</id><published>2010-11-25T21:36:00.000-08:00</published><updated>2010-11-25T21:36:17.755-08:00</updated><title type='text'>एक सोच से बदल गई गांव की तस्वीर</title><content type='html'>- आधे से ज्यादा गांव की जमीन में होती है सब्जी की खेती। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;- खुटहा गांव में हर हाथ के पास काम&lt;/strong&gt; &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;चित्रकूट, संवाददाता:&lt;/strong&gt; 'हिम्मते मर्दा तो मदद-ए-खुदा' अगर धर्मस्थली से सटे हुए खुटहा गांव में नजर डाले तो आजादी के बाद काफी सालों तक यह गांव भी बुंदेलखंड के अन्य गांवों की तरह ही बदहाल था पर समय के बदलाव को अंगीकार करने के साथ ही जब खेती के विविधीकरण के प्रयोगों को धरातल पर काम जब स्व. देवी प्रसाद शुक्ला ने किया तो न केवल अपनी किस्मत के दरवाजे खोले बल्कि अपने गांव के साथ ही आसपास के गांवों की किस्मत को भी बदल दिया। आज इस गांव की कुल 200 हेक्टेयर की जमीन में से आधी जमीन सब्जी उत्पादन कर सोना उगलने का काम कर रही है। लगभग तीस साल पहले हुये हुये सब्जी उत्पादन के प्रयोग ने न केवल इस गांव मे क्रांति ला दी बल्कि आसपास के गांवों को भी मेहनत करने की एक नई राह दिखा दी। &lt;br /&gt;समाजसेवी व उन्नतशील किसान शिव कुमार शुक्ला कहते हैं कि इस गांव में पहले भी खेती होती थी जो वर्षा के जल पर आधारित थी। सबसे पहले पिता जी ने कुएं पर रहट लगवाया, तो आधे गांव के खेत रहट से सींचे जाते थे उसके पास डीजल पम्प आया और बाद में जिले का पहला टयूब बेल भी उनके यहां पर ही लगा। इसके साथ ही उन्होंने हर खेत की मेड पर पक्की नालियों का निर्माण कराया। खेती के लिये बीजों को बाहर से लाकर जब अपने खेतों के साथ दूसरे किसानों को दिया तो फिर बदलाव की बयार बह चली। धीरे-धीरे एक बीघा से दस बीघा और फिर कहानी सौ हेक्टेयर तक आ पहुंची। आज गांव में हर किस्म की सब्जी, मसाले व रवी, खरीफ व जायद की सभी फसलों के साथ ही फलों का उत्पादन किया जा रहा है। &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कहते हैं किसान&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;उन्नतशील किसान राकेश नायक कहते हैं कि सब्जी उत्पादन के साथ अन्य फसलों के उत्पादन करने का मूलमंत्र जब इस गांव के लोगों को मिला तो सबने मिलकर मेहनत की और अब इस गांव में हर कामगार के पास साल भर का काम है। एक एकड़ वाला किसान भी सब्जी उत्पादन कर अपने परिवार को अच्छी तरह से पाल रहा है। उन्नतशील किसान राम राज यादव, राम लाल, मइयादीन यादव और अशोक कुमारी कहती है कि खेती का सबसे बड़ा मूलमंत्र मेहनत है। रासायनिक खादों के भरोसे न रहकर शून्य बजट के साथ जैविक करने वाले ये किसान साफ तौर पर कृषि विविधीकरण के हर प्रयोगों को बड़ी ही बारीकी से देखकर उसे अंगीकार करने का प्रयास भी करते हैं। &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कहते हैं अधिकारी &lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;जिला कृषि अधिकारी हर नाथ सिंह कहते हैं कि खेती के प्रयोग करने का काम जिले के कई किसान कर रहे हैं। पाठा के क्षेत्र में जहां अखिल भारतीय समाज सेवा संस्थान ने एक नई क्रांति लाने का काम किया है वहीं धर्मस्थली के सटे खुटहा गांव में शिव कुमार शुक्ला का नि:संदेह ही स्वागत योग्य है। उनके ज्ञान का फायदा न केवल उनके गांव के लोगों को हो रहा है बल्कि आसपास के गांव वाले भी इसका फायदा उठा रहे हैं। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/TO9HMLWmdBI/AAAAAAAAAcQ/-cZqArvE2JQ/s1600/25crt-13.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="226" ox="true" src="http://3.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/TO9HMLWmdBI/AAAAAAAAAcQ/-cZqArvE2JQ/s320/25crt-13.jpg" width="320" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-2908680645313915282?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/2908680645313915282/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/11/blog-post_25.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/2908680645313915282'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/2908680645313915282'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/11/blog-post_25.html' title='एक सोच से बदल गई गांव की तस्वीर'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/TO9HMLWmdBI/AAAAAAAAAcQ/-cZqArvE2JQ/s72-c/25crt-13.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-1689792056317515465</id><published>2010-11-07T22:42:00.000-08:00</published><updated>2010-11-07T22:42:10.164-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='सड़क से होकर'/><title type='text'>अब कर्वी से चित्रकूट जाना होगा आसान</title><content type='html'>चित्रकूट, संवाददाता: कर्वी से होकर धर्मनगरी जाने वालों के लिये खुशखबरी। अरसे से बदहाल सड़क के दिन बहुर गये हैं। नयागांव से डिलौरा तक की सड़क निर्माण का कार्य प्रारंभ हो चुका है। इससे अब कर्वी से छोटे वाहनों से बेड़ी होकर चित्रकूट जाने में चार किलोमीटर के फासले की बचत संभव हो जायेगी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सब कुछ ठीक रहा तो आजादी के पहले जिस सड़क से होकर हमारे पुरखे धर्मनगरी जाया करते थे चार माह बाद हम उस पर गाड़ियों पर बैठकर जा सकेंगे। उत्तर प्रदेश के बाद मध्य प्रदेश ने भी अब पहल कर कर्वी से नयागांव की दूरी को कम करने का प्रयास किया है। नगर पंचायत की इस पहल का स्वागत तरौंहा, डिलौरा लोहसरिया आदि गांवों के साथ ही स्थानीय लोग कर रहे हैं। पुरानी बाजार के महिला चिकित्सालय चौराहे से होकर धर्मनगरी कुछ ही समय बाद सीधे जाने लायक हो जायेगी। इससे धर्मनगरी पहुंचने में लोगों को चार किलोमीटर का फासला कम हो जायेगा। उल्लेखनीय है कि बांदा से कर्वी होकर इलाहाबाद जाने वाली सड़क बनने के पहले राजशाही समय में धर्मनगरी की यात्रा पैदल ही हुआ करती थी। उस समय ज्यादातर लोग पैदल ही चित्रकूट जाया करते थे। यह यात्रा कर्वी के पुरानी बाजार से प्रारंभ होकर धुस मैदान, तरौंहा, डिलौरा होते हुये मध्य प्रदेश के इलाके में प्रवेश कर नयांगाव से पहुंचती थी। नयागांव से धर्मनगरी का प्रारंभ हो जाती है। वैसे इसके पूर्व उत्तर प्रदेश के जिला प्रशासन ने पहल करते हुये तरौंहा के बाद डिलौरा तक की सड़क बनाकर डामरीकरण करवा दिया था। &lt;br /&gt;सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बनने वाली सड़क लगभग ढाई किलोमीटर की होगी और इसमें बीच में एक पुल भी बनाया जायेगा। नगर पंचायत अध्यक्ष नीलांशु चतुर्वेदी ने बताया कि अभी मध्य प्रदेश के इलाके में पड़ने वाले पुल का टेंडर हुआ है और दीपावली के बाद सड़क का भी काम प्रारंभ करा दिया जायेगा। इससे पूर्व की दिशा से आने वाले वाहनों को बेड़ी पुलिया जाने की जरुरत नही पड़ेगी। अगर उत्तर प्रदेश की तरफ से साथ मिला तो भविष्य में इसको मुख्य मार्ग में तब्दील कर दिया जायेगा।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-1689792056317515465?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/1689792056317515465/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/11/blog-post_3937.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/1689792056317515465'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/1689792056317515465'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/11/blog-post_3937.html' title='अब कर्वी से चित्रकूट जाना होगा आसान'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-7480445440458422213</id><published>2010-11-07T22:40:00.001-08:00</published><updated>2010-11-07T22:40:57.572-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='करना चाहिये।'/><title type='text'>मंदिर निर्माण को संतों ने भरी हुंकार</title><content type='html'>चित्रकूट, संवाददाता: निर्माेही अखाड़े के गोलोकवासी महंत श्री राम आसरे दास जी महाराज की द्वितीय पुण्य तिथि पर जुटे संतों ने हुंकार भरते हुए कहा कि श्री रामलला का मंदिर तो उसी जमीन पर ही बनेगा। मंदिर के बगल में मस्जिद बनने से विवाद कभी खत्म नहीं हो सकता। केंद्र सरकार को सोमनाथ मंदिर की तरह ही कानून बना भव्य मंदिर बनवाने में सहयोग करना चाहिये। निर्माेही अखाडे़ के महंत ओंकार दास महाराज ने कहा कि यह मामला हिन्दू समाज की अस्मिता का है। अभी तो मामला सौहार्द से निपटाने के प्रयास हो रहे हैं पर अगर बात न बनी तो सुप्रीम कोर्ट का रास्ता ही अपनाया जायेगा। अगर मंदिर के बगल में मस्जिद बनी तो विवाद कभी खत्म नही होगा। जब मुस्लिम भाई यह मानते हैं कि वास्तव में वही स्थान की जन्म भूमि है तो फिर बची जमीन को छोड़कर उससे दूर कहीं भी मस्जिद का निर्माण कर लें। हिंदू समाज उसमें पूरी तरह से सहयोग करेगा। विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय सचिव राजेन्द्र सिंह पंकज के विचार भी कुछ इसी तरह के थे। उन्होंने पूज्य संत राम आसरे दास को याद करते हुए उनसे जुड़े संस्मरण सुनाये। कहा कि केंद्र सरकार की मंशा राम जन्म भूमि मामले को निपटाने की कतई नहीं है। वह तो मामले को और ज्यादा लटकाना चाहती थी। इसीलिए रमेश चंद्र त्रिपाठी को एक बार फिर खड़ा किया। इस पर व्यंग्य करते हुए कहा कि जो व्यक्ति पिछले उन्नीस सालों में कोर्ट नहीं पहुंचा वह फिर से कैसे खड़ा किया गया यह तो अब सभी जान गये हैं। विहिप के केंद्रीय मंत्री उमाशंकर ने भी कहा कि वैसे तो परिषद इस मामले में नहीं जुड़ी है लेकिन वह प्रयास कर रही है कि निर्मोही अखाड़ा और श्री रामलला के सरवराकार एक साथ कोर्ट में पैरवी करें और पूरी की पूरी जमीन इनमें से किसी एक को मिले। जिससे श्री राम लला का भव्य मंदिर बने। &lt;br /&gt;श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करने वालों में रामायणी कुटी के महंत राम हृदय दास, संतोषी अखाड़े के महंत राम जी दास, खाकी अखाड़े के महंत अनूप दास, डा. कौशलेंद्र दास ब्रह्मचारी, राम चंद्र दास, रुप नारायण दास व विहिप के प्रांतीय मंत्री अवध बिहारी मिश्र, धर्माचार्य संत प्रमुख अशोक तिवारी, जुगराज धर द्विवेदी जबलपुर, शैलेन्द्र त्रिपाठी भोपाल, शैलेन्द्र त्रिपाठी, प्रांतीय संयोजक बजरंग दल, अतुल द्विवेदी प्रांतीय गौरक्षा प्रमुख देवेन्द्र राठौर अयोध्या, भोले जी, मुन्ना पुजारी रहे। इसके साथ चित्रकूट परिक्षेत्र के सभी प्रमुख महंत व संत समेत तमाम सम्मानित जन मौजूद रहे।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-7480445440458422213?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/7480445440458422213/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/11/blog-post_2217.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/7480445440458422213'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/7480445440458422213'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/11/blog-post_2217.html' title='मंदिर निर्माण को संतों ने भरी हुंकार'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-2063993428326031641</id><published>2010-11-07T22:39:00.001-08:00</published><updated>2010-11-07T22:39:59.406-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='आधे संघर्ष पर'/><title type='text'>विहिप जल्द जायेगी जनता के द्वार</title><content type='html'>&lt;strong&gt;जनता के सामने श्री रामलला की जमीन के ऐतिहासिक, पुरातात्विक व धार्मिक साक्ष्य रखेगी&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;चित्रकूट, संवाददाता: अभी तो हाईकोर्ट के माध्यम से आधे संघर्ष पर जीत हासिल की है। आगे का संघर्ष और भी ज्यादा कठिन है। लेकिन जब खुद ही राम लला अपनी पैरवी कर रहे हैं तो फिर चिंता किस बात की। लेकिन केंद्र सरकार को चाहिये कि अपना मुख और मुखौटा एक करे और हिंदुओं की जमीन को हिंदुओं को कानून बनाकर सौंप दे। जिससे पूर्व विश्व के सामने पुरुषों में सबसे उत्तम मर्यादा के स्वरूप श्री राम लला सरकार का भव्य मंदिर का निर्माण हो सके।&lt;br /&gt;यह विचार गोलोकवासी निर्मोही अखाड़े के श्री महंत स्वामी राम आसरे दास जी महाराज की दूसरी पुण्य तिथि पर आये विश्व हिंदू परिषद के नेताओं ने जागरण से विशेष बातचीत में व्यक्त किये। राष्ट्रीय धर्माचार्य प्रमुख अशोक तिवारी ने सीधे तौर पर कहा कि जब श्री राम लला खुद ही अपने पक्षकार हैं तो फिर मामला गड़बड़ कैसे हो सकता है। परिषद का काम तो निर्मोही अखाड़ा व श्री राम लला की तरफ से पैरवी करने वालों को एक साथ सुप्रीम कोर्ट में खड़ा करने की है। इस दिशा में प्रयास जारी भी है। उन्होंने कहा कि अब जल्द ही जनता की अदालत के सामने हाई कोर्ट के द्वारा दिये गये फैसले के समय बताई गई पूरी सच्चाई को लाया जायेगा। जब ऐतिहासिक, धार्मिक और पुरातात्विक सभी तरह के साक्ष्य श्री राम मंदिर के समर्थन में अपनी गवाही दे रहे हैं तो फिर तैंतीस प्रतिशत जमीन को मुस्लिम समाज को देना कहां का उचित है। उन्होंने कहा कि फैसला आने के पहले विहिप और बजरंग दल के नेताओं को जेल में भेजना और नजरबंद कर देना कहां का उचित था। हिंदू की मानसिकता दंगा फैलाने या लड़ाई झगड़े की नही होती।&lt;br /&gt;बजरंग दल के प्रांतीय संयोजक शैलेन्द्र सिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला भी हिंदुओं के पक्ष में ही आयेगा। सुलह समझौते का प्रयास चल रहा है पर मुस्लिम नेताओं का तो अपना ही राग है। जब कोर्ट ने उनके मामले को ही खारिज कर दिया तो अब वे जाने क्यों हल्ला मचा रहे हैं। जबलपुर से आये जुगराजधर द्विवेदी, भोपाल से आये बिहारी लाल, प्रांतीय गौरक्षा प्रमुख अतुल द्विवेदी व अवध बिहारी मिश्र ने भी अपने विचार कुछ इसी अंदाज में दिये।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-2063993428326031641?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/2063993428326031641/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/11/blog-post_5256.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/2063993428326031641'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/2063993428326031641'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/11/blog-post_5256.html' title='विहिप जल्द जायेगी जनता के द्वार'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-206909664389979901</id><published>2010-11-07T22:38:00.001-08:00</published><updated>2010-11-07T22:38:41.096-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='प्रबंधन'/><title type='text'>आईआईएम छात्रों ने नानाजी के जीवांत मानव दर्शन को देखा</title><content type='html'>चित्रकूट, संवाददाता: एकात्म मानव दर्शन की राह पर चलकर जब नानाजी देशमुख ने गांवों के लोगों को स्वावलंबन के सहारे रास्ते पर लाने का काम किया तो हालात बदलने लगे। देखते ही देखते न केवल गांवों में खुशहाली आने लगी और लोगों का मेहनत करने के प्रति समर्पण बढ़ने लगा। इस मॉडल को देखने के लिये मंगलवार को इंदौर के आईआईएम से छात्रों के दल ने दीन दयाल शोध संस्थान के विभिन्न प्रकल्पों को देखा और खुले मन से तारीफ की। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;प्रो. वैभव भदौरिया के नेतृत्व में आये छात्रों ने कृषि विज्ञान केंद्र मझगंवा, कृष्णा देवी वनवासी बालिका आवासीय विद्यालय, उद्यमिता विद्या पीठ, राम दर्शन, गुरुकुल संकुल, नन्ही दुनिया और आरोग्य धाम द्वारा आयोजित गतिविधियों को देखा। &lt;br /&gt;संस्थान के प्रधान सचिव डा. भरत पाठक ने कहा कि आप लोगों की प्रबंधन की यह पढ़ाई सिर्फ पैसा कमाने का साधन न बने बल्कि समाज और राष्ट्र की चिंता करते हुये राष्ट्र के विकास में भागीदारी का माध्यम बने।&lt;br /&gt;जेपी फाउंडेशन की निदेशक डा. नंदिता पाठक ने युवा शक्ति को अपने अतीत से प्रेरणा लेते हुये राष्ट्र के हितों को साधकर जुटने की बात कही।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-206909664389979901?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/206909664389979901/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/11/blog-post_9632.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/206909664389979901'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/206909664389979901'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/11/blog-post_9632.html' title='आईआईएम छात्रों ने नानाजी के जीवांत मानव दर्शन को देखा'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-2787669044575746561</id><published>2010-11-07T22:37:00.000-08:00</published><updated>2010-11-07T22:37:35.776-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='प्रकाश की'/><title type='text'>मंदाकिनी की गोद झिलमिलाने लगे तारे</title><content type='html'>&lt;strong&gt;- स्वामी कामतानाथ बने साक्षी &lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;चित्रकूट, संवाददाता : आसमान के तारों को देखें या फिर मां मंदाकिनी के जल में दोनों में तैरते झिलमिल दीपकों को, लगता है कि मानों काली अमावस्या की रात को खुद ही तारे जमीन पर उतर कर झिलमिलाने लगे हों। यह नजारा है तीर्थ स्थल चित्रकूट में दीपावली के मौके पर दीपदान का। इस नजारे को देखकर यहां पर इस मौके पर आने वाले लाखों श्रद्धालु इन क्षणों को अपने जीवन की अनमोल यादगार बनाते नजर आये। दीपदान करने के लिये इस पवित्र नगरी में आये श्रद्धालुओं के लिये दीपक ही कम पड़ गये। श्रद्धालुओं ने मां मंदाकिनी और स्वामी कामतानाथ में दीपदान करने का तरीका भी खोज लिया। मिट्टी की दिउलिया की जगह आटे की लोई पर देउलिया बना कर उस पर देशी घी की बाती लगाकर उसे मंदाकिनी के पवित्र जल में प्रवाहित किया। यही काम श्रद्धालुओं ने स्वामी कामतानाथ के पर्वत पर भी किया। मां मंदाकिनी का रामघाट हो या फिर राघव प्रयाग, भरतघाट या फिर आमोदवन, प्रमोदवन या फिर जानकीकुंड सती अनुसुइया के घाट सभी जगह जलराशि में तैरते दीपक अपनी मद्धिम रोशनी से लड़ते दिखाई दे रहे थे। इसी बीच दुल्हन की तरह सजे मठ मंदिरों और राजप्रसादों व नैसर्गिक सुषमा से सजे स्वामी कामतानाथ के पर्वत पर जलते दिये मानों अंधकार से प्रकाश की ओर मानव को ले जाने की अगुवाई कर रहे थे। दीवारी नर्तकों की टेर हो या फिर परिक्रमा करते श्रद्धालुओं के मुंह से निकलने वाला भज ले पार करइया का.., भज ले पर्वत वाले का उस आस्था की पराकाष्ठा की कहानी कह रहे हैं। दीपावली से ठीक एक दिन पहले यह मेला सदियों से होता आ रहा है। दीपावली की काली अंधेरी रात में मंदाकिनी के जल के साथ ही भगवान कामतानाथ में उतराते दीपक मानव को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने की प्रेरणा से भर देते हैं।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-2787669044575746561?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/2787669044575746561/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/11/blog-post_9605.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/2787669044575746561'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/2787669044575746561'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/11/blog-post_9605.html' title='मंदाकिनी की गोद झिलमिलाने लगे तारे'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-3977785553030735774</id><published>2010-11-07T22:36:00.000-08:00</published><updated>2010-11-07T22:36:19.141-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='दीपावली की रात'/><title type='text'>मन्नतों के दीप जला मांगी खुशहाली</title><content type='html'>दीपावली अमावस्या मेला &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;- विदेशी भी वैदिक संस्कृति के सोपानों से परिचित हो रहे&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;चित्रकूट, संवाददाता: श्री कामदगिरि पर्वत की कोई जगह व मां मंदाकिनी का कोई घाट बांकी न रहा, आस्था में डूबे लोगों ने हर जगह दीये रोशन कर सबकी खुशहाली की मन्नत मांगी। धर्म और आस्था के पांच दिनों तक चलने वाले दीप महोत्सव में जहां देश भर के आस्थावान अपना शीश नवाने भगवान कामतानाथ स्वामी के दरबार में पहुंच रहे हैं वहीं विदेशी भी वैदिक संस्कृति के सोपानों से परिचित होने का काम कर रहे हैं। &lt;br /&gt;पुरानी वैदिक मान्यताओं के हिसाब से श्री कामदगिरि पर्वत के नीचे क्षीर सागर पर भगवान श्री विष्णु शेषशैया पर विश्राम करते हैं और मां लक्ष्मी उनकी सेवा में रहती हैं। दीपावली की रात मां अपने भक्तों को धन और धान्य से पूरित होने का आर्शीवाद देने बाहर निकलती हैं और श्री कामदगिरि के प्रमुख चार द्वारों से उनका आगमन भक्तों के दर्शनों के लिये होता है। इस मान्यता के चलते जहां पिछले तीन दिनों के अंदर उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश क्षेत्र से आने वाले लाखों श्रद्धालु भगवान कामतानाथ के दरबार में दीप प्रज्वलित कर अपनी हाजिरी लगा चुके हैं वहीं भक्तों का रेला और भी तेजी से बढ़ता जा रहा है। यही हाल मां मंदाकिनी के विभिन्न घाटों पर देखा जा रहा है। श्रद्धालुओं के इस पौराणिक तौर स्थल पर आने के लिये उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश में बसों, ट्रेनों की अतिरिक्त व्यवस्था होने के कारण लोगों को सुगमता हो रही है। इसके साथ ही यात्री कर्वी, शिवरामपुर, भरतकूप से लोग पैदल भी चित्रकूट की यात्रा कर रहे हैं। टेंपो व टैक्सी को रामायण मेला परिसर तक जाने व वापस आने के लिये शिवरामपुर का रास्ता देने के कारण यातायात में भी नियंत्रण बना हुआ है। वैसे उत्तर प्रदेश में भीड़-भाड़ वाली मुख्य पांच जगहों पर सीसीटीवी कैमरों के होने व मध्य प्रदेश में भी चार स्थानों पर सीसीटीवी होने के कारण मेले की हर गतिविधि पर अधिकारियों को नजर रखने में सहूलियत हो रही है।&lt;br /&gt;अपर जिलाधिकारी राजाराम, पुलिस अधीक्षक डा. तहसीलदार सिंह, एसडीएम कर्वी गुलाब चंद्र लगातार मेला क्षेत्र में भ्रमण कर स्थिति का जायजा लेने का काम कर रहे हैं। इसके साथ ही सेक्टर मजिस्ट्रेट व नगर पालिका परिषद के अधिशाषी अधिकारी जीतेन्द्र आनंद व मुख्य खाद्य निरीक्षक चंद्रशेखर मिश्र लगातार मेला क्षेत्र में गस्त करते दिखाई दिये। &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;इनसेट&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नहीं दिखी लटकी सवारी&lt;/strong&gt; &lt;br /&gt;सर्तक प्रशासन ने इस बार पहले से ही चाक चौबंद प्रबंध कर रखे थे। टैक्सी टैंपों वालों को कड़ी हिदायत देने का फायदा यह मिला कि उत्तर प्रदेश क्षेत्र में कहीं पर भी वाहनों से बाहर लटकी सवारियां नही दिखाई दी। रोडवेज व प्राइवेट बसें भी मेला क्षेत्र से काफी दूर पार्क कराने के कारण मेले में न तो जाम लगने की स्थिति दिखाई दी और न ही कहीं भगदड़ जैसी स्थिति मिली। वैसे मेला का क्षेत्रफल अधिक होने व लगातार श्रद्धालुओं के चलते रहने के परिणाम स्वरूप मेले में एक जगह पर भीड़ जमा होने की गुंजाइश कम होने का फायदा भी अधिकारियों व कर्मियों को मिलता है। &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;भारी मात्रा में पैदल पहुंचे श्रद्धालु &lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;जहां एक तरफ तीर्थ स्थल वाहनों से पहुंचने वालों की भारी संख्या थी वहीं दीपदान का पुण्य लाभ उठाने वालों में काफी संख्या में पैदल यात्री भी शामिल रहे। कर्वी से तरौंहा, डिलौरा, लोहसरिया, नयागांव होकर पैदल यात्रियों के लिये सबसे ज्यादा सुगम और जल्द पहुंचाने वाला रास्ता रहा तो बेड़ी पुलिया क्रासिंग पर ट्रेनों के अमावस्या पर स्टापेज होने का फायदा भी श्रद्धालुओं को मिला। इसके साथ ही कर्वी रेलवे स्टेशन, शिवरामपुर व भरतकूप से भी काफी लोग धर्म नगरी पहुंचे। भरतकूप रेलवे स्टेशन उतरने वालों ने धर्मनगरी पहुंचने के लिये दो रास्ते चुने। पहला रास्ता माडव्य ऋषि की तपस्थली मडफा से गुप्त गोदावरी होते हुए तीर्थ नगरी का रूख किया तो दूसरा रास्ता भरतकूप मंदिर से रामशैया होते हुए पीलीकोठी वाला रास्ता रहा। कर्वी से सोनेपुर, पम्पासर हनुमान धारा वाला रास्ता भी लोगों की पसंद बना। &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;मौनियों ने तोड़ा मौन वृत &lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;हर साल की तरह इस साल भी बुंदेलखंड व बघेलखंड क्षेत्र के हजारों मौनियों ने अपना मौन वृत श्री कामदगिरि की परिक्रमा के बाद तोड़ा। पौराणिक मान्यता के अनुसार गौ पालन का श्री कृष्ण दिया हुआ मंत्र लेकर साल भर मौन गाय चराने वाले यह मौनिया रोज एक एक मोर का पंख लेकर उसी के सहारे गायों को चराने का काम करते हैं। साल भर मोर पंखों को इकट्ठा करने के बाद उसको गाय की पूंछ की रस्सी से बांधकर उसका पूजन व अर्चन करते हैं। दीपावली के मौके पर मां मंदाकिनी में मोरपंखों को स्नान कराने के साथ ही भगवान कामतानाथ में अपना मौन वृत तोड़ने के बाद मौनिया ढोलक की थापों पर श्री कृष्ण व श्री राम को समर्पित भजनों को गाते व नाचते हैं। &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;व्यवस्था में डटे रहे कर्मचारी &lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;नगर पालिका परिषद के कर्मचारियों की फौज हर मुख्य मोर्चे पर डटी दिखाई दी तो पुलिस के जवान हर जगह मौजूद दिखाई दिए। गोताखोर पुलिस, घुड़सवार पुलिस, डाग स्क्वायड के साथ ही बिजली विभाग के कर्मचारी व जल संस्थान के कर्मचारी अपने काम में लगे दिखाई दिये।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-3977785553030735774?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/3977785553030735774/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/11/blog-post_2564.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/3977785553030735774'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/3977785553030735774'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/11/blog-post_2564.html' title='मन्नतों के दीप जला मांगी खुशहाली'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-3049623975856347403</id><published>2010-11-07T22:33:00.000-08:00</published><updated>2010-11-07T22:33:21.208-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='शुक्रवार'/><title type='text'>साढ़े तीस हजार में बिका गधा</title><content type='html'>चित्रकूट, संवाददाता: एक गधे की कीमत घोड़े से अधिक? चौकिए मत तीर्थनगरी के पावन मंदाकिनी तट पर गधा मेला प्रारंभ होने से पहले ही एक गधे ने सबसे बड़ी कीमत अपने मालिक को दिलवाई है। यह कीमत है तीस हजार पांच सौ रुपए की। काफी दिनों से मेले का काम देख रहे मुन्ना लाल मिश्र बताते हैं कि इस बार तो भइया गजब हो गया। मेला प्रारंभ होने के पहले ही इलाहाबाद के भरवारी से आये नरोत्तम का गधा तीस हजार पांच सौ रुपए कीमत देकर मध्य प्रदेश टीकमगढ़ के पप्पू ने खरीद लिया। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;नयागांव नगर पंचायत के द्वारा पिछले पैतीस सालों से मंदाकिनी के किनारे इस गधा मेला का आयोजन दीपावली में रात बारह दीपदान करने के बाद होता है। इस बार शुक्रवार सुबह भरवरी से आये नरोत्तम का गधा टीमकगढ़ के पप्पू को भा गया और इस गधे ने मेले के पिछले सभी रिकार्डो को ध्वस्त कर अपनी सबसे ज्यादा कीमत अपने मालिक को दिलवाई। वैसे अभी तक इस मेले में लगभग साढ़े पांच सौ गधे आ चुके हैं। मेले के आयोजकों ने बताया कि हर साल इस मेले का स्वरूप बढ़ता जा रहा है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-3049623975856347403?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/3049623975856347403/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/11/blog-post_7450.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/3049623975856347403'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/3049623975856347403'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/11/blog-post_7450.html' title='साढ़े तीस हजार में बिका गधा'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-8630914748247268524</id><published>2010-11-07T22:30:00.000-08:00</published><updated>2010-11-07T22:30:05.255-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='डा. नंदिता पाठक'/><title type='text'>नानाजी के आठवें मासिक श्राद्ध में विदेशी भी जुटे</title><content type='html'>चित्रकूट, संवाददाता: युगऋषि नाना जी का आठवां मासिक श्राद्ध तीर्थ क्षेत्र के लिए एक नजीर सा बनता दिखाई दिया। मानो पूरा तीर्थ क्षेत्र सियाराम कुटीर में समाया जा रहा था। जिसे जहां पर जगह मिली पंगत में बैठता गया और प्रसाद चखता गया। यहां पर न तो कोई भेदभाव दिखा और ना ही कोई अपने पराये की भावना। दीन दयाल शोध संस्थान के कार्यकर्ता भी खुद को सभी को प्रसाद खिला कर आनंदित हो रहे थे। इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी खास बात यह रही कि एक ओर जहां विशेष लोग इस कार्यक्रम में आकर नाना जी के चित्र पर पुष्प पर अर्पित कर रहे थे वहीं तमाम विदेशी भी इस मौके पर इस मौके पर आकर अपने आपको धन्य महसूस कर रहे थे। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;भंडारे के दौरान सभी का ख्याल रख रही उद्यमिता विद्या पीठ की निदेशक डा. नंदिता पाठक ने कहा कि नाना जी का कार्यक्रम है। सभी की श्रद्धा उनके प्रति है। यहां पर हर आने वाले का ध्यान दिया जा रहा है। प्रधान सचिव डा. भरत पाठक व संस्थान के अन्य कार्यकर्ता सभी का ध्यान रख रहे थे। &lt;br /&gt;वैसे सुबह से ही लोगों के आने का क्रम जारी हो गया था। उत्तर प्रदेश के सपा के पूर्व मंत्री रघुराज प्रताप सिंह के साथ ही अन्य नेताओं ने भंडारे का प्रसाद चखा वहीं मध्य प्रदेश के संघ व भाजपा के तमाम नेताओं ने इस मौके पर आकर भंडारे का प्रसाद चखा। &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;बंदरों ने भी छका प्रसाद&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;चित्रकूट : जहां एक ओर भंडारे में लोगों को खिलाने के लिये संस्थान के कार्यकर्ता लगे हुए थे वहीं एक कार्यकर्ता की ड्यूटी चित्रकूट की शान और नाना जी अत्यंत प्रिय वानरराजों को खिलाने का काम एक कार्यकर्ता सियाराकुटीर के पीछे गोयनका घाट पर कर रहा था। उसके पूड़ी डालते ही अचानक बंदरों की संख्या बढ़ती जा रही थी। हजारों बंदर देखते ही देखते आ गये और भंडारे का प्रसाद चखने लगे।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-8630914748247268524?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/8630914748247268524/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/11/blog-post_3324.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/8630914748247268524'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/8630914748247268524'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/11/blog-post_3324.html' title='नानाजी के आठवें मासिक श्राद्ध में विदेशी भी जुटे'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-311903727548650328</id><published>2010-11-07T22:28:00.001-08:00</published><updated>2010-11-07T22:28:48.931-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='उनको छात्रों'/><title type='text'>सहानुभूति या समानुभूति</title><content type='html'>चित्रकूट, संवाददाता: एक दृष्टिहीन अपने रास्ते जा रहा है सामने एक खंभा है। अस्थि विकलांग, मूकबधिर एक साथ दौड़ लगा देते हैं। दृष्टिहीन को संभालते और आगे का सही रास्ता बता देते हैं। ऐसे दृश्य जगदगुरु राम भद्राचार्य विकलांग विश्व विद्यालय में आम हैं। भले ही ये आम लोगों के लिये दया का पात्र हों पर यहां पर की जाने वाली दया को सहानुभूति का नाम नही दिया जा सकता, वास्तव में यह समानुभूति है। क्योंकि एक ही बीमारी के बीमार तो यहां पर सभी हैं। किसी को दिखाई नही देता तो किसी को सुनाई नही देता तो कोई पैरों से लाचार तो कोई हाथों से लाचार। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कहीं रीता गिर न जाये, कहीं गौरव की सायकिल पलट न जाये। ऐसे जुमले यहां पर आम हैं। भले ही जगदगुरु स्वामी राम भद्राचार्य सार्वजनिक रूप से कहते रहे हों कि उनको छात्रों को दया का पात्र न समझा जाये पर हर दिन यहां का नजारा कुछ और होता है। विवि के भोजनालय तुष्टि में तो नजारा कुछ अलग ही होता है यहां पर अधिकतर छात्र गु्रप में ही जाते हैं और इनमें भी अगर दो दृष्टिहीन हैं तो दो अस्थि विकलांग या मूक बधिर। &lt;br /&gt;सचिव डा. गीता देवी कहती हैं कि वास्तव में इनको दूसरों की मदद के लिये किसी ने कहा नहीं है। अंत:प्रेरणा से ही यह एक दूसरे की खूब मदद करते हैं। उन्होंने कहा कि किसी दूसरे के पैरों का कांटा निकालकर देखो तो तुम्हें अपने पैरों में कांटे की चुभन महसूस होगी। कुछ इसी प्रकार से यह एक दूसरे की मदद करते हैं।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-311903727548650328?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/311903727548650328/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/11/blog-post_6842.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/311903727548650328'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/311903727548650328'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/11/blog-post_6842.html' title='सहानुभूति या समानुभूति'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-2289847601976751051</id><published>2010-11-07T22:27:00.000-08:00</published><updated>2010-11-07T22:27:29.257-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='धर्मनगरी'/><title type='text'>अब कर्वी से चित्रकूट जाना होगा आसान</title><content type='html'>चित्रकूट, संवाददाता: कर्वी से होकर धर्मनगरी जाने वालों के लिये खुशखबरी। अरसे से बदहाल सड़क के दिन बहुर गये हैं। नयागांव से डिलौरा तक की सड़क निर्माण का कार्य प्रारंभ हो चुका है। इससे अब कर्वी से छोटे वाहनों से बेड़ी होकर चित्रकूट जाने में चार किलोमीटर के फासले की बचत संभव हो जायेगी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सब कुछ ठीक रहा तो आजादी के पहले जिस सड़क से होकर हमारे पुरखे धर्मनगरी जाया करते थे चार माह बाद हम उस पर गाड़ियों पर बैठकर जा सकेंगे। उत्तर प्रदेश के बाद मध्य प्रदेश ने भी अब पहल कर कर्वी से नयागांव की दूरी को कम करने का प्रयास किया है। नगर पंचायत की इस पहल का स्वागत तरौंहा, डिलौरा लोहसरिया आदि गांवों के साथ ही स्थानीय लोग कर रहे हैं। पुरानी बाजार के महिला चिकित्सालय चौराहे से होकर धर्मनगरी कुछ ही समय बाद सीधे जाने लायक हो जायेगी। इससे धर्मनगरी पहुंचने में लोगों को चार किलोमीटर का फासला कम हो जायेगा। उल्लेखनीय है कि बांदा से कर्वी होकर इलाहाबाद जाने वाली सड़क बनने के पहले राजशाही समय में धर्मनगरी की यात्रा पैदल ही हुआ करती थी। उस समय ज्यादातर लोग पैदल ही चित्रकूट जाया करते थे। यह यात्रा कर्वी के पुरानी बाजार से प्रारंभ होकर धुस मैदान, तरौंहा, डिलौरा होते हुये मध्य प्रदेश के इलाके में प्रवेश कर नयांगाव से पहुंचती थी। नयागांव से धर्मनगरी का प्रारंभ हो जाती है। वैसे इसके पूर्व उत्तर प्रदेश के जिला प्रशासन ने पहल करते हुये तरौंहा के बाद डिलौरा तक की सड़क बनाकर डामरीकरण करवा दिया था। &lt;br /&gt;सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बनने वाली सड़क लगभग ढाई किलोमीटर की होगी और इसमें बीच में एक पुल भी बनाया जायेगा। नगर पंचायत अध्यक्ष नीलांशु चतुर्वेदी ने बताया कि अभी मध्य प्रदेश के इलाके में पड़ने वाले पुल का टेंडर हुआ है और दीपावली के बाद सड़क का भी काम प्रारंभ करा दिया जायेगा। इससे पूर्व की दिशा से आने वाले वाहनों को बेड़ी पुलिया जाने की जरुरत नही पड़ेगी। अगर उत्तर प्रदेश की तरफ से साथ मिला तो भविष्य में इसको मुख्य मार्ग में तब्दील कर दिया जायेगा।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-2289847601976751051?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/2289847601976751051/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/11/blog-post_8521.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/2289847601976751051'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/2289847601976751051'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/11/blog-post_8521.html' title='अब कर्वी से चित्रकूट जाना होगा आसान'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-236634608431009174</id><published>2010-11-07T22:26:00.000-08:00</published><updated>2010-11-07T22:26:04.411-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='गिरफ्त में'/><title type='text'>बुद्धिप्रदाता और धन-धान्यदायिनी को गढ़ने वाले बदहाल</title><content type='html'>चित्रकूट, संवाददाता : बेसिन की संधि के बाद तीर्थ नगरी में आये मराठा पेशवाओं ने जहां इस धरती को सजाने और संवारने के लिये अठारह बागों के साथ गणेश बाग और तमाम कुओं और बावड़ियों का निर्माण कराया वहीं कुछ हुनरमंद जातियों को लाकर यहां पर बसाया और उन जातियों के लोगों ने अपने हुनर का ऐसा जलवा दिखाया कि चित्रकूट की बनी हुई वस्तुयें इस समय तीन प्रदेशों में बिक रही हैं। इनमें से एक है दीपावली के मौके पर बिकने वाली श्री गणेश लक्ष्मी और खिलौने वाली मूर्तियां। राजप्रश्रय में जहां इन कारीगरों को भरपूर सम्मान मिला वहीं आज यह मेहनतकश कौम सरकारी उपेक्षा के कारण बदहाल जिंदगी जीती नशे की गिरफ्त में है। इनका कुछ हाल इस तरह है साल के महीने का काम और फिर छह महीने तक उस कमाई को खाना, बाद के दिनों में फांकाकशी के साथ मौसमी मजदूरी से अपनी जिंदगी काटना है। भले ही यह शहर के निवासी हो पर शिक्षा के नाम पर अधिकतर बच्चे कक्षा पांच और आठ के बाद शायद ही स्कूल का मुंह देख पाते हों और जुआं, स्मैक व शराब की लत इन्हें जवान होने से पहले ही बूढ़ा बना रही है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जहां एक ओर कुम्हार जाति के यह लोग देश के चार त्योहारों में सबसे बड़े माने जाने वाले त्योहार दीपावली पर दूसरों के घरों में उजाला करने के लिये दियों के साथ धन और धान्य के साथ बुद्धि के प्रदाता श्री लक्ष्मी व श्री गणेश की बेहतरीन मूर्तियों को अपने हाथों से बनाने का काम करके लोगों से तारीफ पाते हैं, वहीें दूसरी ओर शिक्षा, स्वास्थ्य की दिक्कतों के साथ ही स्थानीय प्रशासन से भी इन्हें उपेक्षा ही मिलती है। लाल फीताशाही और कमीशनखोरी के कारण न तो इन्हें अनुदान या त्रृण मिलता है और न ही कभी इनको किसी महोत्सव या मेले में अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने की अनुमति अधिकारी देते हैं। &lt;br /&gt;गौर करने लायक बात यह है कि जहां महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के ललित कला संकाय से कई लोग कर्वी के मिट्टी की मूर्तियों के उद्योग को लेकर पीएचडी कर चुके हैं वहीं आज तक किसी भी समाजसेवा की संस्था के द्वारा न तो इनके मुहल्ले में कोई जागरुकता का कार्यक्रम चलाया गया और न ही किसी मंच के माध्यम से इनके हुनर की तारीफ कर इनको आगे बढ़ाने का काम किया गया। मूर्तियों को बनाने में सिद्ध हस्त सुखलाल प्रजापति कहते हैं कि साल में तीन महीने मूर्तियां बनाने के साथ ही वे बाकी दिनों में पौधों को ढेले पर ले जाकर बेंचने का व्यवसाय करते हैं तभी गृहस्थी की गाड़ी चल पाती है। नशे की लत के कारण बदहाल होती जिंदगियों के बारे में कहते हैं कि जब ज्ञान नही है तो आसान है नशे की गिरफ्त में आना। अगर हाथों को लगातार काम मिले तो कौन नशा करेगा और कौन अपने बच्चों को सही ढंग से न पढ़ायेगा। &lt;br /&gt;ताराचंद्र प्रजापति साल में एक महीने मूर्तियां बनाने के अलावा मौसमी मजदूरी करते हैं वे कहते हैं कि नेता तो यहां पर हमें अपना वोट बैंक मानकर अधिकार पूर्वक वोट मांगने आ जाते हैं पर आज तक हमारी भलाई की सोचने का किसी के पास समय नही है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-236634608431009174?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/236634608431009174/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/11/blog-post_9202.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/236634608431009174'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/236634608431009174'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/11/blog-post_9202.html' title='बुद्धिप्रदाता और धन-धान्यदायिनी को गढ़ने वाले बदहाल'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-2521495535301701174</id><published>2010-11-07T22:25:00.000-08:00</published><updated>2010-11-07T22:25:00.675-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='पूजा पाठ'/><title type='text'>नानाजी की याद के साथ गूंजा रामधुन</title><content type='html'>चित्रकूट, संवाददाता: शरदोत्सव के ठीक बाद नाना जी का निवास स्थान सियाराम कुटीर एक बार फिर श्री राम जय राम जय जय राम की धुन से गूंज उठा। मौका था युगऋषि नाना जी देशमुख के आठवें मासिक श्राद्ध का। दीनदयाल शोध संस्थान के प्रधान सचिव डा. भरत पाठक ने पूजा पाठ के साथ ही नाना जी के आठवें मासिक श्राद्ध कार्यक्रम का प्रारंभ किया। मंगलवार की सुबह से ही सियाराम कुटीर प्रांगण में वटवृक्ष के नीचे श्री राम दरबार के साथ नाना जी को याद करने का माध्यम श्री राम जय राम जय जय राम की मधुर धुन को प्रारंभ करने से पहले वेद मंत्रों के साथ पूजा पाठ करने के बाद यह चौबीस घंटों के लिये धुन छेड़ दी गई। संस्थान परिवार के कार्यकर्ताओं के अलावा, क्षेत्र के गणमान्य नागरिक, संत महंत भी संगीतमयी रामधुन में साथ देने के लिये लगातार आ रहे हैं। डा. पाठक ने बताया कि बुधवार को दोपहर बारह बजे से पूजा पाठ के बाद भंडारे का आयोजन होगा। संस्थान के सूत्रों के हवाले से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिये मप्र शासन के कुछ मंत्री व संघ के बड़े ओहदों वाले लोग आ सकते हैं।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-2521495535301701174?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/2521495535301701174/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/11/blog-post_7201.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/2521495535301701174'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/2521495535301701174'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/11/blog-post_7201.html' title='नानाजी की याद के साथ गूंजा रामधुन'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-5222823418393595</id><published>2010-11-07T22:23:00.001-08:00</published><updated>2010-11-07T22:23:37.563-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='संयुक्त'/><title type='text'>खूब याद आये नानाजी</title><content type='html'>&lt;strong&gt;चित्रकूट, संवाददाता:&lt;/strong&gt; शरद पूर्णिमा की धवल चांदनी रात और आसमान से बरसते अमृत के बीच रामनाथ गोयनका घाट पर बैठकर हजारों श्रोता यह तय नहीं कर पा रहे थे वे सितारों को मंच पर देख रहे हैं या फिर मंदाकिनी के जल में। युगऋर्षि नानाजी देशमुख की जयंती सियारामकुटीर के प्रागण में उसी पुराने अंदाज में हजारों लोगों को खीर खिलाकर मनायी गयी। बस एक कमी थी तो वह कि हर बार कि तरह यहां पर कुशल क्षेम पूंछने वाले प्यारे नानाजी नहीं थे। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;वैसे दीन दयाल शोध संस्थान, जिला प्रशासन और संस्कृति संचालनालय मध्य प्रदेश के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित शरद पूर्णिमा की रात को मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा, संस्कृति एवं सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री लक्ष्मी कांत शर्मा ने जब शरदोत्सव का शुभारंभ किया तो उनकी आंखे नम थी। उन्होंने कहा कि वैसे तो शरदोत्सव हर साल होता रहा है पर आज नानाजी के न होने पर उनकी कमी खल रही है। संस्थान के प्रधान सचिव डा. भरत पाठक हों या फिर संगठन सचिव अभय महाजन या फिर उद्यमिता विद्यापीठ की निदेशक डा. नंदिता पाठक सभी के चेहरों पर मुस्कुराहट के बीच एक अलग किस्म की वेदना दिखाई दे रही थी। ऐसा लग रहा था कि जैसे इनकी आंखों के आंसू अब नानाजी की याद में बह चलेंगे। &lt;br /&gt;सांसद गणेश सिंह, विधायक सुरेंद्र सिंह गहरवार, नगर पंचायत अध्यक्ष नीलांशु चतुर्वेदी, अखिलेख शर्मा, डा. अनिल कुमार मिश्र, हरे श्याम, कौशल, अशोक मिश्र, राजू बाबा, सतीश मालवीय सभी ने स्वीकार किया कि आज यहां पर सबसे बड़ी कमी अगर है तो वह है अपने नानाजी जो हम सब के बीच नहीं हैं।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-5222823418393595?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/5222823418393595/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/11/blog-post_991.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/5222823418393595'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/5222823418393595'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/11/blog-post_991.html' title='खूब याद आये नानाजी'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-7066861625928070612</id><published>2010-11-07T22:22:00.000-08:00</published><updated>2010-11-07T22:22:26.360-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='नाना जी के'/><title type='text'>नाना जी का जाना सूर्यास्त के समान</title><content type='html'>&lt;strong&gt;चित्रकूट, संवाददाता:&lt;/strong&gt; मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा, संस्कृति व जनसंपर्कमंत्री ने कहा कि आज नाना जी भले ही स्थूल रूप में न हो पर उनका चिंतन, प्रेरणा और विचार सदैव मानवता का मार्गदर्शन करते रहेंगे। वे राष्ट्रऋषि नाना जी देशमुख के जन्म दिन शरदपूर्णिमा के मौके पर महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के अर्मत्यसेन सभागार में पद्मविभूषण नाना जी देशमुख स्मृति व्याख्यान माला के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जो बीत चुका उसे भूलना ही बेहतर है अब आगे की ओर देखकर सबको मिलकर नाना जी के सपनों को साकार करना चाहिये। आने वाले समय में नाना जी और दीन दयाल शोध संस्थान के कार्यो से प्रेरणा लेकर राष्ट्र को परम वैभव शिखर ही ओर ले जा सकते हैं। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;डा. भरत पाठक ने कहा कि सांस्कृतिक मान्यता है कि शरद पूर्णिमा को चंद्रमा सोलह कलाओं से परिपूर्ण होकर अमृत बरसाता है। नाना जी हमें शरद पूर्णिमा के दिन अमृत बूंदों के रूप में मिले। वे जीवन की सोलह कलाओं से विभूषित थे। उन्होंने उनके जीवन की आरंभिक कठिनाइयों का उल्लेख करते हुये कहा कि जमींदार परिवार में जन्म लेने के बाद भी उनकी आर्थिक स्थिति अत्यंत साधारण थी। स्वयं के साधनों से अर्जित धन से उन्होंने मैट्रिक तक की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने जीवन के विविध क्षेत्रों में सफलता अर्जित की। वे स्वयं कला के पारखी और बेहतरीन कलाकार थे। पिलानी ग्राम में दसवीं कक्षा में पुरस्कार प्राप्त किया गया उनका चित्र आज भी धरोहर के रूप में विद्यमान है। दूसरी कला प्रकाशक, संपादक और पत्रकार के रूप में थी। उन्होंने राष्ट्रधर्म, पांचजन्य और स्वदेश के प्रकाशन में भरपूर सहयोग दिया। तीसरी कला के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता के रूप में महत्वपूर्ण योगदान दिया। चौथी कला मूल्य परक बेसिक शिक्षा के लिये सरस्वती शिशु मंदिरों का प्रारंभ किया इसकी आज बीस हजार शाखायें देश भर में हैं। पांचवी कला के रूप में कुशल राजनीति के रूप में जय प्रकाश नारायण की अगुवाई में समग्र क्रांति के आंदोलन में अपनी सहभागिता दिखाई। इसके साथ ही उन्होंने राजनीति के चरम शिखर को छूने के साथ ही साठ साल की आयु में स्वैछिक रूप से विरत हो जाने के बाद दीन दयाल शोध संस्थान की स्थापना कर गोंडा व चित्रकूट में विभिन्न प्रकल्पों को जीवंत रूप देकर मानव निर्माण करने का काम किया। &lt;br /&gt;ग्रामोदय के कुलपति प्रो. कृष्ण बिहारी पांडेय ने कहा कि नाना जी विश्वविद्यालय के शास्वत प्रेरणास्रोत हैं। नाना जी के आदर्शो पर चलकर ही विश्वविद्यालय परिवार समाज में अपने योगदान को प्रस्तुत करना चाहता है। कहा कि नाना जी का जाना सूर्यास्त के जैसा है। क्षेत्रीय विधायक सुरेन्द्र सिंह गहरवार, तुलसी शोध संस्थान के निदेशक अवधेश पांडेय, अनुसुइया आश्रम के प्रमुख चोला बाबा, कुलसचिव डा. बीएल बुनकर, डा. शिवराज ंिसह सेंगर, केपी मिश्र, डा. आरसी सिंह, डा. कमलेश थापक मौजूद रहे। संचालन डा. वीरेन्द्र कुमार व्यास ने किया।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-7066861625928070612?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/7066861625928070612/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/11/blog-post_6846.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/7066861625928070612'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/7066861625928070612'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/11/blog-post_6846.html' title='नाना जी का जाना सूर्यास्त के समान'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-47704754622810694</id><published>2010-11-07T22:21:00.000-08:00</published><updated>2010-11-07T22:21:12.797-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='वापस'/><title type='text'>धार्मिक आस्था के साथ स्वास्थ्य लाभ</title><content type='html'>&lt;h1 style="margin-top: 5px; padding-bottom: 0px; padding-left: 0px; padding-right: 0px; padding-top: 0px;"&gt;- शरद पूर्णिमा को जुटते हैं लाखों दमा और श्वांस के रोगी &lt;br /&gt;चित्रकूट, संवाददाता: पारस पीपल की जड़ी के सहारे शरद पूर्णिमा की धवल चांदनी रात में दमा और श्वांस की बीमारी से ग्रसित होने वाले लोगों का मेला आज की रात चित्रकूट के कामदगिरि परिक्रमा के प्रमुख द्वार के साथ ही अन्य स्थानों पर लगेगा। पिछले दस सालों से लगभग एक दर्जन से ज्यादा लोग दमा और श्वांस की बीमारी से निजात पाने का रास्ता शरद पूर्णिमा पर चित्रकूट में आकर देखते हैं। लगभग हर जगह नि:शुल्क रूप से बांटी जाने वाली आयुर्वेदिक दवा का वितरण रात बारह बजे के बाद होता है। हर जगह पर स्वयंसेवक अपने हाथों में दवा का प्रसाद लेकर निकलते हैं और रोगी का बिना चेहरा देखे खुले में बनाई गई खीर में दवा डालते चले जाते हैं। मान्यता है कि अगर यह दवा साधारण तौर पर ही चख ली जाये तो आगे दमा और श्वांस की बीमारी होने की संभावना काफी कम हो जाती है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;गौरतलब है कि पिछले सैकड़ों सालों से श्री कामदगिरि के राम मोहल्ला में बाबा उधौ प्रसाद के पारिवारिक जन शरद पूर्णिमा की रात को यह दवा रोगियों को निशुल्क रूप से देते हैं। राम की नगरी में जिझौतिया ब्राहमण परिवार द्वारा स्थापित गोपाल जी मंदिर का यह प्रसाद अभी तक लाखों लोगों को दवा का प्रभाव दिखा चुका है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;दवा बांटने का काम करने वाले नंदू भइया कहते हैं कि यह तो उनके पुरखों द्वारा बताई गई दवा है। कुछ लोग इसे पारस पीपल का नाम देते हैं और कुछ लोग अन्य चीजें बताते हैं। लेकिन वास्तव में यह स्वामी कामतानाथ का प्रसाद है। दवा शरद पूर्णिमा की रात निशुल्क रूप से वितरित की जाती है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;प्रमुख द्वार के बाहर प्रसाद की दुकान करने वाले चंद्र भान गुप्ता, बड़ा भइया कहते हैं कि इस प्रसाद को पाने के लिये लोग शाम से ही यहां पर आना प्रारंभ हो जाते हैं। सामने के मैदान के साथ ही पूरे परिक्रमा पथ पर लोग खुले आसमान के नीचे अमृत की बूदों को अपनी पत्तल में समेटने के लिये रात भर इंतजार करते हैं। सुबह चार बजे प्रसाद को चखने के बाद स्वामी कामतानाथ की परिक्रमा करने के बाद रोग से मुक्त होने की कामना के साथ वापस घर चले जाते हैं। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/h1&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-47704754622810694?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/47704754622810694/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/11/blog-post_07.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/47704754622810694'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/47704754622810694'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/11/blog-post_07.html' title='धार्मिक आस्था के साथ स्वास्थ्य लाभ'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-6299119070851177110</id><published>2010-11-07T22:19:00.000-08:00</published><updated>2010-11-07T22:19:45.154-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='शुभारंभ'/><title type='text'>आज से रामनाथ गोयनका घाट पर होगी विशेष प्रस्तुतियां</title><content type='html'>&lt;strong&gt;- विनोद राठौर, सुधा चंद्रन का नृत्य होगा आकर्षण का केंद्र&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;चित्रकूट, संवाददाता&lt;/strong&gt;: पहली बार धर्मनगरी के लोग युगऋषि नाना जी देशमुख का जन्म उनके बिना सियाराम कुटीर में मनायेंगे। धवल चांदनी रात में हर बार की तरह चावल की खीर का प्रसाद होगा पर अपने नाना नही होगें। &lt;br /&gt;शरद पूर्णिमा की धवल चांदनी रात में धर्मनगरी के सियाराम कुटीर के राम नाथ गोयनका घाट की सीढि़यों व नावों के द्वारा नदी में बनाये गये रज्जू मार्ग व घाट के दूसरी तरफ मंच पर अपनी कला बिखेरते देशी कलाकारों को देखने का आनंद एक बार फिर मिलेगा। तीन दिनों तक चलने वाले इस विशेष आयोजन के लिये तीन अलग-अलग विशेष हस्तियों को कार्यक्रम का शुभारंभ करने को आमंत्रित किया गया है। &lt;br /&gt;जिला प्रशासन सतना, दीनदयाल शोध संस्थान व संस्कृति संचालनालय मध्य प्रदेश द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार 22 अक्टूबर को शाम साढे सात बजे मध्य प्रदेश के संस्कृति, जनसंपर्क, उच्च शिक्षा, तकनीकि शिक्षा एवं प्रशिक्षण धार्मिक न्यास और धर्मस्व विभाग शुभारंभ करेंगे। शुक्रवार की शाम के कार्यक्रमों की शुरुआत सुप्रसिद्ध भजन गायक गोबिंद भार्गव करेगे। इसके साथ ही मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध लोक नृत्य बैगा, अहिराई व मटकी के साथ ही गोवा के घोड़ा मोड़नी, जम्मू कश्मीर के सैफ व डोगरी व आसाम के बिहू, सत्रिया व बोड़ो का प्रर्दशन भी होगा। इस दिन कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के मध्य क्षेत्र संचालक श्री कृष्ण माहेश्वरी करेंगे। जबकि विशिष्ठ अतिथि के रूप मे सांसद सतना गणेश सिंह व विधायक चित्रकूट सुरेन्द्र सिंह बघेल होगे। &lt;br /&gt;23 अक्टूबर को सुप्रसिद्ध फिल्मी पाश्‌र्र्व गायक विनोद राठौर गायन प्रस्तुत करेंगे जबकि इस दिन के कार्यक्रमों का शुभारंभ करने के लिये मध्य प्रदेश के राज्य मंत्री किसान कल्याण एवं कृषि विकास बृजेन्द्र प्रताप सिंह आयेंगे। इस दिन के कार्यक्रम की अध्यक्षता दीन दयाल शोध संस्थान के उपाध्यक्ष शंकर प्रसाद ताम्रकार करेंगे। इसी रात को शास्त्रीय समूह नृत्य गंगा अवतरण की प्रस्तुति देवलीना पाल लखनऊ के साथ ही कोलकाता की डोना गांगुली ओडसी नृत्य प्रस्तुत करेंगी। &lt;br /&gt;शरदोत्सव की तीसरी रात का आकर्षण दुर्गा समूह नृत्य की प्रस्तुति मुम्बई से आ रही सुप्रसिद्ध नृत्यांगना सुधा चंद्रन की होगी। इस रात के कार्यक्रम की शुरूआत राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार ऊर्जा, खनिज साधन, राजेन्द्र शुक्ला होगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता दीन दयाल शोध संस्थान के अध्यक्ष वीरेन जीत सिंह करेंगे। रात में मांगणियार गायन भंगूर खां और साथी प्रस्तुत करेंगे।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-6299119070851177110?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/6299119070851177110/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/11/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/6299119070851177110'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/6299119070851177110'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/11/blog-post.html' title='आज से रामनाथ गोयनका घाट पर होगी विशेष प्रस्तुतियां'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-1379443957509952599</id><published>2010-09-11T22:49:00.001-07:00</published><updated>2010-09-11T22:49:33.192-07:00</updated><title type='text'>सूर्य का उपहार</title><content type='html'>&lt;table border="0" cellpadding="0" cellspacing="0" style="text-align: left;"&gt;&lt;tbody&gt;&lt;tr&gt;&lt;td class="cattext"&gt;&lt;span&gt;चित्रकूट के पास एक जगह है सूरज कुंड, जहां लोग साधना करने जाते हैं। &lt;br /&gt;एक समय की बात है। महर्षि भगुनंदनजमदग्निधनुष-बाण से खेल रहे थे। वे किसी खाली स्थान पर बार-बार बाण चला रहे थे। उनकी पत्नी रेणुका बार-बार बाण लाकर दे रही थीं, लेकिन जेठ माह के तपते सूर्य ने उन्हें परेशान कर दिया। इस वजह से उन्हें बाण लाने में देरी भी हो जाती। महर्षि ने उनसे इसकी वजह पूछी। उन्होंने जवाब दिया कि सूर्य की तेज रोशनी न केवल हमारे सिर को तपा रही है, बल्कि पैर भी जला रही है। इतना सुनते ही महर्षि क्रोधित हो गए और कहा-देवी जिस सूर्य ने तुम्हें कष्ट पहुंचाया, उसे मैं अपने अग्निअस्त्र से गिरा दूंगा। जैसे ही उन्होंने धनुष पर बाण चढाया, भयभीत होकर भगवान सूर्य ने ब्राह्मण का वेश धारण कर लिया और उनके सामने प्रकट हो गए। उन्होंने उनसे विनती की कि मुझे अपनी गलती का अहसास हो गया है। &lt;br /&gt;साथ ही, उन्होंने एक जोडी पादुका और एक छत्र महर्षि को उपहार स्वरूप प्रदान कर दिए। उन्होंने कहा कि यह छत्र सिर पर पडने वाली किरणों से आपका बचाव करेगा और पादुकाएं तपती जमीन पर पैर रखने में सहायता करेंगे। मान्यता है कि यह घटना चित्रकूट से दस किलोमीटर की दूरी पर सूरजकुंड में हुई थी। महाभारत में भी इस घटना का उल्लेख मिलता है। भक्त मानते हैं कि यह स्थान प्रकृति का अनमोल वरदान है। इसलिए यह कई ऋषि-मुनियों की तपस्थलीभी है। आज भी लोग साधना और ध्यान के लिए सूरजकुंड जाते हैं। &lt;br /&gt;मान्यता है कि वहां जाने के बाद न केवल हमारे सभी बुरे संस्कार समाप्त हो जाते हैं, बल्कि हमारा अंतस भी पवित्र हो जाता है। संभवत:यही संस्कार परमात्मा के नजदीक जाने के लिए आवश्यक कारक बनते हैं। &lt;br /&gt;-[संदीप रिछारिया]&amp;nbsp; धर्ममार्ग जागरण से साभार &lt;/span&gt;   &lt;/td&gt;  &lt;/tr&gt;&lt;tr&gt;   &lt;td align="right" class="coverstorycontent"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/td&gt;  &lt;/tr&gt;&lt;tr&gt;   &lt;td&gt;&amp;nbsp;&lt;/td&gt;&lt;/tr&gt;&lt;/tbody&gt;&lt;/table&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-1379443957509952599?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/1379443957509952599/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/09/blog-post.html#comment-form' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/1379443957509952599'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/1379443957509952599'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/09/blog-post.html' title='सूर्य का उपहार'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-3462709315231393896</id><published>2010-07-08T00:11:00.001-07:00</published><updated>2010-07-08T00:11:27.179-07:00</updated><title type='text'>हितकारी चिंतन</title><content type='html'>अपने चारो ओर मंगल का फैलाव करो ताकि तुम्‍हें मंगलित करने के लिये पूरा विश्‍व तैयार हो सके। &lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-3462709315231393896?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/3462709315231393896/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/07/blog-post_08.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/3462709315231393896'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/3462709315231393896'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/07/blog-post_08.html' title='हितकारी चिंतन'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-2743788285457496352</id><published>2010-07-07T23:48:00.000-07:00</published><updated>2010-07-07T23:48:10.440-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='प्रयासरत हैं।'/><title type='text'>बुंदेलखंड में रोजगार का जरिया बना सकता पलाश</title><content type='html'>चित्रकूट। योगेश्वर श्री कृष्ण की लीलाओं से सीधे सरोकार रखने वाले पलाश के पेड़ को लेकर अब शासन गंभीर हो चला है। अगर विकास विभाग की मंशा के अनुरुप काम हुआ तो आने वाले समय पलाश का पौधा भी पूरे बुंदेलखंड के ग्रामीण इलाकों के लोगों के लिए आय का एक अच्छा जरिया बन सकता है। प्रभारी मुख्य विकास अधिकारी प्रमोद कुमार श्रीवास्तव भी इन दिनों लैक कल्चर को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए पलाश के पौधों का संरक्षण करने को प्रयासरत हैं। मालूम रहे आयुर्वेद के जानकार भी इसके विभिन्न अवयवों से जटिल रोगों की औषधियों को बना रहे हैं। गौरतलब है कि होली की मस्ती बिना रंगों के अधूरी है और रंगों को पहले फूलों व पत्तियों से ही प्राप्त किया जाता था। इनमें सबसे ऊपर नाम पलाश का ही आता है। फागुन के महीने में पलाश के पौधे पर लगे सुर्ख लाल रंग के फूल लोगों को न केवल अपनी ओर आकर्षित करने का काम करते हैं बल्कि इनसे अच्छी क्वालिटी का रंग भी तैयार होता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि इसका फूल तोड़े जाने के काफी दिनों बाद भी उपयोग में लाने लायक बना रहता है। प्रभारी सीडीओ कहते हैं कि महाराष्ट्र के गोंदिया जिले में पलाश के पौधे से निकलने वाली गोंद से लाख का निर्माण होता है। जिसका प्रयोग महिलाओं के लिये चूडि़यां व कड़े बनाने में होता है। इसके साथ ही वहां पर फूलों से रंग और पत्तियों से पत्तल बनाने का काम भी होता है। यहां के साथ ही समूचे बुंदेलखंड में तो बहुतायत में पलाश का पौधा पाया जाता है। स्थानीय भाषा में इसे छिउल कहा जाता है और इसके नाम पर तो पूरा गांव छिउलहा ही बसा हुआ है। &lt;br /&gt;उन्होंने कहा कि गोंदिया में तो लैक कल्चर का करोड़ों का व्यापार किया जाता है। जिससे काफी मात्रा में विदेशी मुद्रा भी प्राप्त होती है। जल्द ही यहां से किसानों व समाजसेवियों के दल को गोंदिया भेजा जायेगा। जिससे वे इसका उपयोग करना सीखें और पलाश के पौधों का उपयोग करें। उधर, आरोग्यधाम की रसशाला के प्रबंधक डा. विजय प्रताप सिंह का कहना है कि पलाश के पौधे का औषधीय प्रयोग काफी समय से हो रहा है पर यहां प्रमुख रुप से कृमि रोगों की दवा इससे बनती है। साथ ही बालों में लगाये जाने वाली डाई में भी इसे इस्तेमाल किया जा रहा है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-2743788285457496352?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/2743788285457496352/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/07/blog-post_2415.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/2743788285457496352'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/2743788285457496352'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/07/blog-post_2415.html' title='बुंदेलखंड में रोजगार का जरिया बना सकता पलाश'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-8709905835455605462</id><published>2010-07-07T23:37:00.000-07:00</published><updated>2010-07-07T23:37:12.671-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='प्लेटफार्म'/><title type='text'>जल्द चित्रकूट धाम कर्वी होगा आदर्श स्टेशन</title><content type='html'>चित्रकूट। धर्मनगरी के रेलवे स्टेशन को अब आदर्श स्टेशनों की तरह विकसित करने की जद्दोजहद करने में अधिकारी लगे हुये हैं। जहां एक तरफ प्लेटफार्म एक को ऊंचा बनाने के साथ ही पुराने पत्थर निकालकर कोटा स्टोन लगाये जाने का काम इन दिनों तेजी से चल रहा है वहीं प्लेटफार्म नम्बर दो को भी पूरा पक्का कराने का काम किया जा रहा है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सहायक अभियंता निर्माण पी के श्रीवास्तव कहते हैं कि आदर्श स्टेशन बनाने के जितने मानक हैं उन सभी बिंदुओं पर यहां पर काम किया जा रहा है। जल्द ही प्लेटफार्म का नया स्वरुप सभी के सामने होगा। &lt;br /&gt;उन्होंने बताया कि प्लेटफार्मो को और चौड़ा व बड़ा बनाया जा रहा है। प्लेटफार्म नम्बर एक को ऊंचा किया जा रहा है साथ ही पूरे में कोटा स्टोन लगाने का काम किया जा रहा है। एरिया का विस्तार किया जा रहा है और नये शेड़ के नीचे पूरे में कोटा स्टोन लगाया जायेगा। दो नम्बर प्लेटफार्म में भी कोटा स्टोन लगाने के साथ ही छोटे-छोटे और काम करवाये जायेंगे।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-8709905835455605462?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/8709905835455605462/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/07/blog-post_8894.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/8709905835455605462'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/8709905835455605462'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/07/blog-post_8894.html' title='जल्द चित्रकूट धाम कर्वी होगा आदर्श स्टेशन'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-4280697799591348319</id><published>2010-07-07T23:36:00.000-07:00</published><updated>2010-07-07T23:36:07.395-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='धर्म नगरी की मंदाकिनी'/><title type='text'>गंगा दशहरा : डुबकी लगा कमाया पुण्य</title><content type='html'>चित्रकूट। पतित पावनी मां गंगा के अवतरण दिवस पर धर्म नगरी से होकर गुजरने वाली पापभक्षणी मां मंदाकिनी में डुबकी लगाने वालों की संख्या लाखों में रही। लोगों ने महादेव की जटाओं से होकर मृत्यु लोक में आने वाली मां गंगा की आरती पूजा भी की। इस मौके पर निर्माेही अखाड़े के संतों के संयोजकतत्व में मां गंगा की स्तुति पूजन के साथ ही नावों पर बैठकर चौबीस घंटे का श्री राम नाम संकीर्तन प्रारंभ कर दिया गया। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जानकारी के मुताबिक सोमवार की सुबह से ही धर्म नगरी की मंदाकिनी नदी के रामघाट, राघव प्रयाग घाट, प्रमोद वन, जानकीकुंड, आरोग्यधाम, सिरसावन, स्फटिक शिला, अनुसुइया आश्रम, सूर्य कुंड के साथ ही मऊ व राजापुर के यमुना नदी के घाटों के साथ ही वाल्मीकि नदी पर भारी संख्या में श्रद्धालुओं का तांता उमड़ पड़ा। लोग हर हर गंगे का उद्घोष करके पवित्र नदियों में डुबकियां लगा रहे थे। चित्रकूट में घाट किनारे के पुरोहित मां मंदाकिनी के महत्व को लोगों को बता रहे थे। &lt;br /&gt;इसके साथ ही निर्माेही अखाड़े के संयोजकतत्व में विश्व हिंदू परिषद ने गंगा दशहरे पर हवन पूजन व मां मंदाकिनी का अभिषेक कराया। इसके साथ नावों पर बैठकर चौबीस घंटों के प्रभु नाम संकीर्तन का भी शुभारंभ कराया गया। इस मौके पर निर्मोही अखाड़े के महन्त ओंकार दास, भरत मंदिर के दिव्य जीवन दास, अनूप दास, विहिप के प्रचारक भोले जी, दयाशंकर गंगेले, भाजपा जिलाध्यक्ष दिनेश तिवारी, मनोज तिवारी ,मुन्ना पुजारी सहित भारी संख्या में लोग मौजूद रहे।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-4280697799591348319?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/4280697799591348319/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/07/blog-post_7963.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/4280697799591348319'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/4280697799591348319'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/07/blog-post_7963.html' title='गंगा दशहरा : डुबकी लगा कमाया पुण्य'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-9148986894998082083</id><published>2010-07-07T23:34:00.000-07:00</published><updated>2010-07-07T23:34:34.004-07:00</updated><title type='text'>राजमाता को पूर्व जन्म का भावात्मक लगाव ले आया चित्रकूट</title><content type='html'>चित्रकूट। श्री राम सांस्कृतिक शोध संस्थान न्यास के अन्तर्गत श्री राम वन पथ गमन पथ संग्रहालय का लोकार्पण करने आयी कर्नाटक प्रांत के किष्िकधा की राजमाता महारानी चंद्रकांता ने मीडिया से बात करते हुये चित्रकूट को भगवान राम की मुख्य कर्मस्थली करार देते हुये कहा कि भले ही वे यहां पहली बार आयीं हों पर हर नवरात्रि पर श्री राम चरित मानस के पाठ करने के कारण वे इस तपोभूमि से प्रत्यक्ष रुप से बचपन से जुड़ी हैं। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;उन्होंने कहा कि वैसे तो श्री हनुमान का जन्म सुमेरु पर्वत पर हुआ था पर उनका यौवन और बचपन ऋषमूक पर्वत किष्किंधा पर ही बीता। यहीं पर भगवान राम और हनुमान का मिलन हुआ था। उसी स्थान पर संत व्यास राम को भगवान हनुमान ने स्वप्न देकर अपनी मूर्ति की स्थापना करवाई थी। पम्पा सरोवर पहले विषैला था पर वह श्री राम के आर्शीवाद के कारण माता शबरी के चरणों से ही स्वच्छ और निर्मल हो गया। &lt;br /&gt;उन्होंने कहा कि बचपन से ही वे भगवान राम मां सीता के प्रति अगाध प्रेम व आस्था रखती आई हैं पर चित्रकूट को देखने का पहली बार सौभाग्य मिला है। यहां की सीमा में प्रवेश करते ही ऐसा लगा कि मेरा पूर्व जन्म में यहां से भावात्मक लगाव रहा है जिसके कारण वे काफी रोमांचित हैं। बताया कि वे मप्र के नरसिंहगढ़ जिले के राजा विक्रमादित्य के पवार वंश की बेटी हैं। &lt;br /&gt;श्री राम सांस्कृतिक शोध संस्थान के निदेशक डा. राम अवतार शर्मा ने चित्रकूट के अपने प्रवास को अलौकिक करार देते हुये कहा कि यहां तो प्रभु राम कण-कण में विराजते हैं। इसलिये ही यहां पर संग्रहालय का संकल्प लिया। चित्रकूट से पिछले 25 सालों से किसी न किसी रुप में संबंध रहा और अब ज्यादा प्रगाढ़ हो जायेगा। उन्होंने राजमाता के बारे में बताते हुये कहा कि भले ही वे राजवंश की बहू हैं पर वे किष्किंधा में होने वाले छोटे-छोटे से छोटे भगवत आयोजन में पहुंचने के साथ ही बिना किसी संस्था के माध्यम से हर वर्ष गरीब बालिकाओं की शादी कराती हैं। कार्यक्रम संयोजक गायत्री शक्ति पीठ के व्यवस्थापक डा. राम नारायण त्रिपाठी ने जब बाहर से आये सभी अतिथियों को विराध कुंड, अमरावती, वाल्मीकी आश्रम, भरतकूप के साथ ही अन्य विलक्षण स्थानों के दर्शन करवाये तो सभी काफी भावविभोर हो गये। &lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/TDVxV0jXSuI/AAAAAAAAAZQ/VYXJVGKUrA4/s1600/c19-1_1276984189_m.jpg" imageanchor="1" style="clear: right; cssfloat: right; float: right; margin-bottom: 1em; margin-left: 1em;"&gt;&lt;img border="0" rw="true" src="http://2.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/TDVxV0jXSuI/AAAAAAAAAZQ/VYXJVGKUrA4/s320/c19-1_1276984189_m.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-9148986894998082083?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/9148986894998082083/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/07/blog-post_4968.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/9148986894998082083'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/9148986894998082083'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/07/blog-post_4968.html' title='राजमाता को पूर्व जन्म का भावात्मक लगाव ले आया चित्रकूट'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/TDVxV0jXSuI/AAAAAAAAAZQ/VYXJVGKUrA4/s72-c/c19-1_1276984189_m.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-1871956719770777808</id><published>2010-07-07T23:31:00.000-07:00</published><updated>2010-07-07T23:31:07.924-07:00</updated><title type='text'>अलौकिक रहस्यों की भूमि चित्रकूट</title><content type='html'>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/TDVwoVErcpI/AAAAAAAAAZI/nLD8k0KPsOE/s1600/c14-1_1277075722_m.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; cssfloat: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" rw="true" src="http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/TDVwoVErcpI/AAAAAAAAAZI/nLD8k0KPsOE/s320/c14-1_1277075722_m.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;चित्रकूट। 'चित्रकूट एक औषधि सचवत करत सचेत' वैसे तो तमाम पुराणों के साथ ही महर्षि वाल्मीकि और संत शिरोमणि तुलसीदास जी महाराज ने जब श्री राम चरित मानस के माध्यम से अलौकिक तीर्थ चित्रकूट के महत्व को सामने लाने का काम किया तो विश्व भर के लोग यहां के पहाड़ों कंदराओं और जंगलों में छिपे रहस्यों को समझने का प्रयास करने लगे। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;संत इब्राहिम अली 'गोविंद बाबा' ने चित्रकूट के महत्व को अपने शब्दों में परिभाषित करते हुये कहा कि इस तीर्थ का निर्माण ही सत्य को लेकर हुआ है। इसलिये यह विश्व भर में देदीप्तमान नक्षत्र की तरह चमक रहा है। यह बात और है कि यहां पर आने वाले भक्त केवल अभी बाहरी चमक दमक देख रहे हैं पर वास्तव में जल्द ही यहां के वे रहस्य भी सामने आने वाले हैं जिनके बारे में केवल पुराने ऋषियों को ही मालूम था। &lt;br /&gt;उन्होंने बाबा तुलसीदास जी की लिखी चौपाई चित्रकूट एक औषधि, सचवत करत सचेत को विस्तार पूर्वक समझाते हुये कहा कि जब आडंबर का सांप लोगों को डसने के लिये खड़ा होता है तो चित्रकूट एक औषधि के समान खड़ा होकर व्यक्ति का साथ देता है और उसके अंदर के इंसान को जगाकर पुरुषार्थी के रुप में सामने लाता है। भगवान राम को जब जंगल में आना पड़ा तो चित्रकूट ने ही उन्हें इतना बलवान बनाया कि उन्होंने राक्षस राज रावण को मारकर सत्य व न्याय की रक्षा की। &lt;br /&gt;उन्होंने कहा कि चित्रकूट के कण-कण में परमपिता का निवास है यहां की भूमि प्रार्थनाओं की भूमि है जहां आदिकाल से संत ऋषि प्रार्थनाओं में लीन हैं। &lt;br /&gt;समाजसेवी गुलाब सिंह के आवास में उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि सत्य को न तो मारा जा सकता है न काटा जा सकता है। वह तो सूर्य के समान हमेशा चमकता ही रहेगा।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-1871956719770777808?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/1871956719770777808/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/07/blog-post_8209.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/1871956719770777808'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/1871956719770777808'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/07/blog-post_8209.html' title='अलौकिक रहस्यों की भूमि चित्रकूट'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/TDVwoVErcpI/AAAAAAAAAZI/nLD8k0KPsOE/s72-c/c14-1_1277075722_m.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-6394261348547030883</id><published>2010-07-07T23:28:00.000-07:00</published><updated>2010-07-07T23:28:59.292-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='महर्षि वाल्मीकि'/><title type='text'>भरत मिलाप में हैं सर्वाधिक प्रमाणित चरण चिंह</title><content type='html'>चित्रकूट। 'जहं जहं चरण पड़े रघुराई' कुछ ऐसी ही इच्छा लेकर जब डा. राम अवतार शर्मा आगे बढ़े तो एक सत्संकल्प था 'राम काज कीन्हें बिना मोहीं कहां विश्राम'। लेकिन जब चित्रकूट के प्रसंगों को अयोध्या कांड में डा. शर्मा ने पढ़ा तो वे चौंक पड़े , इससे भी ज्यादा तो वे भावविभोर तब हुये जब वे खुद चित्रकूट पहुंचे। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;श्री राम चरित को विश्व से परिचित कराने वाले महर्षि वाल्मीकि हों या फिर जन-जन को श्री राम के चरित्र को मर्यादा पुरुषोत्तम का स्वरुप दिलाने वाले गोस्वामी तुलसी दास दोनो ने ही प्राकृतिक सुषमा से भरी इस तीर्थ शिरोमणि स्थली के तप वैभव के बारे में काफी कुछ लिखा। बस इस बात को देखकर और भगवान श्री राम के दूसरे दौर के वन गमन पर चित्रकूट में सर्वाधिक समय व्यतीत करने को लेकर जब वे यहां पर आये तो भरत मिलाप पर भगवान के चरण-चिंह देखकर तो निश्चित ही कर बैठे कि अगर कहीं पर भगवान के वन पथ गमन का संग्रहालय बनेगा तो वह यही भूमि होगी। &lt;br /&gt;डा. शर्मा बताते हैं कि विश्व भर में एक जगह पर इतने सारे विभिन्न प्रकार के चरण चिंह कहीं और नही मिलते और न ही कहीं पर प्रभु की करुणा व भाइयों का प्रेम देखकर शिलाओं के पिघल जाने का प्रमाण मिलता है। भगवान राम, मां सीता और भ्राता लक्ष्मण के चरण चिंहों से पवित्र इस भूमि के कण-कण में भगवान स्वयं विराजते हैं। आज भी उनकी ऊर्जा की स्वीकारोक्ति मिलती है। वे बताते हैं कि प्रभु के पद इस जिले में सबसे पहले मुरका पर पड़े थे आज यहां पर हनुमान मंदिर है। इसके बाद ऋषियों की तपस्थली ऋषियन गांव में जिस पहाड़ी पर वे रुके थे उसका नाम अब सीता पहाड़ी के नाम से है। इसके बाद गरौली घाट से यमुना नदी को पार किया था। यहां पर 'तेहि अवसर एक तापस आवा' वाला प्रसंग हुआ था। अगला पड़ाव रामनगर का कुमार द्वय तालाब था। भगवान ने अपनी वन यात्रा की पांचवीं रात्रि का विश्राम रैपुरा तत्कालीन नाम रैनपुरा में किया था और यहां से प्रात: चार बजे वाल्मीकी नदी में स्नान कर चैत्र शुक्ल पूर्णिमा चित्रा नक्षत्र में आठ बजे दिन श्री कामदगिरि पहुंचे थे। प्रभु श्री राम ने चित्रकूट परिक्षेत्र के अनुसुइया आश्रम, गुप्त गोदावरी, स्फटिक शिला, राघव प्रयाग में तो अपने चरण चिंह धरे ही साथ ही मडफा, भरतकूप, अमरावती, विराध कुंड, पुष्करिणी सरोवर, मांडकर्णी आश्रम, श्रद्धा पहाड़ जैसे तमाम और स्थानों पर जाकर वहां पर तप में लगे ऋषियों से मिले। मांड़कर्णी आश्रम के पास ही उन्होंने भीलनी शबरी के जूठे बेर भी चखे थे। &lt;br /&gt;उन्होंने कहा कि श्री राम बन पथ गमन का उद्देश्य अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को जन-जन तक पहुंचाना है। जिससे लोग यह जाने कि वास्तव में श्री राम का चरित्र क्या था और हमारे लिये उसमें से ग्रहण करने योग्य क्या है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-6394261348547030883?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/6394261348547030883/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/07/blog-post_07.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/6394261348547030883'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/6394261348547030883'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/07/blog-post_07.html' title='भरत मिलाप में हैं सर्वाधिक प्रमाणित चरण चिंह'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-5568862576609171187</id><published>2010-07-07T23:26:00.000-07:00</published><updated>2010-07-07T23:26:26.710-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='लक्ष्मी नारायण'/><title type='text'>यूं नष्ट हो रहा है चित्रकूट का पुरातात्विक वैभव</title><content type='html'>चित्रकूट। 'तत: परिप्लवं गच्छेज्तीर्थ त्रलोक्य पूजितं। अग्निष्टों मत्रि रात्रि फलं प्राप्नोति मानव:।' कुछ इस तरह से पुराने अनाम ऋषि द्वारा लिखे गये 'वृहद चित्रकूट महात्म' में प्राकृतिक सुषमा से आच्छादित मंदाकिनी की धारा से सिंचित प्रमोद वन के महत्व को दर्शाया गया है। प्रमोदवन को पारिपल्लव नाम से संबोधित करते हुये कहा गया है कि जो व्यक्ति यहां पर तीन रात्रि निवास करता है उसे अग्निहोम यज्ञ के समान फल मिलता है। यह स्थान तीनों लोकों में पूजित है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;लगभग साढ़े तीन सौ साल पहले रींवा नरेश रघुराज सिंह ने प्रमोदवन में लक्ष्मी नारायण मंदिर का निर्माण कराने के साथ ही विशाल यज्ञ करवाया था। बताया जाता है कि इस यज्ञ को करने में 300 पंडि़तों ने लगातार दो साल से त्रिकाल संध्या के माध्यम से पाठ किया था। &lt;br /&gt;स्वामी राम सखेन्द्र जी महाराज बताते हैं कि वास्तव में यह कोठरियां राजा रघुराज सिंह ने पुत्र कामेष्ठि यज्ञ को पूरा करने के लिये बनवाई थी। लक्ष्मी नारायण मंदिर के प्रांगण में पुत्र कामेष्ठि वृक्ष भी हिमालय से लाकर लाया गया था। &lt;br /&gt;यहां पर रहने वाले अर्चन पंडि़त कहते हैं कि पुरातात्विक महत्व के इस विशाल मंदिर के बीस कमरों पर पहले तो वृद्ध सेवा सदन ने ही अतिक्रमण कर रखा था। वैसे बेसहारा वृद्धों के रहने के कारण इसमें कोई गलत नही था पर प्रशासन ने जिस अंदाज में इस प्राचीन इमारत के बीस कमरों को गिराया है। यह गलत है। उन्होंने कहा कि पुरातात्विक महत्व की इस इमारत का जहां सरकार को संरक्षण कर इसके जीर्णोधार की बात सोचनी चाहिये वहीं इसे गिराया जाना गलत है। &lt;br /&gt;महंत कौशलेन्द्र दास ब्रह्मचारी कहते हैं कि जिस प्रकार अतिक्रमण विरोधी अभियान के अन्तर्गत मंदिरों, मठों, धर्मशालाओं और पुरातात्विक महत्व की इमारतों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है लगता ही नही कि उसी पार्टी भाजपा का यहां पर राज है जिसके मुखिया ने इसे पवित्र नगरी घोषित कर मेगा डिस्टेनेशन प्लान बनाकर विकास कार्यो की झड़ी लगा रखी है। मंदाकिनी की जमीन पर जिन भूमाफियाओं ने कब्जा कर बेंचने का काम जारी कर रखा है उसको खाली कराने का काम कोई नही करता। कहा कि चित्रकूट के पुराने नक्शे को गायब करने का कुचक्र भी उन्हीं भूमाफियाओं ने रचा है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-5568862576609171187?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/5568862576609171187/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/07/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/5568862576609171187'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/5568862576609171187'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/07/blog-post.html' title='यूं नष्ट हो रहा है चित्रकूट का पुरातात्विक वैभव'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-7083606854510020171</id><published>2010-03-29T23:16:00.000-07:00</published><updated>2010-03-29T23:16:03.620-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='परियोजनाओं का शिलान्यास'/><title type='text'>चित्रकूट विकास में धन की कमी आडे़ नहीं आयेगी : शिवराज सिंह चौहान</title><content type='html'>चित्रकूट। धर्मनगरी के विकास के लिए म.प्र. के मुख्यमंत्री ने महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के प्रांगण से चित्रकूट मेगा डेस्टीनेशन परियोजना का शुभारंभ किया। इस मौके पर बोलते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि चित्रकूट के विकास में धन की कमी आडे़ नहीं आयेगी। इस दौरान उन्होंने भरत घाट से कामदगिरि मार्ग, मंदाकिनी में एक अतिरिक्त पुल के निर्माण के साथ ही सूर्यकुंड, गुप्त गोदावरी, हनुमान धारा की ग्यारह परियोजनाओं का शिलान्यास किया। म.प्र के मुख्यमंत्री ने राघव प्रयाग घाट के निर्माण की आधार शिलाएं रखते हुये भरत घाट व राघव प्रयाग घाट का लोकार्पण किया। इन परियोजनाओं के अलावा भी उन्होंने सतना जिले की अन्य परियोजनाओं का शिलान्यास भी किया। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इसके बाद शिवराज सिंह चौहान ने अपनी सरकार की उपलब्धियां गिना तालियां बटोरी साथ ही महिलाओं, कन्याओं व हाल ही में पैदा हुये बच्चों को चेक भी बांटीं। इस दौरान उन्होंने समाजसेवी नाना जी देशमुख को याद करते हुये कहा कि दीन दयाल शोध संस्थान का बोध वाक्य 'हम अपने लिये नही अपनों के लिये हैं अपने वे हैं जो उपेक्षित हैं' वास्तव में कुछ कर गुजरने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि तीन साल बाद इस बार गेंहू का उत्पादन अच्छा हुआ है। मध्य प्रदेश शासन ने गेंहू का समर्थन मूल्य केंद्र सरकार द्वारा तय मूल्य से अधिक रखा है। प्रदेश में बारह सौ रुपये प्रति कुंटल गेंहू खरीदा जायेगा। किसानों को कर्जा भी केवल तीन प्रतिशत ब्याज पर दिया जा रहा है। नगरीय समग्र स्वच्छता अभियान में चित्रकूट को शामिल करने के साथ ही सभी योजनाओं के अलावा पच्चीस लाख रूपये देने की घोषणा की। इस दौरान उन्होंने कहा कि सभी लोग अपना कर्तव्य पूरा करें, जनप्रतिनिधि हवाला घोटाला न करें और जनता की सेवा करें। बच्चों को स्कूल भेजें, साल में एक पेड़ लगाकर उसे जिंदा रखें, गांव का पानी गांव में रोकें, नशा मुक्त गांव बनायें व सरकारी योजनाओं के सही क्रियान्वयन में सरकार को सहयोग करें। &lt;br /&gt;खेलकूद, पर्यटन एवं युवा कल्याण मंत्री तुको जी राव ने कहा कि पहले चित्रकूट के विकास के लिये 6 करोड़ प्रदेश सरकार ने दिये थे जिसमें पांच करोड़ खर्च कर दिये गये हैं। एक करोड़ के काम एक महीने में पूरे हो जायेंगे। उन्होंने कहा कि धर्मनगरी चित्रकूट का विकास करना सरकार की न केवल मंशा है बल्कि प्रमुख लक्ष्य है। प्रभारी मंत्री ऊर्जा, खनिज राजेन्द्र शुक्ल, सांसद गणेश सिंह व विधायक सुरेन्द्र सिंह गहरवार ने भी संबोधित किया। ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. ज्ञानेन्द्र सिंह ने शाल व प्रमुख द्वार कामतानाथ मंदिर के प्रतिनिधि ने उन्हें श्री फल भेंट किया। &lt;br /&gt;इसके पूर्व आरोग्य धाम परिसर में आने के बाद मुख्यमंत्री का काफिला सियाराम कुटीर पर पहुंचा। शनिवार को पहले नाना जी के मासिक श्राद्ध होने के चलते यहां पर पहुंचे मुख्यमंत्री ने उनके कमरे में जाकर अपने श्रद्धासुमन अर्पित किये। यहां पर अप्रवासी भारतीय डा. नरेश शर्मा ने उनसे नाना जी की यादें बांटी। इसके बाद मुख्यमंत्री स्फटिक शिला परिसर में पहुंचे। यहां पर काफी दिनों से रुक-रुक चल रहे मंदाकिनी सफाई अभियान में हाथ बंटाने के साथ ही मंदाकिनी का पूजन-अर्चन किया। इस दौरान गायत्री परिवार के व्यवस्थापक डा. राम नारायण त्रिपाठी व भारी संख्या में लोग मौजूद रहे।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-7083606854510020171?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/7083606854510020171/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/03/blog-post_1925.html#comment-form' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/7083606854510020171'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/7083606854510020171'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/03/blog-post_1925.html' title='चित्रकूट विकास में धन की कमी आडे़ नहीं आयेगी : शिवराज सिंह चौहान'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-3000388959188826499</id><published>2010-03-29T23:14:00.001-07:00</published><updated>2010-03-29T23:14:45.801-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='एक श्रद्धांजलि सभा'/><title type='text'>सभी ने याद किया नानाजी को</title><content type='html'>चित्रकूट। चित्रकूट के विकास के लिये मील का पत्थर रहे समाजसेवी नाना जी देशमुख का प्रथम मासिक श्राद्ध मनाने महाराष्ट्र से एक विशेष ट्रेन के जरिये लगभग आठ सौ लोग शुक्रवार की देर शाम चित्रकूट पहुंचे। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;उद्यमिता विद्यापीठ के परिसर में ही शनिवार की शाम को एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। जिसमें बाहर से आये सभी लोगों ने अपने विचार व्यक्त करने के बाद नाना जी को भाव भीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान नाना जी के कामों को आगे बढ़ाने की शपथ काफी लोगों ने ली। &lt;br /&gt;उद्यमिता की निदेशक डा. नंदिता पाठक ने कहा कि वास्तव में नाना जी ने यहां माडल विकसित कर यह बताने का प्रयास किया है कि गांव में रहने वाले हों या फिर शहर में रहने वाले अगर सहजीवन जियें तो कभी कोई दिक्कत नही आ सकती। अगर अपना जीवन दूसरों की भलाई के लिये समर्पित करना है तो नाना जी से बड़ा कोई दूसरा उदाहरण नही हो सकता। &lt;br /&gt;शनिवार को बाहर से आये सभी लोगों ने दीनदयाल शोध संस्थान के प्रकल्पों आरोग्य धाम, बनवासी आश्रम, गुरुकुल, राम दर्शन, कृषि विज्ञान केंद्र गनीवां व मझगंवा व अन्य स्थलों का अवलोकन किया।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-3000388959188826499?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/3000388959188826499/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/03/blog-post_7072.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/3000388959188826499'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/3000388959188826499'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/03/blog-post_7072.html' title='सभी ने याद किया नानाजी को'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-2563335614224604554</id><published>2010-03-29T22:52:00.000-07:00</published><updated>2010-03-29T22:52:15.644-07:00</updated><title type='text'>अमावस्या पर भी जारी रही पुलिस की कमाई</title><content type='html'>चित्रकूट। इस बार की सोमवती अमावस्या के मौक पर एलआईयू काफी सक्रिय रही। जगह-जगह लोगों को रोक-रोक कर उनके सामान की जांच की गई। जिलाधिकारी विशाल राय की कड़ाई काम आ ही गई। ऐन सोमवती अमावस्या के दस दिन पहले ली गई सभी विभागों की बैठक में अमावस्या के मौके पर मेला परिक्षेत्र में व्यवस्थाओं को चौकस रखने के निर्देशों का असर यहां देखने को मिला। रोडवेज वाहनों की कमी के चलते डग्गामार वाहनों की चांदी रही। कर्वी से चित्रकूट तक चलने वाले टैंपो व टैक्सी वालों ने हद कर दी। सवारियों को बेरोकटोक बाहर लटकाकर चलते रहे। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;रामघाट में यात्रियों को डूबने से बचाने के लिये गोताखोर पुलिस की टीम डटी रही। अग्निशमन विभाग अपनी ड्यूटी पर मुस्तैद रहा वहीं कुछ पुलिस कर्मियों ने अमावस्या के मौके पर भी अपनी वाहन चेकिंग का काम जारी रखा। दो पहिया वाहन चालक तो परेशान किये ही गये साथ ही कुछ टैक्सी टैम्पों वालों का भी चालान कर कोतवाली पहुंचा दिया गया।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-2563335614224604554?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/2563335614224604554/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/03/blog-post_1965.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/2563335614224604554'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/2563335614224604554'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/03/blog-post_1965.html' title='अमावस्या पर भी जारी रही पुलिस की कमाई'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-6850521052489062719</id><published>2010-03-29T22:51:00.000-07:00</published><updated>2010-03-29T22:51:01.216-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='तीर्थ में देखने को'/><title type='text'>सोमवती अमावस्या : पवित्र डुबकी लग कमाया पुण्य</title><content type='html'>चित्रकूट। 'भज ले पार करइया का, भज ले पर्वत वाले का' ये कुछ ऐसे उद्धोष हैं जो रविवार की दोपहर से ही धर्म नगरी के परिक्रमा मार्ग पर लगातार सुने जा रहे हैं। ऐसे लोगों की संख्या सोमवार की शाम तक लाखों लोगों की पार कर चुकी है। लोगों का आना और जाना लगातार जारी है। सोमवती अमावस्या पर्व पर पुण्य लूटने की आस्था और समस्त कामनाओं की पूर्ति के लिये परिक्रमा पूरी करने की होड़ बुंदेलखंड के इसी अलौकिक तीर्थ में देखने को मिलती है। महिला हो या पुरुष, वृद्ध हो या जवान सभी के चेहरे की चमक लाखों लोगों की रेलम पेल में भी विश्वास की ज्योति कम नही होती। परिक्रमा पथ हो या फिर परिक्षेत्र के अन्य स्थान सभी जगहों पर कामतानाथ की जय के नारे तो जोरदारी से सुनाई ही देते हैं वहीं तेल बेचने वालों के अलावा तमाम गृह उपयोगी उत्पाद बेंचने वालों के भी प्रचारों की स्वर लहरियां उनमें मिलकर अलग ही वातावरण प्रस्तुत करती हैं। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सबसे ज्यादा आनंददायक क्षण मंदाकिनी गंगा के किनारे पर दिखाई देता है। जहां पर कड़ी चौकसी के बीच लाखों लोग रामघाट, राघव प्रयाग घाट के अलावा अन्य घाटों पर स्नान करते दिखाई देते हैं। इसके बाद लोगों में चित्रकूट के अधिष्ठाता देव स्वामी मत्स्यगयेन्द्र नाथ को जलाभिषेक करने की होड़ होती है। यहां के बाद लोग पैदल ही लगभग तीन किलोमीटर दूर स्वामी कामतानाथ के पर्वत की परिक्रमा करने के लिये निकलते हैं। तमाम श्रद्धालु तो ऐसे हैं जो लगभग चालीस-चालीस सालों से हर एक अमावस्या पर यहां पर आकर परिक्रमा लगाते हैं। &lt;br /&gt;महोबा जिले के चरखारी से आये लेखपाल संतोष कुमार चौबे बताते हैं कि पिछले पैंतीस सालों से ज्यादा से वे हर अमावस्या पर वे आकर यहां परिक्रमा लगा रहे हैं। &lt;br /&gt;ऐसे ही तमाम और लोग हैं जो यहां हर अमावस्या को आकर परिक्रमा करते हैं तमाम लोग तो अपने निवास स्थान से चित्रकूट तक पैदल आते हैं। कुछ की मनौती होती है तो कुछ जिंदगी को खुशहाल बनाने के लिये ऐसा करते हैं। &lt;br /&gt;ग्वालियर से आये कैलाश, मीना, राजकुमार व चंद्र मोहन ने कहा कि भले ही वे लोग अपने घरों से पैदल न आ पाते हो पर वे चित्रकूट धाम कर्वी के रेलवे स्टेशन से तो पैदल ही स्वामी कामतानाथ के दरबार में जाते हैं।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-6850521052489062719?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/6850521052489062719/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/03/blog-post_9636.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/6850521052489062719'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/6850521052489062719'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/03/blog-post_9636.html' title='सोमवती अमावस्या : पवित्र डुबकी लग कमाया पुण्य'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-8194682184430286136</id><published>2010-03-29T22:50:00.000-07:00</published><updated>2010-03-29T22:50:02.849-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='पैदल परिक्रमा करने वालों'/><title type='text'>सोमवती अमावस्या : तपती धूप पर भारी पड़ी आस्था</title><content type='html'>चित्रकूट। तपती धूप पर एक बार फिर आस्था भारी पड़ गयी। विश्व प्रसिद्ध धार्मिक स्थल चित्रकूट की पवित्र मंदाकिनी में लाखों श्रद्धालुओं ने डुबकी मारने के साथ ही स्वामी कामतानाथ की परिक्रमा लगाई। स्वामी कामतानाथ की परिक्रमा के साथ ही हनुमानधारा, जानकीकुंड, स्फटिक शिला, राम शैया के साथ ही आसपास के अन्य तीथरें पर भी लोगों का काफी जमावड़ा रहा। मंगलवार से नवरात्रि के प्रारंभ होने के कारण काफी बड़ी संख्या में लोगों का रुख मैहर के मां शारदा मंदिर का भी रहा। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सोमवती अमावस्या के चलते यहां वैसे तो रविवार की दोपहर से ही भक्तों का आना जारी हो चुका था। लोगों ने यहां पर आकर अमावस्या पर्व का इंतजार न करके मंदाकिनी में स्नान करने के साथ ही स्वामी कामतानाथ की परिक्रमा करना प्रारंभ कर दिया था। पैदल परिक्रमा करने वालों के साथ ही भारी मात्रा में महिलायें और बच्चे भी दंडवती साढ़े पांच किलोमीटर की परिक्रमा लगा रहे थे। उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश के प्रशासन ने बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिये व्यवस्थायें कर रखी थी। दोनो ही तरफ खोया पाया केंद्रों पर लगातार उद्धोषणायें की जा रही थी। बिछड़े लोग उनके परिजनों से लगातार मिलाये जा रहे थे। कई स्थानों पर स्वास्थ्य विभाग की टीमें मोबाइल एम्बुलेंस के साथ खड़ी लोगों को दवायें देने का काम कर रही थी। मुख्य चिकित्साधिकारी डा. आरडी राम ने बताया कि रात के समय तो अधिकतर लोग पेट दर्द की शिकायतें लेकर आये जबकि दिन के समय तेज धूप में परिक्रमा लगाने की वजह से चक्कर आने की शिकायत करने वालों की तादाद ज्यादा रही। &lt;br /&gt;मुख्यालय के रेलवे स्टेशन के साथ ही खोह, शिवरामपुर, भरतकूप के अलावा सभी बस स्टैंडों पर जहां प्रशासनिक अधिकारियों को सेक्टर मजिस्ट्रेट के रुप लगाया गया था। वहीं बाहर से आयी व स्थानीय पुलिस फोर्स के सहारे कड़ी चौकसी होती दिखाई दे रही थी। बेड़ीपुलिया से पर्यटक तिराहे तक मार्ग को वन वे रविवार की रात से ही कर दिया गया था। मेला क्षेत्र पर कई जगहों पर कई सामाजिक और धार्मिक संस्थायें यात्रियों को भोजन व चाय नास्ते का मुफ्त वितरण करती दिखाई दी। जिलाधिकारी विशाल राय, पुलिस अधीक्षक वीर बहादुर सिंह, अपर जिलाधिकरी राजाराम, एसडीएम गुलाब चंद्र, तहसीलदार अश्विनी कुमार श्रीवास्तव के अलावा अपर पुलिस अधीक्षक विपिन कुमार मिश्र व सीओ सदर उदय शंकर लगातार मेला क्षेत्र पर भ्रमण करते दिखाई दिये।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-8194682184430286136?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/8194682184430286136/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/03/blog-post_6480.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/8194682184430286136'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/8194682184430286136'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/03/blog-post_6480.html' title='सोमवती अमावस्या : तपती धूप पर भारी पड़ी आस्था'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-613319492174853455</id><published>2010-03-29T22:48:00.001-07:00</published><updated>2010-03-29T22:48:35.043-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='सभी ने नाना जी'/><title type='text'>नाना जी को याद कर नम होती रहीं आंखें</title><content type='html'>चित्रकूट। पहली बार नाना जी के बिना हुई संस्थान की बैठक में मौजूद सभी सदस्यों की आंखें एक दो बार नहीं बल्कि कई बार भरीं। कुछ तो इतने भावुक हुये कि उनकी आंखों से जल की धारा रुकने का नाम ही नही ले रही थी। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;पद्म विभूषण नाना जी देशमुख के त्रयोदशाह के बाद शनिवार को सिया राम कुटीर के बंद कमरे हुई दीनदयाल शोध संस्थान के प्रबंध मंडल की बैठक में सभी ने नाना जी से संबंधित जब अपने संस्मरण सुनाये तो धीरे-धीरे करके सभी की आंखें भर आयी। &lt;br /&gt;नाना जी के साथ सर्वाधिक 64 साल का समय व्यतीत करने वाले देवेन्द्र स्वरुप अपने संस्मरण सुनाते कई बार भावुक हुये पर बाद में उन्होंने कहा कि नाना जी के प्राण चित्रकूट में ही बसते हैं। वे कहीं गये नही बल्कि अब वे समाज की पुनर्रचना के कामों को और भी तेजी से आगे बढ़ाने का काम करेगें। &lt;br /&gt;प्रबंध मंडल की बैठक तो बंद कमरे में हुई और कार्यवाही पूरी तरह गोपनीय रही पर युगानुकूल सामाजिक पुनर्रचना सहयोगी कार्यकर्ता सम्मेलन में जब राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सह सर कार्यवाह सुरेश सोनी ने अपना संबोधन शुरु किया तो उन्होंने सुबह हुई प्रबंध मंडल की बैठक का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि संस्थान की बैठक में नाना जी के एकात्म मानव दर्शन के आधार पर उनके द्वारा चयनित किये गये पांच सौ गांवों में और भी बेहतर तरीकों से समाज के अंतिम व्यक्ति की खुशहाली के लिये काम किया जायेगा। &lt;br /&gt;संस्थान के प्रबंध मंडल की बैठक में संरक्षक मदन सिंह देवी, अध्यक्ष वीरेन्द्र जीत सिंह, संगठन सचिव अभय महाजन, प्रधान सचिव डा. भरत पाठक, उपाध्यक्ष प्रभाकर राव मुंडले, उपाध्यक्ष नितिन सांवले, शंकर प्रसाद ताम्रकार सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-613319492174853455?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/613319492174853455/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/03/blog-post_7632.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/613319492174853455'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/613319492174853455'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/03/blog-post_7632.html' title='नाना जी को याद कर नम होती रहीं आंखें'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-7486312476508885516</id><published>2010-03-29T22:47:00.000-07:00</published><updated>2010-03-29T22:47:02.952-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='उसे सीख कर'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='है'/><title type='text'>नाना जी की समाजसेवा को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का संकल्प</title><content type='html'>चित्रकूट। उद्यमिता विद्या पीठ में जुटे समाजसेवियों ने युगानुकूल सामाजिक पुनर्रचना सहयोगी कार्यकर्ता सम्मेलन के समापन पर दीन दयाल शोध संस्थान के संरक्षक व राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख मदन दास देवी ने कहा कि नाना जी तो अब हमारे बीच नहीं रहे पर उनके विचार हमेशा जागृत रहेंगे और उनको लेकर हम सब आगे बढ़ने का काम करेंगे। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;उन्होंने कहा कि भौतिक उन्नति से ज्यादा जरूरी लोगों में परस्पर सहभागिता की भावना को जागृत करना है जिससे लोग सहजीवी होकर जी सकें। दीन दयाल शोध संस्थान सबसे निचली पंक्ति के व्यक्ति की शैक्षणिक, आर्थिक, स्वास्थ्य और उन्नति के लिए जो कार्य कर रहा है, उसे सीख कर अपने क्षेत्रों में फैलाने में जुट जायें यही नाना जी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। &lt;br /&gt;संस्थान के प्रधान सचिव डा. भरत पाठक ने कहा कि वैसे तो नाना जी से प्रेरणा लेकर काम करने वालों की सूची काफी बड़ी है पर सुरभि शोध संस्थान वाराणसी के भानु भाई जालान, ज्ञान प्रबोधनी महाराष्ट्र के सुभाष पांडे, गोवमुखी सेवा धाम के बनवारी लाल, जबलपुर के दीप शंकर बनर्जी, मोक्षदायिनी सेवा समिति के प्रदीप पांडे, ग्रामीण स्वाभिमान संस्था नागौर, मैत्री फाउंडेशन ट्रस्ट के साथ ही अनेकों लोगों ने शिक्षा, स्वास्थ्य, पानी प्रबंध, गो प्रबंधन, कृषि व ग्रामीण विकास के विभिन्न ग्रामों में नाना जी से प्रेरणा लेकर आज काफी अच्छा कार्य कर रहे हैं। &lt;br /&gt;इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सुरेश सोनी ,अध्यक्ष वीरेन्द्र जीत सिंह, संगठन सचिव अभय महाजन , संस्थान के उपाध्यक्ष प्रभाकर राव मुंडले, नितिन सांवले, उद्यमिता विद्या पीठ की निदेशक डा. नंदिता पाठक, क्षेत्रीय संघ चालक श्री कृष्ण माहेश्वरी, मप्र के कैबिनेट मंत्री विजय शाह, कृषि राज्य मंत्री ब्रजेन्द्र सिंह, राज्य सभा सांसद प्रभात झा तथा कर्नाटक से आये विधायक नागेश के साथ ही देश के हर प्रांत से आये सामाजिक क्षेत्र के कार्यकर्ता मौजूद रहे।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-7486312476508885516?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/7486312476508885516/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/03/blog-post_7443.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/7486312476508885516'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/7486312476508885516'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/03/blog-post_7443.html' title='नाना जी की समाजसेवा को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का संकल्प'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-4043808993475646524</id><published>2010-03-29T22:44:00.000-07:00</published><updated>2010-03-29T22:44:46.144-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='विशेष स्थापत्य कला'/><title type='text'>अपनों के लिये भी है बेगाना अद्वितीय शिल्प का नमूना गणेश बाग</title><content type='html'>चित्रकूट। इस परिक्षेत्र का आध्यात्मिक, धार्मिक के साथ ही सांस्कृतिक वैभव अपने आपमें अनूठा है। धर्म नगरी का दर्शन जहां शांति और वैराग्य का संदेश देता है वहीं कर्वी नगर में स्थापत्य कला पर धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के स्वरुप दिखाई देते हैं। ऐसा ही एक स्थान जिला मुख्यालय से लगे सोनेपुर गांव के समीप 'गणेश बाग' है। भले ही अभी भी इस विशिष्ट स्थान पर देशी और विदेशी पर्यटकों की आवक उतनी न बन पाई हो जितनी की उम्मीद की जाती है पर इतना तो साफ है कि सांस्कृतिक विरासत का धनी स्थान अपने आपमें काफी विशिष्टतायें समेटे हुये है। भले ही इस स्थान का नाम गणेश बाग हो पर यहां पर श्री गणेश की स्थापित एक भी मूर्ति नही है। मूर्ति चोरों की बुरी नजर का परिणाम श्री गणेश की प्रतिमा ही नही बल्कि अन्य विशेष स्थापत्य कला की मूर्तियां बाहर जा चुकी है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जिला चिकित्सालय के ठीक पीछे को कोटि तीर्थ जाने के मार्ग पर स्थित गणेश बाग के बनने की कहानी भी कम रोचक नही है। मराठा राजवंश की बहू जय श्री जोग बताती हैं कि उनका खानदान प्लासी के युद्ध के बाद बेसिन की संधि में यह क्षेत्र में मिलने के बाद यहां पर आया था। उनके पुरखे पेशवा अमृत राव को कुआं तालाब बाबड़ी आदि बनवाने का काफी शौक था। वैसे उस समय इस शहर का नाम अमृत नगर हुआ करता था। पानी की विशेष दिक्कत होने के कारण भी पानी की व्यवस्था सुचारु रूप से किये जाने के प्रबंध किये गये थे। &lt;br /&gt;महाराष्ट्र से लाल्लुक रखने के कारण श्री गणेश की आराधना उनके खानदान में होती थी। यहां पर इस मंदिर के साथ ही तालाब व बावड़ी का निर्माण कराने के साथ ही विशाल अस्तबल का भी निर्माण कराया गया था। &lt;br /&gt;महात्मा गांधी चित्रकूट गांधी विश्वविद्यालय के प्राध्यापक डा. कमलेश थापक कहते हैं कि बेसिन की संधि के बाद मराठों ने बांदा और चित्रकूट में आकर अपना साम्राज्य स्थापित किया। उनके आने से जहां कुछ नई परंपरायें समाप्त हुयी वहीं मंदिरों, कुओं, तालाबों व बाबडियों का भी निर्माण हुआ। &lt;br /&gt;गणेश बाग भी स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना है। यहां पर स्थापित मूर्तियां खजुराहो शिल्प की तरह ही हैं। पांच मंदिरों के समूह के साथ ही तालाब व अन्य भवन कभी अपने वैभव रहने की की कहानी कहते हैं, पर समय बदलने और आधुनिकता का रंग चढ़ने पर आज यह विशेष स्थान दुर्दशा को प्राप्त हो रहा है। सरकारी स्तर पर किये गये प्रयास नाकाफी है और किसी भी जन प्रतिनिधि को यहां के सांस्कृतिक गौरवों के उत्थान की याद ही नही आती। &lt;br /&gt;सामाजिक चिंतक आलोक द्विवेदी कहते हैं कि सरकार के पास पैसा बेकार के कामों के लिये बहाने को तो है पर गणेश बाग के विकास के लिये शायद नही है। &lt;br /&gt;भारतीय पुरातत्व विभाग का एक बोर्ड और चंद चौकीदार ही इसके संरक्षण और संर्वधन के जिम्मेदार बने हुये हैं। सरकारी योजनायें इसके उत्थान के लिये तो बनी पर उनसे गणेश बाग की दशा और दिशा के साथ ही पर्यटकों की आवक नही बढ़ सकी। अगर वास्तव में सही मंशा से गणेश बाग का विकास किया जाये तो पर्यटक यहां पर भी आकर आनंदित महसूस करेंगे। खजुराहो शिल्प की तरह ही इस मंदिर का इतिहास अपने आपमें स्वतंत्रता संग्राम के अमर सेनानी चंद्र शेखर आजाद के यहां पर कई बार रहने का भी गवाह है, पर दुर्भाग्य इस बात का है कि कभी भी किसी ने इस तरह का जिक्र गणेश बाग की इमारत के अंदर बोर्ड लगाकर किया ही नही। पेशवाओं के बनवाये तमाम मकान खंडहर होते रहे और पर्यटक विभाग भी मूक दर्शक की भांति अपनी कार्य कुशलता सिद्ध करता रहा। &lt;br /&gt;वैसे फरवरी के महीने में महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के प्रांगण मे आयोजित विश्व यू 3 ए कांफ्रेंस का समापन गणेश बाग में आयोजित कर आयुष्मान ग्रुप ने यहां पर देशी और विदेशी पर्यटकों को लाकर पर्यटकों की आमद बढ़ाने का प्रयास किया था।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-4043808993475646524?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/4043808993475646524/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/03/blog-post_29.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/4043808993475646524'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/4043808993475646524'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/03/blog-post_29.html' title='अपनों के लिये भी है बेगाना अद्वितीय शिल्प का नमूना गणेश बाग'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-1509852844928614535</id><published>2010-03-27T23:58:00.000-07:00</published><updated>2010-03-27T23:58:39.384-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='कोंपलें निकलवायी तो'/><title type='text'>जंगल में मंगल:एक कर्मयोगी की तप साधना</title><content type='html'>चित्रकूट। अब शायद ही उनका नाम कोई भरत दास के नाम से जानता हो क्योंकि धर्म और आध्यात्म के साथ पर्यावरण संतुलन को सुधारने जो बीड़ा उन्होंने बीस साल पहले उठाया था उसकी वजह से लोग उन्हें अब 'हरियाली वाले बाबा' के नाम से जानते हैं। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मानिक पुर कस्बे से लगभग सात किलोमीटर दूर काली घाटी में बाबा भरत दास ने रहना शुरु किया तो सहसा किसी ने विश्वास ही नही किया कि शायद इस बियावान जंगल में कोई एक रात भी रह पायेगा पर पथरीली जमीन की कोख से जब उन्होंने पौधों की कोंपलें निकलवायी तो जैसे आश्चर्य ही हो गया। लोगों ने समझा कि शायद बाबा मायावी है पर ऐसा कुछ भी नही था। लगभग तीन सौ से ज्यादा पेड़ों को पुष्पित और पल्लवित करने के पीछे बाबा की मेहनत की वह तासीर छिपी है जिसकी बदौलत आम तो क्या अन्य पेड़ अपने फल लोगों को खिला रहे हैं। इतना ही नही जब इलाके के असरदार लोगों की नजर इस जगह पर पड़ी तो फिर सामंतशाही अंदाज में व्यवस्था के लिये पूंछतांछ प्रारंभ हुई। लिहाजा बाबा ने स्थान बदल दिया और काली घाटी से एक किलोमीटर दूर जब पहुंचे तो वहां पर पानी के झरने देखकर प्रफुल्लित हो उठे। दो ही साल के अंतराल में बाबा ने वहां पर भी आंवला पीपल और अन्य पौधों को रोपकर उन्हें तैयार भी कर डाला। &lt;br /&gt;बाबा भरत दास बताते हैं कि वे मूलत: कानपुर के नवाबगंज के गुरु निर्मलदास के शिष्य हैं। उनके गुरु जी कर्वी में बनकट के पास पम्प कैनाल के मंदिर में रहकर तप किया करते थे। लगभग बीस साल पहले वे गुरु की आज्ञा से काली घाटी आये। जब यहां पर आये तो सामने की कोल बस्ती के साथ ही सरैंया में रहने वाले लोगों का काफी साथ मिला। पेड़ पौधे मानव का मन प्रफुल्लित रखते और जीवन जीने में सहायता करते है, अपने गुरु की इस बात को अंगीकार कर पौधों का रोपण करने लगे और देखते ही देखते काली घाटी में हरियाली दिखाई देने लगी। आम के लगभग डेढ़ सौ पेड़ों के साथ ही महुवा, जामुन, नींबू, अमरुद, करौंदा, आंवला, अनार, आंस, सेधा, तेंदू, नीम, सिरसा व बेर जैसे तमाम पेड़ों में हरियाली दिखा दी। इसके साथ ही यहां पर लगे गुलाब, गेंदा आदि के पौधे भी अपना खूबसूरती कहानी स्वयं कहते हैं। वे बताते हैं कि पहले से मां काली, हनुमान जी, शंकर जी, भैरम बाबा की मूर्तियां थी वर्ष 2005 में स्थानीय लोगों के सहयोग से मां अम्बे की विशालकाय प्रतिमा की स्थापना कराई गई। इसके बाद जब इस स्थान पर वैभव दिखाई देने लगा तो कुछ दबंगों ने उन्हें परेशान करना प्रारंभ कर दिया तो वे स्थान को छोड़कर एक किलोमीटर आगे चले गये। वहां पर गुफा के साथ ही पहाड़ों के बीच से रिसता हुआ पानी देखा तो उत्साह चरम पर पहुंचा। यहां पर नर्मदा के किनारे से लाकर शिवलिंग व चित्रकूट से लाकर हनुमान जी की स्थापना की। यहां पर भी पीपल, बेल, आंवला के साथ ही पचासो किस्म के पौधे रोप डाले। फिर जनप्रतिनिधि और सरकारी स्तर पर प्रयास किया तो ब्लाक प्रमुख विनोद द्विवेदी व खंड विकास अधिकारी ने कई बार आकर स्थान को देखा। वे बताते हैं कि श्री द्विवेदी ने आश्वासन दिया है कि यहां पर निकलने वाले सभी जल स्रोतों को एक कर तालाब का रुप देने के साथ ही आगे पहाड़ पर ही बांध का निर्माण किया जायेगा। जिससे इस क्षेत्र में हरियाली की बयार और दिखाई देगी। बाबा भरत दास बताते हैं कि उन्होंने अब संकल्प लिया है कि काली घाटी से लेकर नये आश्रम तक सड़क के किनारे दोनो तरफ पौधों का रोपण कर सरकारी नुमाइंदो को दिखायेगे कि किस तरह से पौधों को तैयार किया जाता है। इसके लिये उन्होंने स्थानीय लोगों से भी बात करने की बात कही है। यह काम बिना किसी सरकारी सहयोग से किये जाने की बात करते हैं।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-1509852844928614535?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/1509852844928614535/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/03/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/1509852844928614535'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/1509852844928614535'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/03/blog-post.html' title='जंगल में मंगल:एक कर्मयोगी की तप साधना'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-4064897254432839762</id><published>2010-02-28T00:58:00.000-08:00</published><updated>2010-02-28T00:58:22.370-08:00</updated><title type='text'>स्‍म्रति शेष्- पदम विभूषण नाना जी देशमुख</title><content type='html'>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/S4ov034BTTI/AAAAAAAAAW8/4hIrOekyR2M/s1600-h/27crt-25.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="320" kt="true" src="http://1.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/S4ov034BTTI/AAAAAAAAAW8/4hIrOekyR2M/s320/27crt-25.jpg" width="298" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-4064897254432839762?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/4064897254432839762/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/02/blog-post_28.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/4064897254432839762'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/4064897254432839762'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/02/blog-post_28.html' title='स्‍म्रति शेष्- पदम विभूषण नाना जी देशमुख'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/S4ov034BTTI/AAAAAAAAAW8/4hIrOekyR2M/s72-c/27crt-25.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-6698687360057106015</id><published>2010-02-05T22:59:00.000-08:00</published><updated>2010-02-05T22:59:10.263-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='आयोजित बैठक के बाद 8 फरवरी'/><title type='text'>यू थ्री ए सम्मेलन: जोर शोर से चल रही हैं तैयारियां</title><content type='html'>चित्रकूट। महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के प्रांगण में इन दिनों यू 3 ए सम्मेलन की तैयारियां जोर शोर से चल रही है। जहां एक तरफ देशी के साथ ही विदेशी मेहमानों के आने को लेकर उत्साह का माहौल है वहीं व्यवस्था समितियों के प्रभारी भी अपने-अपने कामों में जुटे दिखाई दे रहे हैं। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;विवि. के कुलपति प्रो. ज्ञानेन्द्र सिंह की अध्यक्षता में आयोजित बैठक के बाद 8 फरवरी से लेकर 10 फरवरी तक आयोजित होने वाले सम्मेलन के सभी कार्यक्रमों की समय वार घोषणा कर दी। सम्मेलन संयोजक डा. आरसी सिंह ने बताया कि 8 फरवरी को प्रात: 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक उद्घाटन सत्र होगा। इसके बाद माइंड एंड मैटर थीम पर तकनीकी सत्र तथा एक्ज्यूकेटिव कमेटी एवं जनरल बाड़ी की बैठक होगी। 9 फरवरी को टेक्नोलाजी थीम और होलिस्टिक हेल्थ थीम पर तकनीकी सत्र होंगे। इसके बाद यू 3 ए बैठक होगी। 8 व 9 की शाम को 6.30 बजे से सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। 10 फरवरी को यू 3 ए स्टोरीज थीम पर तकनीकी सत्र एवं अपराह्न 12 बजे से समापन सत्र होगा। चित्रकूट के दर्शनीय स्थलों के अवलोकन के साथ ही रुरल यू 3 ए का गठन 10 फरवरी को मिनी खजुराहो 'गणेश बाग' कर्वी में किया जायेगा। &lt;br /&gt;सम्मेलन के सचिव द्वय डा. वीरेन्द्र कुमार व्यास व डा. आशुतोष उपाध्याय ने बताया कि सम्मेलन में आने वाले प्रतिभागियों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। न्यूजीलैंड, स्काटलैंड, इंग्लैंड, साउथ अफ्रीका, सिंगापुर, नेपाल व बांग्लादेश आदि देशों से लगभग पचास व देश के तमाम राज्यों से लगभग 450 प्रतिभागियों के सम्मिलित होने की सूचना प्राप्त हो चुकी है। इस दौरान विवि परिसर में ग्राहक सेवा के तत्वावधान में ग्रामीण उत्पादों की प्रदर्शनी विभिन्न विकास एजेन्सियों द्वारा लगाई जायेगी।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-6698687360057106015?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/6698687360057106015/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/02/blog-post_8874.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/6698687360057106015'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/6698687360057106015'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/02/blog-post_8874.html' title='यू थ्री ए सम्मेलन: जोर शोर से चल रही हैं तैयारियां'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-5642417038865759943</id><published>2010-02-05T22:58:00.000-08:00</published><updated>2010-02-05T22:58:02.895-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='महायोजना को बनाये जाने का प्रस्ताव'/><title type='text'>अगले साल तक जमीन पर काम कर सकती है चित्रकूट महायोजना</title><content type='html'>चित्रकूट। भले ही मप्र ने चित्रकूट को धार्मिक नगरी घोषित कर विकास की बड़ी कवायत करनी प्रारंभ कर दी हो पर इस मामले में यहां का प्रशासन भी काफी खामोशी से काम कर रहा है। जहां एक तरफ चीफ टाउन प्लानर को 'चित्रकूट महायोजना' को बनाये जाने का प्रस्ताव भेजा जा चुका है। वहीं मुख्यालय को एक विशेष रुप से शेप देने के साथ ही विशेष तौर पर विकासात्मक कदमों की भरमार करने की योजना भी बताई जा रही है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अपर जिलाधिकारी राजा राम बताते हैं कि वैसे तो चित्रकूट महायोजना को बनाये जाने का प्रस्ताव काफी पहले भेजा गया था पर अब मालूम चला है कि यह अपने अंतिम दौर में है। लखनऊ के चीफ टाउन प्लानर के द्वारा बनाये जाने वाले चित्रकूट मुख्यालय के नक्शे के बारे में वे कहते हैं कि अभी तक तो उन्होंने यह देखा नही है पर उम्मीद है कि इसके बनने के बाद तो चित्रकूट विकास प्राधिकरण का काम काफी बढ़ जायेगा। जहां यहां पर नई टाउनशिप बनेगी वहीं नये पार्क व धार्मिक व ऐतिहासिक महत्व के स्थलों को संरक्षित करने के लिये भी विशेष कार्ययोजना का प्रस्ताव भी इसमें किया गया बताया जा रहा है। &lt;br /&gt;इतना ही नही जहां प्रशासनिक स्तर पर अधिकारियों को यह उम्मीद है कि अगले वित्तीय वर्ष में चित्रकूट को भी मथुरा, काशी, इलाहाबाद, वृन्दावन की तर्ज पर महायोजना बनाकर विकसित किया जा रहा है। वैसी ही योजना की शुरुआत यहां पर शासन के स्तर पर अगले वर्ष हो सकती है। वैसे यहां पर भी अधिकारी अपने स्तर पर स्वयंसेवियों के साथ चित्रकूट के विकास की मशक्कत का काम कर रहे हैं।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-5642417038865759943?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/5642417038865759943/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/02/blog-post_664.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/5642417038865759943'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/5642417038865759943'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/02/blog-post_664.html' title='अगले साल तक जमीन पर काम कर सकती है चित्रकूट महायोजना'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-7840540150935990247</id><published>2010-02-05T22:56:00.000-08:00</published><updated>2010-02-05T22:56:37.618-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='रंगकर्मियों'/><title type='text'>मेले को यादगार बनाने को हर संभव प्रयास</title><content type='html'>चित्रकूट। समाजवादी चिंतक डा. राम मनोहर लोहिया द्वारा परिकल्पित राष्ट्रीय रामायण मेले को सैतीसवें वर्ष आयोजित करने के लिये तैयारियों को अंतिम रुप दिया जा रहा है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;तीर्थ नगरी के राष्ट्रीय रामायण मेला भवनम के लोहिया सभागार में मेले के कार्यकारी अध्यक्ष गोपाल कृष्ण करवरिया, मंत्री आचार्य बाबू लाल गर्ग, प्रचार मंत्री डा. करुणा शंकर द्विवेदी,डा.श्याम मोहन त्रिपाठी व देवी दयाल यादव ने पत्रकारों से बात करते हुये बताया कि राष्ट्रीय रामायण मेले का उद्घाटन 12 फरवरी को सूबे के श्रम मंत्री कुंवर बादशाह सिंह करेंगे। &lt;br /&gt;उन्होंने बताया कि देश भर के रामायण के विद्वानों, कथाव्यासों, रंगकर्मियों व राजनेताओं के साथ ही राम लीला मंडलों व रामकथा की विभिन्न तरीकों से प्रस्तुतियां देने वाले दलों व कलाकारों को आमंत्रित किया गया था। अभी तक तमिलनाडु डा. एम शेषन, डा. सुन्दरम, आंध्रप्रदेश से डा. आर एस त्रिपाठी, डा. एन जी देवकी, उप्र से सूर्य प्रकाश दीक्षित, डा. जीतेन्द्र नाथ पांडेय, डा. यतीन्द्र त्रिपाठी, डा. चंद्रिका प्रसाद दीक्षित, डा. कामता कमलेश, डा. राम अवध शास्त्री हरियाणा से डा. ओम प्रकाश शर्मा आदि विद्वानों के आने की स्वीकृतियां मिल चुकी हैं। बिहार, झारखंड, मप्र, राजस्थान, दिल्ली आदि प्रदेशों से भी तमाम विद्वानों के आने की सूचनायें प्राप्त हो रही हैं। विभिन्न प्रांतों के सांस्कृतिक दलों व वृन्दावन की रास लीला सहित रास लीला, सृजन आर्ट एंड कल्चर नई दिल्ली का बैले ग्रुप, कलाकार डांस इन्टीट्यूट मुंबई, पूर्णिमा और सखियों का नृत्य, रत्नेश का गायन, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार के क्षेत्रीय निदेशालय का दल, पवन तिवारी निवाड़ी, रामाधीन आर्य एंड पार्टी मऊरानीपुर, जुगुल किशोर शर्मा लोक नृत्य, रघुवीर सिंह यादव लोकनृत्य झांसी, ललित त्रिपाठी गायन आदि कलाकारों के आने की स्वीकृतियां प्राप्त हो चुकी रहे हैं। इसके अतिरिक्त आकाशवाणी इलाहाबाद, छतरपुर, रींवा, श्री राम कला केंद्र नई दिल्ली, रमा वैद्यनाथन भरतनाट्यम आदि के आने की संभावना है। &lt;br /&gt;आयोजकों ने बताया कि समारोह में जगद्गुरु शंकराचार्य बद्रिकाश्रम स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती, जगद्गुरु स्वामी राम भद्राचार्य, संत फलाहारी दास महाराज अयोध्या व चित्रकूट स्थित सभी अखाड़ों के संत महन्त मौजूद रहेंगे। राम कथा के व्यासों में स्वामी राजेश्वरानंद सरस्वती, गुप्तेश्वरी देवी, मानस मंजरी, रघुराज शरण, पुष्पा गौतम, मीरा दुबे, आदि के आने की स्वीकृतियां आ चुकी हैं। इसके साथ ही परिसर में लगने वाली प्रदर्शनियां भी आकर्षण का केंद्र रहेंगी। संस्कृति विभाग उप्र, सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग, केन्द्रीय हथकरघा विभाग, दीन दयाल शोध संस्थान सहित मंडल व जनपद के सभी विभागों की विकासात्मक कार्यो की प्रदर्शनियां लगाई जायेगी।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-7840540150935990247?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/7840540150935990247/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/02/blog-post_05.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/7840540150935990247'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/7840540150935990247'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/02/blog-post_05.html' title='मेले को यादगार बनाने को हर संभव प्रयास'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-6238048471670312116</id><published>2010-02-02T23:07:00.000-08:00</published><updated>2010-02-02T23:07:05.585-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='के लिए मिसाल'/><title type='text'>सूखे से जंग जीत मुनव्वर बने धरती के लाल</title><content type='html'>चित्रकूट। मौसम की मार से परेशान बुंदेलखंड के न जाने कितने किसान पिछले सात सालों में सल्फास खाकर या फांसी लगाकर जान दे चुके हैं। पर इस तस्वीर से उलट एक ऐसा वीर किसान भी है जो भले ही कभी स्कूल न गया हो मगर उसके खेत कभी खाली नहीं रहे। फसलों में वो हमेशा अव्वल रहा। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कभी दूसरों के खेत को किराये पर लेकर खेती करने वाले जनपद के रामपुर तरौंहा गांव के 70 वर्षीय मुनव्वर अली कहते हैं कि उन्होंने जमीन में मेहनत करने को ही अल्लाह की इबारत माना और आज पचास बीघा खेती उसकी ही नियामत है। एक साल में तीन से चार फसलें पैदा करने और खेतों को कभी खाली न रखने वाले मुनव्वर अली उन किसानों के लिए मिसाल बन चुके हैं जो सूखे से परेशान हैं। वे जिले के एक मात्र ऐसे किसान भी हैं जिनके खेतों में पैदा होने वाले आलू इस जिले में बिकते ही नही बल्कि बाहर जाते हैं। इलाहाबाद में कोल्ड स्टोरेज में आलू रखने के बाद अच्छी कीमत में बेंचने की बात करने वाले श्री अली कहते हैं कि भइया तीस साल हो गये एक भी खेत कभी खाली नही रहा और ऐसी कोई फसल नही जो उन्होंने पैदा ही की। बताते हैं कि वे ही अपने ब्लाक के पहले किसान हैं जिसके खेत में पहली बार रिंग बोर से पानी निकला था। चार-चार ट्यूब बेलों के साथ ही खेती की सभी उन्नतशील तरीके ग्रहण किये। इस दौरान उनका साथ सभी अधिकारियों ने भी खूब दिया। &lt;br /&gt;लगभग बीस बीघा खेत पर आलू की फसल दिखाते हुए उन्होंने कहाकि लगभग 800 क्विंटल आलू हो ही जायेगा। इस समय उनके खेतों में जहां गेंहू, चना, अरहर, सरसों की फसलें लहलहा रही हैं वहीं धनिया, मिर्च, प्याज, आलू, जीरा, बैगन, टमाटर व पालक भी अच्छी मात्रा में लगे दिखे। लगभग पचास लोगों के कुनबे के मुखिया श्री अली ने बताया कि रवी, खरीफ और जायद में तो फसलें वे सभी ले ही लेते हैं। इसके साथ ही जानवरों के लिये बरसीम को भी उगा लेते हैं। &lt;br /&gt;उनकी खेती के तौर तरीके देखने पहुंचे उप निदेशक कृषि मो. आरिफ सिद्दीकी व जिला कृषि अधिकारी एच एन सिंह ने जब सवाल किया कि दवा और खाद का प्रयोग किस तरह और कौन सी कर रहे हैं तो उनका जवाब था कि वो जैविक खेती के हिमायती हैं पर समय की मांग के अनुसार थोड़ा बहुत रासायनिक खाद इस्तेमाल करते हैं। नये-नये प्रयोगों के शौकीन मुनव्वर अली कहते हैं कि एक बार नारियल, छुहारा व बादाम के पेड़ भी लगाये थे पर कामयाबी नहीं मिली। उन्होंने कहा कि अगर बुंदेली किसान अपनी मेहनत की ताकत को पहचान लें और अपनी मिट्टी में मेहनत करें तो उन्हें कमाने के लिए बाहर जाने की जरुरत नहीं है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-6238048471670312116?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/6238048471670312116/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/02/blog-post_5304.html#comment-form' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/6238048471670312116'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/6238048471670312116'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/02/blog-post_5304.html' title='सूखे से जंग जीत मुनव्वर बने धरती के लाल'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-4249415410816942471</id><published>2010-02-02T23:05:00.000-08:00</published><updated>2010-02-02T23:05:48.212-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='खबर पढ़कर'/><title type='text'>राजेश्वर ने खोजा गिट्टी व मौरम में लोहा</title><content type='html'>चित्रकूट। बांदा के ग्राम कालींजर स्थित 'श्री पर्वत' के शिलाखंड में एल्यूमिनियम होने की जानकारी देने के बाद अब चित्रकूट के एक रसायन शास्त्री ने मौरम व गिंट्टी में लौह अयस्क होने का दावा किया है। हालांकि चित्रकूट इंटर कालेज के रसायन विज्ञान के प्रवक्ता राजेश्वर प्रसाद फिलहाल यह नहीं बता सके कि मौरम या गिट्टी के एक किलोग्राम अयस्क में कितना लोहा निकलेगा मगर उनका यह कहना कि 'जीर्ण शीर्ण हो चुकी प्रयोगशाला में यह प्रयोग ही कर लेना बड़ी बात है' महत्वपूर्ण है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;श्री प्रसाद ने बताया कि कालींजर पर्वत पर एल्यूमिनियम होने की खबर पढ़कर बांदा के केसीएनआईटी में बी टेक कर रहे उनके पुत्र प्रवीण दत्त नामदेव ने शंका व्यक्त किया कि गिट्टी और मौरम पर प्रयोग किया जाये तो इनमें लौह अयस्क की अच्छी मात्रा हो सकती है। इस बात को सुनकर उन्होंने प्रयोगशाला में मौरम और गिट्टी को लेकर उनका चूरा बनाकर अम्लराज के साथ गर्म किया। फिर उसे पानी के साथ तनुकृत किया। तत्पश्चात उसमें ठोस अमोनियम क्लोराइड डालकर अमोनियम हाइड्राक्साइड मिलाकर उसमें पोटेशियम फेरो साइनाइड मिलाया। इस विलयन के बाद नीले रंग का अवक्षेप प्राप्त हुआ। जिससे मौरम और आरसीसी गिट्टी में आयरन तत्व की उपस्थिति निश्चित तौर पर होना मिला। &lt;br /&gt;उन्होंने कहा कि भले ही पहाड़ों से पत्थर लेकर उसे छोटा कर गिट्टी के रुप में मकानों के उपयोग के लिये बेंचा जा रहा हो पर अगर इसका प्रयोग लौह अयस्क निकालने के लिये किया जाये तो सरकार को ज्यादा मात्रा में राजस्व मिल सकता है। यही बात उन्होंने मौंरम के लिये भी कही। &lt;br /&gt;कालेज के प्रबंधक हरिश्चंद्र गुप्त व कार्यवाहक प्रधानाचार्य चन्द्रिका प्रसाद मिश्र जहां इस शोध से प्रसन्न हैं। वहीं उन्होंने सरकार से अपेक्षा भी किया कि इस क्षेत्र के पर्वतों में अविलम्ब पत्थर निकालने का काम बंद कर इनका शोध व सर्वे का काम किया जाये। इससे और भी स्थानों पर मिलने वाली धातुओं से सरकार के राजस्व की वृद्धि और आम लोगों को रोजगार के रुप लाभ मिल सके।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-4249415410816942471?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/4249415410816942471/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/02/blog-post_02.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/4249415410816942471'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/4249415410816942471'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/02/blog-post_02.html' title='राजेश्वर ने खोजा गिट्टी व मौरम में लोहा'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-569658164068272424</id><published>2010-02-02T23:03:00.001-08:00</published><updated>2010-02-02T23:03:43.095-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='पर्यटकों में इजाफा'/><title type='text'>यूनिवर्सिटी आफ थर्ड एज: चित्रकूट को विश्व पर्यटन मानचित्र में लाये जाने का एक अभिनव प्रयास</title><content type='html'>चित्रकूट। एक ऐसा सम्मेलन जो वास्तव में चित्रकूट को ऐसा उपहार दे सकने में समर्थ हो सकता था जिसकी कल्पना किसी ने की नही होगी। बात ज्यादा पुरानी नही है जिला बनने के बाद ही इस पावन स्थल को विश्व के पर्यटन मानचित्र में शामिल करने के लिये जिला स्तर पर लिखा पढ़ी की गई थी। वेवसाइट भी बनी, चित्रकूट महोत्सव भी हुआ पर मामला ठाक के तीन पात ही रहा। बीच के वर्षो में कांग्रेस, भाजपा और सपा ने राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठकें कर इसको चर्चा में लाने का काम किया। पिछले साल तो सवा पांच करोड़ शिवलिंग निर्माण ने फिल्मी सितारों के यहां पर आने से लोगों में उत्सुकता जगी कि अब शायद बाहर से आने वाले पर्यटकों में इजाफा हो जाये। ऐसा नही है कि यहां पर पर्यटक विदेशों से आते नही, वे आते तो हैं पर उनकी संख्या खजुराहो और बनारस की तुलना में काफी कम है, पर अब 8 से 10 फरवरी के मध्य विश्व यूनिवर्सिटी आफ थर्ड एज की कांफ्रेस यहां पर आयोजित होने से न सिर्फ महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलपति और प्राध्यापक बल्कि क्षेत्र की स्वयंसेवी संस्थायें व आम जन इस बात को लेकर काफी आशान्वित हैं कि एक बार पचास देशों के प्रतिनिधियों के एक साथ चित्रकूट आने के बाद जो माहौल बनेगा वह वास्तव में इस स्थान को अनोखी ख्याति दिलायेगा। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;ग्रामोदय के कुलपति प्रो. ज्ञानेन्द्र सिंह कहते हैं कि उनका काम तो कर्तव्य का निर्वहन करना है। चित्रकूट अपने आपमें अलौकिक स्थल है। यहां पर बैठकर पचास देशों के साथ ही अपने देश के काफी प्रदेशों के प्रतिनिधि जब दर्शन, आध्यात्मा और धर्म के साथ ही नये-नये विषयों की चर्चा करेंगे तो भला चित्रकूट का ही होगा। योग और आयुर्वेद का धनी यह क्षेत्र बाहर से आने वाले प्रतिभागियों व इंटरनेट के माध्यम से इस विशेष आयोजन को देखने वाले लोगों के लिये चित्रकूट भी विशेष स्थान बनेगा। विवेकानंद सभागार के साथ ही अम‌र्त्यसेन सभागार में कार्यक्रमों को आयोजित करने के लिये तैयारियां प्रारंभ कर दी गई हैं।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-569658164068272424?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/569658164068272424/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/02/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/569658164068272424'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/569658164068272424'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/02/blog-post.html' title='यूनिवर्सिटी आफ थर्ड एज: चित्रकूट को विश्व पर्यटन मानचित्र में लाये जाने का एक अभिनव प्रयास'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-7221382377822748836</id><published>2010-01-18T06:39:00.001-08:00</published><updated>2010-01-18T06:39:43.886-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='मजाक लगातार जारी'/><title type='text'>लोगों को ही नही मालूम कि कहां पर होना है विकास</title><content type='html'>चित्रकूट। 'चित्र विचित्रो रुप दर्शनम् समग्रम यस्मिन स कूट: चित्रकूट:' वाल्मीकि रामायणम् में लिखे यह शब्द भले ही यहां पर आने वाले कथावाचकों को यहां पर कथा करने के लिये प्रेरित करते हो पर इस अद्भुद तीर्थ स्थल के विकास के नाम पर किया जाने वाला मजाक लगातार जारी है। रामघाट व परिक्रमा पथ पर तो केंद्रीय सहायता के अन्तर्गत पर्यटन विकास के नाम पर जल निगम के कन्सट्रक्शन एवं डिजायन सर्विसेज द्वारा पिछले तीन महीनों से चल रहे लीपा पोती के खेल को देखकर तो यही लगता है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जो भी कर रहे हैं ठीक काम कर रहे हैं। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;गौरतलब है कि पिछले 8 अगस्त केंद्रीय सहायता के अन्तर्गत पर्यटन विभाग से मिले 440.70 लाख रुपयों से प्रारंभ किये गये तीर्थ क्षेत्र के विकास के कामों की झलक तो रामघाट पर विभाग द्वारा लगाये गये बोर्ड को ही देखकर मिल जाती है। सुन्दरीकरण के नाम पर दर्शाये गये मंदिरों का नाम विभाग के अधिकारियों के अलावा कोई नही जानता। स्थानीय स्तर पर लोगों से इन जगहों की जानकारी करने पर कोई भी बता नही पाता। &lt;br /&gt;मसलन राम मंदिर कहां है या फिर राम कुंड मंदिर कहां पर स्थित है सवाल पर विभाग के अधिकारियों के उत्तर साफ नही है। विभाग द्वारा लगाये गये बोर्ड के अनुसार रामघाट की दीवारों पर पत्थर लगाने का काम, शिव जी के मंदिर का सौन्दर्यीकरण, हनुमान जी के मंदिर का सौन्दर्यीकरण, चौपड़ा तालाब का सौन्दर्यीकरण, दीवारों पर रामायण की चौपाइयों लिखा जाना, पंचकोशी परिक्रमा मार्ग पर कैनोपी का निर्माण शामिल हैं। काम प्रारंभ किये जाने की तारीख आठ अगस्त है जबकि काम को खत्म किये जाने की तारीख आठ नवम्बर 10 दिखाई गई है। विभाग के द्वारा जोर जोश से काम को प्रारंभ कराने के बाद एक निजी घर के सामने महिलाओं के कपड़े बदलने का स्थान बना देने के बाद गुलाबी गैंग के दीवार को गिरा देने के बाद काम विवादित हो चुका है। फिलहाल अभी काम के नाम पर खाना पूरी जारी है। जूनियर इंजीनियर सुरेश दुबे ने कहा कि सभी काम मानक के अनुसार ही हो रहे हैं। सभी काम तयशुदा सीमा के अन्तर्गत पूरे करा दिये जायेंगे।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-7221382377822748836?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/7221382377822748836/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/01/blog-post_276.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/7221382377822748836'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/7221382377822748836'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/01/blog-post_276.html' title='लोगों को ही नही मालूम कि कहां पर होना है विकास'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-2804279214327428105</id><published>2010-01-18T06:38:00.000-08:00</published><updated>2010-01-18T06:38:29.148-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='शीतलहरी की परवाह किये बगैर'/><title type='text'>मंदाकिनी के तट पर उमड़ा आस्था का सैलाब</title><content type='html'>चित्रकूट। माघी आस्थावानों का हुजूम विश्व प्रसिद्ध धार्मिक स्थल पर उमड़ पड़ा। यह बात और थी कि सूर्यग्रहण का सूतक काल गुरुवार की रात बारह बजे से प्रारंभ हो चुका था और सभी मंदिरों के पट शुक्रवार की शाम चार बजे के बाद ही खुल पाये। हर एक श्रद्धालु के मुंह पर हाड़कपा देने वाली सर्दी की जगह प्रभु के नाम का स्मरण के साथ ही मां मंदाकिनी में डुबकी मारने का उत्साह साफ दिखाई दे रहा था। कड़कड़ाती ठंड व पिछले पखवारे से चल रही शीतलहरी की परवाह किये बगैर लाखों श्रद्धालुओं ने मंदाकिनी में स्नान कर श्री कामदगिरि की परिक्रमा की। श्रद्धालुओं की भीड को देखते हुये प्रशासन ने पर्याप्त व्यवस्थायें की थी। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;वैसे गुरुवार देर शाम से ही श्रद्धालुओं का आना इस तीर्थ पर प्रारंभ हो गया था। लोग बसों, ट्रेनों और प्राइवेट वाहनों से यहां पर आ रहे थे। काफी लोग ट्रेनों से उतर कर रामघाट के लिये पैदल ही जा रहे थे तो काफी लोग टैक्सियों से। &lt;br /&gt;मंदाकिनी में स्नान के बाद लाखों श्रद्धालु स्वामी मत्स्यगयेन्द्र नाथ मंदिर पर जलाभिषेक करने के बाद कामदगिरि परिक्रमा की तरफ बढ़े। यहां पर स्वामी कामतानाथ के दर्शनों के बाद 'आस्थावान भज ले पार करइया का' 'भज ले मुरली वाले का' के जयकारे लगाते हुये परिक्रमा कर रहे थे। आस्थावानों में बड़ी संख्या में महिलायें व बच्चे भी शामिल थे। इस बार की अमावस्या की सबसे बड़ी बात यह रही कि लोग ग्रहण काल में भी स्नान व पूजन करते देखे गये। वैसे काफी लोग घाटों के किनारे बैठकर प्रभु के नाम का स्मरण कर रहे थे। रामघाट पर स्वास्थ्य विभाग ने चिकित्सा शिविर लगाया था जहां पर लोग जाकर अपना इलाज करा रहे थे। मेला क्षेत्र में अधिकारियों की आमद भी लगातार बनी रही।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-2804279214327428105?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/2804279214327428105/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/01/blog-post_2182.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/2804279214327428105'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/2804279214327428105'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/01/blog-post_2182.html' title='मंदाकिनी के तट पर उमड़ा आस्था का सैलाब'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-7148366931403600317</id><published>2010-01-18T06:36:00.001-08:00</published><updated>2010-01-18T06:36:59.168-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='के बाद शाम चार बजे के'/><title type='text'>सूर्यग्रहण : सूर्यकुंड पर हुई साधना</title><content type='html'>चित्रकूट। भले ही इस बार सूर्यग्रहण पूरा न रहा हो पर खग्रास सूर्यग्रहण को लेकर लोगों में भारी उत्साह रहा। पुराणों में सूर्य देव द्वारा तप किये जाने वाले स्थान सूर्य कुंड पर जहां आस्थावानों ने ग्रहण के दौरान तप कर सिद्धियों को प्राप्त करने का काम किया। वहीं लोगों ने अपने घरों में केतु द्वारा भगवान सूर्य को ग्रसित करते वक्त प्रभु नाम का स्मरण किया। ग्रहण काल के बाद लोगों का हुजूम मां मंदाकिनी के साथ ही पवित्र सरोवरों की तरफ दौड़ पड़ा। स्नान के बाद शाम चार बजे के आसपास घरों के साथ ही मंदिरों में भी भगवान की पूजा व अर्चना हो सकी। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;वैसे सुबह से ही सूर्य ग्रहण को लेकर सभी लोगों में भारी उत्साह था पर बादलों के कारण लोग इस बात को लेकर संशकित भी रहे कि शायद यह दुर्लभ अवसर वे देखने से वंचित न रह जायें पर ठीक साढ़े बारह बजे ही बादलों के छट जाने के साथ लोगों ने स्पष्ट तौर पर इसे देखा। जहां बड़े लोग चश्मों का सहारा ले रहे थे वहीं छोटे-छोटे बच्चे एक्सरे फिल्म के काले भाग पर सूर्य ग्रहण को देखकर उत्साहित हो रहे थे। &lt;br /&gt;सूर्यग्रहण के दौरान लोग घरों में बैठकर भगवान के नाम का स्मरण कर रहे थे। ग्रहण के बाद श्रद्धालुओं का रुख मां मंदाकिनी की तरफ हो गया। इसमें महिलाओं की संख्या काफी ज्यादा थी। स्नान करने के बाद लोगों ने घरों में भगवान की पूजा की और फिर इसके बाद ही खाना खाया।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-7148366931403600317?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/7148366931403600317/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/01/blog-post_4832.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/7148366931403600317'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/7148366931403600317'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/01/blog-post_4832.html' title='सूर्यग्रहण : सूर्यकुंड पर हुई साधना'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-5129564220950559337</id><published>2010-01-18T06:35:00.001-08:00</published><updated>2010-01-18T06:35:56.504-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='उप्र और मप्र की'/><title type='text'>विकास की मंशा से मप्र के राजनेता भी सामने जुड़े</title><content type='html'>चित्रकूट। नवीन विचारों की बयार जब बहती है तो लोग खद-ब-खुद ही खिचे चले आते है। चित्रकूट संसद भी एक ऐसी ही ताजी हवा का झोंका है जो अब प्रदेशों की सीमाओं को लाघ रहा है। जिसका उदाहरण है कि चित्रकूट संसद के हमकदम बनने के लिए अब मध्य प्रदेश के सतना जिले के सांसद गणेश सिंह व चित्रकूट विधायक सुरेन्द्र सिंह गहरवार के साथ नगर पंचायत नयागांव के अध्यक्ष नीलांशु चतुर्वेदी आतुर हैं। तीनों नेता इस बात पर एकमत हैं कि उप्र और मप्र की सीमाओं में बंटे 'चित्रकूट' का विकास हर दशा में होना चाहिये। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;संसद के कार्यक्रम संयोजक अर्चन ने बताया कि शुक्रवार को जब समाजसेवी गोपाल भाई ने इन तीनों नेताओं से बात की तो वे इस कार्यक्रम को समय देने के लिये सहर्ष तैयार हो गये। उन्होंने यह भी कहा कि नेताओं ने आश्वासन दिया कि चित्रकूट के विकास के मुद्दे पर वे साथ हैं। अखिल भारतीय समाज सेवा संस्थान द्वारा बनवाया गया सात पन्नों का 21 सूत्रीय करणीय पत्रक चर्चा का विषय बन चुका है। वहीं चौराहों पर इसके बिंदु बहस का मुद्दा बनते जा रहे हैं। सदर विधायक दिनेश मिश्र का कहना है कि आर्थिक, शैक्षणिक, पर्यटकीय, पर्यावरणीय व धार्मिक विकास के मुददें पर आम लोगों के साथ विशेष लोग भी चिंतन और मनन कर रहे हैं। मानिकपुर ब्लाक प्रमुख विनोद द्विवेदी ने सुझाव पत्रक पढ़ने के बाद इस पहल का स्वागत किया। महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के शिक्षाविदों के बीच पत्रक को भरने की होड़ सी लगी दिखाई दे रही है। इसके साथ ही तमाम विद्यालयों में इस पत्रक के सवालों के आधार पर प्रतियोगितायें कराने की तैयारियां भी प्रारंभ हो चुकी हैं।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-5129564220950559337?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/5129564220950559337/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/01/blog-post_3982.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/5129564220950559337'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/5129564220950559337'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/01/blog-post_3982.html' title='विकास की मंशा से मप्र के राजनेता भी सामने जुड़े'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-1202533683908045541</id><published>2010-01-18T06:34:00.000-08:00</published><updated>2010-01-18T06:34:38.857-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='अध्यक्ष नीलांशु चतुर्वेदी को'/><title type='text'>चित्रकूट को फ्री जोन घोषित करने की जरुरत -प्रदीप</title><content type='html'>चित्रकूट। गौरव, वैभव व शौर्य का प्रतीक बुंदेलखंड अब सूखा-तबाही और भुखमरी का प्रतीक बन गया है। इस अनोखे तीर्थ क्षेत्र में स्वयंसेवी संगठनों द्वारा समाज के हितों को साधकर चलाई जा रही मुहिम प्रशंसनीय है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;एक दिवसीय दौरे में आये ग्रामीण विकास राज्य मंत्री प्रदीप जैन 'आदित्य' ने कहा कि चित्रकूट के विकास के लिए इसे दो राज्यों की सीमाओं में बांधा नहीं जाना चाहिये। यहां पर पर्यटन का विकास तभी हो सकता है जब इसे 'फ्री जोन' घोषित कर दिया जाये। उन्होंने सूचना का अधिकार कानून को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की नसीहत दी। महंगाई के मुद्दे पर अपने ही कृषि मंत्री शरद पवार पर शब्दबाण छोड़ते हुये कहा कि दस दिनों में महंगाई कम करने का पता नही कौन सा फार्मूला उन्होंने ईजाद कर लिया है। बुंदेलखंड की तरक्की के लिये जहां केंद्र सरकार ने राहुल गांधी की विशेष पहल पर एक पैकेज दिया वहीं एक नई योजना पुराने तालाब बावडि़यों और कुंओं की सफाई, कब्जों से मुक्त कराने और उनका सुन्दरीकरण करके विकास के लिये सामने आ चुकी है। इसका नाम आर.आर.आर योजना दिया गया है। अपनी धर्मपत्नी स्नेहलता जैन के साथ चित्रकूट दौरे पर आये केन्द्रीय मंत्री ने जानकी कुंड चिकित्सालय व आरोग्य धाम देखने के साथ ही दृष्टि संस्था द्वारा आयोजित कार्यक्रम में भाग लेने के साथ ही जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य से आर्शीवाद लिया। यहां पर उन्होंने नगर पंचायत नयांगॉव के नव निर्वाचित अध्यक्ष नीलांशु चतुर्वेदी को शपथ दिलवाने के बाद पद्म श्री नाना जी देशमुख से भेंट करने सियाराम कुटीर पहुंचे। बाद में कामतानाथ मंदिर में पहंचकर मत्था टेका।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-1202533683908045541?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/1202533683908045541/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/01/blog-post_6064.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/1202533683908045541'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/1202533683908045541'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/01/blog-post_6064.html' title='चित्रकूट को फ्री जोन घोषित करने की जरुरत -प्रदीप'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-6619147917099713685</id><published>2010-01-18T06:32:00.001-08:00</published><updated>2010-01-18T06:32:53.475-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='कृष्ण गोपाल गुप्ता को साधुवाद'/><title type='text'>संस्था के लिए जमीन दान देना अनुकरणीय पहल</title><content type='html'>चित्रकूट। आज के इस दौर में जहां मनुष्य जमीन के लिए खून बहा रहा है, वहीं संस्था के लिए जमीन दान कर देना एक अनुकरणीय पहल है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;यह बात आरोग्य धाम परिसर के बगल में नव निर्मित दृष्टि संस्था के ब्रेल उपकरण बैंक व ब्रेल पुस्तकालय के शुभारंभ व नेत्रहीन महिला शिक्षण और प्रशिक्षण केंद्र के शिलान्यास के मौके पर केंद्रीय राज्य मंत्री प्रदीप जैन ने कहीं। उन्होंने दृष्टि संस्था के संरक्षक कृष्ण गोपाल गुप्ता को साधुवाद देते हुए कहा कि उनके द्वारा साढ़े सत्रह बीघा जमीन विकलांगों के कल्याण के लिए दान देना अनुकरणीय कार्य है। उन्होंने कहा कि मरने के बाद जो नाम जाता है वह केवल ऐसे ही धर्मार्थ के कामों के कारण जाता है। दृष्टि के निदेशक विराग गुप्ता ने कहा कि आने वाले समय में संस्था ग्लोबल वार्मिंग की समस्या को देखते हुए चित्रकूट क्षेत्र में पर्यावरण सुधार की एक बड़ी योजना प्रारंभ करेगी। इस योजना में भारी मात्रा में पौधरोपण के साथ ही मंदाकिनी की सफाई का अभियान चलेगा। केंद्रीय मंत्री की पत्नी स्नेहलता जैन, जानकीकुंड चिकित्सालय के सीएमओ डा. बीके जैन, नगर पंचायत अध्यक्ष नीलांशु चतुर्वेदी, ग्रामोदय विवि. के डा.अजय चौरे, डा. नीलम चौरे, सुखदेव शर्मा आदि मौजूद रहे। सभा का संचालन शंकर लाल गुप्ता ने किया।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-6619147917099713685?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/6619147917099713685/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/01/blog-post_1779.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/6619147917099713685'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/6619147917099713685'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/01/blog-post_1779.html' title='संस्था के लिए जमीन दान देना अनुकरणीय पहल'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-2326705797571271347</id><published>2010-01-18T06:31:00.001-08:00</published><updated>2010-01-18T06:31:37.665-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='विलक्षण तीर्थ'/><title type='text'>पृथक राज्य के मुद्दे पर गोलमाल जबाव दे गये मंत्री जी</title><content type='html'>चित्रकूट। पृथक बुंदेलखंड राज्य के मुद्दे को केंद्रीय मंत्री ने अपना मुद्दा बताते हुए कहा सरकार में रहने के कारण काफी बातें सोच समझकर बोलनी पड़ती है। उन्होंने बुंदेलखंड मुक्ति मोर्चा व बुंदेलखंड एकीकृत पार्टी के साथ ही बुंदेलखंड की मांग करने वालों को उचित ढंग से बात उठाने की नसीहत दी। प्रदीप जैन ने कहा कि पृथक राज्य बनाने के लिए अभी और भी ज्यादा जन जागरुकता की आवश्यकता है। साथ ही बरगढ़ से पावर प्लांट के स्थानांतरण के सवाल पर मंत्री ने कहा कि इस मामले की कोई जानकारी नहीं है। केंद्रिय मंत्री ने चित्रकूट को विलक्षण तीर्थ स्थान बताते हुये कहा कि यह स्थान बुंदेलखंड की नाक है और इसका विकास सभी को साथ मिलकर करना पड़ेगा।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-2326705797571271347?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/2326705797571271347/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/01/blog-post_193.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/2326705797571271347'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/2326705797571271347'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/01/blog-post_193.html' title='पृथक राज्य के मुद्दे पर गोलमाल जबाव दे गये मंत्री जी'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-8958367887816101408</id><published>2010-01-18T06:30:00.001-08:00</published><updated>2010-01-18T06:30:31.604-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='&apos;फ्री जोन&apos; घोषित कर दिया'/><title type='text'>पर्यटन विकास को चित्रकूट हो फ्री जोन</title><content type='html'>चित्रकूट। ग्रामीण विकास राज्य मंत्री प्रदीप जैन 'आदित्य' ने कहा कि कभी गौरव, वैभव व शौर्य का प्रतीक रहा बुंदेलखंड अब सूखा-तबाही और भुखमरी का प्रतीक बन गया है। इस अनोखे तीर्थ क्षेत्र चित्रकूट में स्वयंसेवी संगठनों द्वारा समाज हितों को साधकर चलायी जा रही मुहिम प्रशंसनीय है। चित्रकूट के विकास के लिए उन्होंने कहा कि इसे दो राज्यों की सीमाओं में बांधा नहीं जाना चाहिये। यहां पर पर्यटन का विकास तभी हो सकता है जब इसे 'फ्री जोन' घोषित कर दिया जाये। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;एक दिवसीय दौरे पर आये केंद्रीय राज्य मंत्री ने सूचना का अधिकार कानून को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की नसीहत दी। महंगाई के मुद्दे पर अपने ही कृषि मंत्री शरद पवार पर टिप्पणी की कि दस दिनों में महंगाई कम करने का पता नही कौन सा फार्मूला उन्होंने ईजाद कर लिया है। बुंदेलखंड की तरक्की के लिए जहां केंद्र सरकार ने राहुल गांधी की विशेष पहल पर एक पैकेज दिया वहीं एक नई योजना पुराने तालाब बावडि़यों और कुंओं की सफाई, कब्जों से मुक्त कराने और उनका सुन्दरीकरण करके विकास के लिए सामने आ चुकी है। इसका नाम आरआरआर योजना दिया गया है। पत्नी स्नेहलता जैन के साथ चित्रकूट दौरे पर आये केन्द्रीय मंत्री ने जानकी कुंड चिकित्सालय व आरोग्य धाम देखने के साथ ही दृष्टि संस्था द्वारा आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेकर स्वामी रामभद्राचार्य से आशीर्वाद लिया।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-8958367887816101408?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/8958367887816101408/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/01/blog-post_5789.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/8958367887816101408'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/8958367887816101408'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/01/blog-post_5789.html' title='पर्यटन विकास को चित्रकूट हो फ्री जोन'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-4278594778131022154</id><published>2010-01-18T06:29:00.000-08:00</published><updated>2010-01-18T06:29:30.954-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='का न्योता'/><title type='text'>स्वावलंबन को चल रहे कार्य से प्रदीप उत्साहित</title><content type='html'>चित्रकूट। केंद्रिय मंत्री ने सद्गुरु सेवा संघ के सेवा कार्यो को देखा फिर आरोग्यधाम की गौशाला गये। उन्होंने जानकीकुंड चिकित्सालय में लेप्रोकोन कार्यशाला के दौरान मरीजों के आपरेशन के दृश्य देखकर कहा कि उन्होंने अस्पताल के सीएमओ डा. वीके जैन से झांसी में भी यहां की तरह सेवा कार्य के विस्तार करने को कहा। इस काम के लिये उन्हें झांसी आने का न्योता भी दिया।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-4278594778131022154?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/4278594778131022154/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/01/blog-post_7562.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/4278594778131022154'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/4278594778131022154'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/01/blog-post_7562.html' title='स्वावलंबन को चल रहे कार्य से प्रदीप उत्साहित'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-1041730340345934194</id><published>2010-01-18T06:28:00.000-08:00</published><updated>2010-01-18T06:28:13.246-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='चित्रकूट के विकास के'/><title type='text'>नई पीढ़ी के हाथ सुरक्षित भविष्य : प्रदीप</title><content type='html'>चित्रकूट। चित्रकूट नगर पंचायत की नवनिर्वाचित कमेटी को शपथ ग्रहण करवाने पहुंचे केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री प्रदीप जैन 'आदित्य' ने कहा कि जिस माटी पर भगवान राम के साथ ही संतो का आर्शीवाद हमेशा बरसता हो उस भूमि पर जो भी होता है अच्छे के लिये ही होता है। अपने आपको बुंदेली माटी का बेटा बताते हुये कहा कि यहां का इतिहास संघर्ष और समर्पण का रहा है। भले ही यहां की रियासतें छोटी-छोटी रही हो पर रानी लक्ष्मी बाई, आल्हा, उदल और राजा छत्रशाल का नाम तो बच्चों की जुबान पर सुनाई देता है। उन्होंने कहा कि चित्रकूट के विकास के लिये वे अपने स्तर से भी हरसंभव प्रयास करेंगे। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इस दौरान अपर जिलाधिकारी सतना प्रदीप गुप्ता ने नव निर्वाचित नगर पंचायत अध्यक्ष नीलांशु चतुर्वेदी व सभी पन्द्रह सभासदों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इसके पूर्व कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे कें द्रीय मंत्री व नीलांशु चतुर्वेदी ने परिक्षेत्र से पधारे साधु संतों का आर्शीवाद लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे स्वामी राजगुरु संकषर्णाचार्य प्रपन्नाचार्य महाराज ने चाणक्य और राजनीति का तात्विक विवेचन कर कहा कि धर्म आधारित राजनीति से ही देश सही दिशा में जायेगी। इसकी पुष्टि पुराण करते हैं। &lt;br /&gt;इस अवसर पर द्वारिकेश पटैरिया, चौबे तेज भान सिंह, हेमराज राज चौबे, नंदिता पाठक, डा. वीके जैन, कर्नाटक वाली माता जी, कु. गीता देवी, मु. रसीद उर्फ चीनी, प्यारे भाई व रमादत्त मिश्र सहित भारी संख्या में लोग मौजूद रहे।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-1041730340345934194?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/1041730340345934194/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/01/blog-post_8821.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/1041730340345934194'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/1041730340345934194'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/01/blog-post_8821.html' title='नई पीढ़ी के हाथ सुरक्षित भविष्य : प्रदीप'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-2805237422700068500</id><published>2010-01-18T06:26:00.000-08:00</published><updated>2010-01-18T06:26:30.481-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='आठ पत्रक भरकर समिति'/><title type='text'>चित्रकूट संसद : अपनी मिंट्टी, अपने लोग और अपना विकास</title><content type='html'>चित्रकूट। 'अपनी मिट्टी अपने लोग' अपना विकास अब खुद अपने दम पर कुछ ऐसे ही अरमान लेकर जब चित्रकूट संसद की परिकल्पना की गई तो सबके भाव सामने आने लगे। चित्रकूट संसद को लेकर शनिवार को सूचना विभाग के सभागार में कोर ग्रुप की बैठक समाजसेवी गोपाल भाई की अध्यक्षता में हुई। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;संवाद के क्रम में तमाम नये विचार आये। उप्र और मप्र के राजनेताओं की सहमति के बाद सभी पार्टियों के जिलाध्यक्षों के साथ स्वयंसेवी संगठनों के साथ आने की सहमति की बात सामने आई। इस दौरान कार्यक्रम संयोजक अर्चन ने बताया कि अभी तक 21 सूत्रीय आठ पत्रक भरकर समिति को प्राप्त हो चुके हैं। जिनमें काफी उपयोगी सुझाव हैं। &lt;br /&gt;बताया कि महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के डा. आर सी सिंह, डा. रघुवंश प्रसाद बाजपेयी, लक्ष्मण प्रसाद गर्ग, गुरु प्रसाद शुक्ल, समाजसेवी आलोक द्विवेदी, भारतीय साहित्यकार परिषद के निदेशक बलबीर सिंह के साथ ही पत्रकार अमर दीप भट्ट ने सुझाव पत्रकों को जमा करने का काम किया है। &lt;br /&gt;बताया कि समिति ने विपक्ष और पक्ष सभी पार्टियों के नेताओं के साथ ही लगभग सौ लोगों के पास पत्रकों को भेजा है। इस अवसर पर केशव शिवहरे,समाजसेवी आलोक द्विवेदी बसपा के जिला उपाध्यक्ष राम सागर चतुर्वेदी व समाजसेवी पंकज अग्रवाल भी मौजूद रहे।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-2805237422700068500?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/2805237422700068500/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/01/blog-post_18.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/2805237422700068500'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/2805237422700068500'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/01/blog-post_18.html' title='चित्रकूट संसद : अपनी मिंट्टी, अपने लोग और अपना विकास'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-3822353719022953973</id><published>2010-01-12T21:38:00.000-08:00</published><updated>2010-01-12T21:38:14.664-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='डाकू राजू कोल'/><title type='text'>अभी बांकी है और भी मानवता के क्रंदक</title><content type='html'>चित्रकूट। जहां एक तरफ यहां आध्यात्म और धर्म की गंगा इस जिले में बहती हैं वही दूसरी ओर असलहा की संस्कृति भी अपने चरम पर भी यहां पर ही दिखाई देती है। डाकुओं का इतिहास यहां काफी पुराना है। कभी डाकू आत्मसमर्पण करते गये तो कभी भगवे के रंग में अपने आपको रंगते गये। आज के हालातों में भले ही डाकू ददुवा और ठोकिया भगवान को प्यारे हो चुके हो और डाकू खड्गसिंह उर्फ मुन्नी लाल यादव जेल की हवा खा रहे हो पर अभी भी इस जिले स अपराध की इबारत को आगे बढ़ाने में लगे डाकू अपना खूनी खेल खेल रहे हैं। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;डाकू संजय यादव, डाकू रागिया उर्फ सुन्दर पटेल, डाकू बलखडिया उर्फ स्वदेश, डाकू राजू कोल जैसे कुछ नाम हैं जो पुलिस के लिये लगातार चुनौतियां पेश कर रहे हैं। डाकू राजा खान भी ऐसा नाम है जो लगातार ठेकेदारों के साथ वन कर्मियों के लिये परेशानियां उत्पन्न रहा है। &lt;br /&gt;बसपा का शासन आने पर जस अंदाज में भयमुक्त समाज की परिकल्पना को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से एसटीएफ ने डाकू ददुवा को गिरोह समेत व डाकू ठोकिया को मारा व उसके बाद डाकू खड्ग सिंह व गौरी यादव को जेल के सीखचों के पीछे डाला, पर अभी भी लगभ आधा दर्जन से ज्यादा डाकुओं के गिरोह मानवता को क्रंदित करने का काम कर रहे हैं। &lt;br /&gt;पिछले महीने डाकू संजय यादव ने तो एक दम से पत्थर की खदानों पर हमला कर अपने मंसूबे स्पष्ट कर पुलिस को खुली चुनौती दी थी। गौर करने लायक बात तो इसमें यह थी कि पुलिस की कांबिंग वहीं पर प्रारंभ थी और एक किलोमीटर के अंतर में गिरोह ने दूसरी वारदात कर दी थी। फिलहाल अभी पुलिस के पास डाकुओं को समाप्त करने की कोई फूल फ्रूफ व्यवस्था नही समझ में आती। &lt;br /&gt;रिटायर्ड पुलिस इंसपेक्टर रंग नाथ शुक्ला कहते हैं कि यहां की गरीबी ही डकैती की जनक है। गरीब को बंदूक के माध्यम से पैसा कमाना ज्यादा आसान लगता है। अगर वास्तव में यहां से डकैती की समस्या का अंत करना है तो उसके लिये सरकारी योजनाओं को क्रियान्वयन गांवों में गरीबों के बीच होना चाहिये।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-3822353719022953973?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/3822353719022953973/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/01/blog-post_12.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/3822353719022953973'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/3822353719022953973'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/01/blog-post_12.html' title='अभी बांकी है और भी मानवता के क्रंदक'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-6351796804426465272</id><published>2010-01-12T21:36:00.000-08:00</published><updated>2010-01-12T21:36:16.110-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='शंकर जी का मंदिर या'/><title type='text'>लोगों की राह तकते ये अनोखे तीर्थ व पर्यटक स्थल</title><content type='html'>चित्रकूट । जिस स्थान के बारे में मर्यादा पुरुषोत्तम श्री भगवान राम के चरित्र को सारे विश्व के सामने लाने वाले महर्षि वाल्मीकि ने रामायणम् में लिख दिया हो 'चित्र विचित्रो रुप दर्शनम् समग्रम यस्मिन स कूट: चित्रकूट' और इस बात को सभी स्वीकारते भी हों पर विकास के नाम पर कुछ ही स्थानों पर आने और जाने के साधन बन सके हैं। ज्यादातर जगहों के बारे में ग्रामीणों के अलावा कोई जानता ही नही है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;वैसे अगर पुराने ग्रंथों के पन्नों को पलटा जाये तो इस चौरासी कोस के परिक्षेत्र में काफी ऐसे अद्भुद स्थान हैं जो वक्त के बेरहम हाथों पर पड़़कर अपने अस्तित्व के लिये ही संघर्ष कर रहे हैं। चर गांव का सोमनाथ का मंदिर हो या फिर मडफा पहाड़ पर स्थित पंचमुखी शंकर जी का मंदिर या फिर कलवलिया का शिव मंदिर। &lt;br /&gt;भागवत कथा आचार्य पं. नवलेश दीक्षित कहते हैं कि यह तो चित्रकूट की महिमा है कि जहां शिव, शक्ति और राम को पूजने वाले वैष्णव एक साथ रहते हैं और किसी भी प्रकार का मतान्तर नही है। सुबह का सूरज महाराजाधिराज स्वामी मत्स्यगयेन्द्र नाथ के दर्शन से उगता है तो दोपहर की परिक्रमा कामतानाथ के विग्रह की होती है शाम की आरती लोग वन देवी की करते हैं। द्वैत और अद्वैत वाद से विलग इस अनोखे तीर्थ पर पर आज भी काफी पुराने ऋषि तपस्या रत हैं। इसी प्रकार से यहां के पर्वतों व जंगलों में विशेष आराधना के स्थल है। जिनमें अधिकतर तो लोगों को पता ही नही। यह बात अलग है कि सीतापुर और आसपास के स्थानों के बारे में लोगों को जानकारी है पर शबरी प्रपात, राम प्रपात, गणेश बाग, बांके सिद्ध, कोटितीर्थ, देवांगना, सीता रसोई, पंपासर, वन देवी, हंस तीर्थ, सिरसावन, पंचप्रयाग, फलकी वन, रामशैया, व्यास कुंड, सूर्य कुंड, मडफा, बाल्मीकि आश्रम, सरभंग आश्रम, धारकुंडी, सारंग तीर्थ, ऋषियन, ब्रहस्पति कुंड, विराध कुंड, अमरावती, भरतकूप, पुष्करिणी,माण्डकर्णी आश्रम के साथ ही तमाम ऐसे स्थान हैं जहां पर अभी भी पर्यटक नही जाते हैं। &lt;br /&gt;वे कहते हैं कि अगर इन स्थानों पर लोगों के आवागमन के लिये सड़क, बिजली, पानी और सुरक्षा की व्यवस्था हो जाये तो लोग जाने लगेंगे। इससे इन स्थानों का विकास होने के साथ ही स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। &lt;br /&gt;जिला विद्यालय निरीक्षक मंशा राम कहते हैं कि अभी पिछले दिनों उन्होंने राजकीय इंटर कालेज घुरेटनपुर के निरीक्षण के समय मड़फा के शिव मंदिर का दर्शन किया। उन्होंने बताया कि यही पर एक कोठरी में राम- राम लिखा हुआ भी काफी विशेष था। कहा कि अभी डाकुओं के डर से पर्यटक वहां पर नही जा पाते और इतनी विलक्षण जगहों का प्रचार प्रसार भी नही है। अगर इन स्थानों का प्रचार-प्रसार सही तरीके से हो तो निश्चित तौर पर पर्यटक जायेंगे और आनंदित होगे।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-6351796804426465272?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/6351796804426465272/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/01/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/6351796804426465272'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/6351796804426465272'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2010/01/blog-post.html' title='लोगों की राह तकते ये अनोखे तीर्थ व पर्यटक स्थल'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-4971637673201326726</id><published>2009-12-28T23:06:00.001-08:00</published><updated>2009-12-28T23:06:56.086-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='साथ ही अन्य जगहों से'/><title type='text'>याद ए इमाम हुसैन :जब अंगारे बन जाते हैं फूल</title><content type='html'>चित्रकूट। राजा यजीद की क्रूरता की कहानी एक बार फिर दोहराई गई। कौम की सलामती के लिये संघर्ष करने वाले इमाम हुसैन को याद कर अकीकतमंदों ने जलने की परवाह न करते हुये अंगारों को फूलों की मानिंद हवा में उछाला। कर्वी के साथ ही तरौंहा, सीतापुर, बरगढ़, मानिकपुर, मऊ के आसपास के क्षेत्रों में इस तरह के मजमें को देखने के लिये रात भर लोग सड़कों पर रहे। मुख्यालय के पुरानी बाजार में ही लगभग आधा दर्जन इमाम बाड़ों के बाहर इस तरह के दृश्य नंगी आंखों के गवाह बने। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;रविवार देर रात से शुरु हुआ यह मातमी अलम अलसुबह तक जारी रहा। रात एक बजे के बाद अलावों में आग लगा दी गई। अकीकतमंद नहा धोकर मातमी ढोल और ताशों की आवाजों के साथ इमाम बाडों से निकले और हजारों के हुजूम के सामने जलती हुई आग में अपने जौहर दिखाने के लिये कूद पड़े। &lt;br /&gt;सांसद आरके पटेल बांदा से मुहर्रम मिलकर जैसे ही कर्वी आये। पुरानी बाजार चौराहे पर बज रहे मातमी ढोल की आवाजों से खुद को अलग नही कर पाये। उन्होंने मुस्लिम समुदाय के लोगों को बधाई भी दी। &lt;br /&gt;जियारत करने के लिये लोग टूट पड़े &lt;br /&gt;अलाव के बाद इमाम बाड़ों से निकले ताजियों को देखने के लिये लोग टूट पड़े। कर्वी, तरौंहा व सीतापुर में हजारों लोग ताजियों के नीचे अपने बच्चों को लेकर निकल रहे थे। काफी लोग रेवडि़यों का प्रसाद भी चढ़ा रहे थे। ताजियों के आसपास लगे हुजूम में नेजा व सवारियां अपने करतब ढोल की आवाजों पर करतब दिखा रहे थे। नाथ बाबा की सवारी में मन्नत मांगने वालों का तांता लगा रहा। सोमवार को दोपहर पुरानी बाजार व तरौंहा के साथ ही अन्य जगहों से उठे ताजिये शाम को धुस के मैदान में मिलाप के बाद सुपुर्दे आव कर दिये गये।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-4971637673201326726?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/4971637673201326726/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2009/12/blog-post_9986.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/4971637673201326726'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/4971637673201326726'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2009/12/blog-post_9986.html' title='याद ए इमाम हुसैन :जब अंगारे बन जाते हैं फूल'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-7301319063325038362</id><published>2009-12-28T23:05:00.000-08:00</published><updated>2009-12-28T23:05:45.151-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='बढ़ाते दिखे।'/><title type='text'>बीता वर्ष:सड़क पर कराहती रही गर्भवती महिलायें</title><content type='html'>चित्रकूट। भले ही स्वास्थ्य मंत्रालय हो हल्ला मचाकर परिवार कल्याण के कार्यक्रमों की रीढ़ नसबंदी के साथ ही गर्भनिरोधकों के प्रयोग को मुख्य मानकर जनसंख्या नियंत्रण के प्रयास में लगा हो। वहीं दूसरी तरफ सुरक्षित मातृत्व के लिये जननी सुरक्षा योजना के तहत गर्भवती माता को स्वास्थ्य केंद्रो पर प्रसव के लिये पैसे भी देता हो पर सरकारी अस्पतालों में चलने वाला यह कार्य अलग ही शक्ल में दिखाई देता रहा। गर्भवती मातायें सड़कों, अस्पताल के गेट पर कराहती बच्चा जनती रहीं और उनकी कराहें जिम्मेदारों के कान तक नही पहुंची। इस साल तो जनसंख्या को घटाने के ज्यादा से ज्यादा प्रयास स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी जनसंख्या को बढ़ाते दिखे। &lt;br /&gt;गौरतलब है कि सरकारी आंकड़े वर्ष 2001 में जिले की चित्रकूट। भले ही स्वास्थ्य मंत्रालय हो हल्ला मचाकर परिवार कल्याण के कार्यक्रमों की रीढ़ नसबंदी के साथ ही गर्भनिरोधकों के प्रयोग को मुख्य मानकर जनसंख्या नियंत्रण के प्रयास में लगा हो। वहीं दूसरी तरफ सुरक्षित मातृत्व के लिये जननी सुरक्षा योजना के तहत गर्भवती माता को स्वास्थ्य केंद्रो पर प्रसव के लिये पैसे भी देता हो पर सरकारी अस्पतालों में चलने वाला यह कार्य अलग ही शक्ल में दिखाई देता रहा। गर्भवती मातायें सड़कों, अस्पताल के गेट पर कराहती बच्चा जनती रहीं और उनकी कराहें जिम्मेदारों के कान तक नही पहुंची। इस साल तो जनसंख्या को घटाने के ज्यादा से ज्यादा प्रयास स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी जनसंख्या को बढ़ाते दिखे। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;गौरतलब है कि सरकारी आंकड़े वर्ष 2001 में जिले की जनसंख्या 8 लाख एक हजार नौ सौ सन्तावन थी। सरकारी लिहाज से जनसंख्या वृद्धि दर 34.33 प्रतिशत होने पर प्रतिवर्ष बढ़ी जनसंख्या के हिसाब से इस समय यह संख्या तेरह लाख पार कर चुकी है। वर्ष 01 में लिंग का अनुपात एक हजार पुरुषों पर 898 महिला था जो कि निराशाजनक है पर आल्ट्रासाउंड सेंटरों पर की गई सख्ती का परिणाम अब कारगर रुप में दिखाई देने लगा है। सरकारी सूत्र इस बात की पुष्टि करते हैं कि अब जिले में 935 से ऊपर महिलाओं की जनसंख्या है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;वैसे इस समय जिले में स्वास्थ्य विभाग के वास्तविक हालातों को देखा जाये तो लगातार जांचों के बाद महकमें में हडकंप की स्थिति है। डब्लू एच ओ के साथ ही सुरक्षित मातृत्व व बच्चों के पोषण के लिये स्वयंसेवियों के हस्तक्षेप के बाद ग्रामीण स्तर पर काफी काम इस साल हुआ है। फिर भी जिला स्तर पर चिकित्सकों की कमी और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी व एएनएम व नर्सो की संख्या कम होने से लोगों को स्वास्थ्य सुविधायें पूरे तौर पर नही मिल पा रही हैं। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जिले में कम से कम तीन बार प्रसव पीडा से जूझती गर्भवती महिलाओं की कराहें सड़कों पर सुनी गई। मुख्यालय के पुरानी बाजार और इलाहाबाद रोड़ बैरियल पर दो महिलाओं ने बच्चे जने। जिसमें एक को तो जिला चिकित्सालय से वापस कर दिया गया था। राम नगर में तो सड़क पर बच्चा जनने पर काफी बवाल हुआ था। आक्रोशित लोगों ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर तोड़फोड कर जाम लगा दिया था। जिलाधिकारी के हस्तक्षेप और लापरवाही बरतने के आरोप में डाक्टर व पैरामेडिकल स्टाफ के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया गया था। नसबंदी की बात की जाये तो नवंबर तक महिलाओं ने डेढ़ हजार व पचास पुरुषों ने कराये। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;वैसे विभागीय आंकड़े चाहे जो कुछ भी कहे पर वास्तव में भारत सरकार द्वारा जनसंख्या नियंत्रण के लिये चलाया जाने वाला यह कार्यक्रम जनसामान्य के साथ ही अधिकारियों के खाने कमाने का जरिया साबित हो रहा है। जननी सुरक्षा योजना में तो घालमेल को लेकर तमाम शिकायतें तहसील दिवसों पर आती रहती हैं। &lt;br /&gt;लाख एक हजार नौ सौ सन्तावन थी। सरकारी लिहाज से जनसंख्या वृद्धि दर 34.33 प्रतिशत होने पर प्रतिवर्ष बढ़ी जनसंख्या के हिसाब से इस समय यह संख्या तेरह लाख पार कर चुकी है। वर्ष 01 में लिंग का अनुपात एक हजार पुरुषों पर 898 महिला था जो कि निराशाजनक है पर आल्ट्रासाउंड सेंटरों पर की गई सख्ती का परिणाम अब कारगर रुप में दिखाई देने लगा है। सरकारी सूत्र इस बात की पुष्टि करते हैं कि अब जिले में 935 से ऊपर महिलाओं की जनसंख्या है। &lt;br /&gt;वैसे इस समय जिले में स्वास्थ्य विभाग के वास्तविक हालातों को देखा जाये तो लगातार जांचों के बाद महकमें में हडकंप की स्थिति है। डब्लू एच ओ के साथ ही सुरक्षित मातृत्व व बच्चों के पोषण के लिये स्वयंसेवियों के हस्तक्षेप के बाद ग्रामीण स्तर पर काफी काम इस साल हुआ है। फिर भी जिला स्तर पर चिकित्सकों की कमी और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी व एएनएम व नर्सो की संख्या कम होने से लोगों को स्वास्थ्य सुविधायें पूरे तौर पर नही मिल पा रही हैं। जिले में कम से कम तीन बार प्रसव पीडा से जूझती गर्भवती महिलाओं की कराहें सड़कों पर सुनी गई। मुख्यालय के पुरानी बाजार और इलाहाबाद रोड़ बैरियल पर दो महिलाओं ने बच्चे जने। जिसमें एक को तो जिला चिकित्सालय से वापस कर दिया गया था। राम नगर में तो सड़क पर बच्चा जनने पर काफी बवाल हुआ था। आक्रोशित लोगों ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर तोड़फोड कर जाम लगा दिया था। जिलाधिकारी के हस्तक्षेप और लापरवाही बरतने के आरोप में डाक्टर व पैरामेडिकल स्टाफ के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया गया था। नसबंदी की बात की जाये तो नवंबर तक महिलाओं ने डेढ़ हजार व पचास पुरुषों ने कराये। &lt;br /&gt;वैसे विभागीय आंकड़े चाहे जो कुछ भी कहे पर वास्तव में भारत सरकार द्वारा जनसंख्या नियंत्रण के लिये चलाया जाने वाला यह कार्यक्रम जनसामान्य के साथ ही अधिकारियों के खाने कमाने का जरिया साबित हो रहा है। जननी सुरक्षा योजना में तो घालमेल को लेकर तमाम शिकायतें तहसील दिवसों पर आती रहती हैं।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-7301319063325038362?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/7301319063325038362/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2009/12/blog-post_1047.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/7301319063325038362'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/7301319063325038362'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2009/12/blog-post_1047.html' title='बीता वर्ष:सड़क पर कराहती रही गर्भवती महिलायें'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-5900481773498325602</id><published>2009-12-28T23:03:00.001-08:00</published><updated>2009-12-28T23:03:37.347-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='भी संचालित'/><title type='text'>नये साल में मिल जायें और भी महिला चिकित्सक</title><content type='html'>चित्रकूट। साल भर प्रसव पीड़ा को लेकर महिलायें अस्पतालों की दस्तक तो देती रही पर उन्हें अपना इलाज पूरी तरह से कहीं नही मिला यह बात दीगर है कि कभी स्थानांतरित होती चिकित्सकों के कारण तो कभी हालिया बनाये गये मेडिकल केयर यूनिट में तैनात महिला चिकित्सकों की झिड़कियों के कारण उनकी परेशानियां बढ़ती ही रही। स्वास्थ्य महकमें के लिये आने वाला साल एक्सीडेंटल मरीजों के साथ ही महिलाओं के लिये खास होगा क्योंकि अभी आबादी व बीमारी के हिसाब से महिला चिकित्सकों की संख्या जिले में काफी कम है। जिसके कारण महिलाओं को भारी दिक्कतें हैं। &lt;br /&gt;गौरतलब है कि कभी जिला संयुक्त चिकित्सालय में ही महिला चिकित्सालय भी संचालित किया गया था। पुराने जिला अस्पताल की बिल्डिंग में काफी जगह खाली होने के कारण पूर्व सीएमओ डा. आरके निरंजन ने काफी प्रयास कर मेडिकल केयर यूनिट की स्थापना करवाकर यहां पर महिलाओं के लिये अस्पताल खुलवा दिया था। इसके बाद यहां पर कुछ महिला डाक्टरों की नियुक्ति हुई। तीन महिला डाक्टरों में से एक भी महिला डाक्टर पूर्ण कालिक नियुक्त नही हुई। स्वास्थ्य महकमे के काफी प्रयासों के बाद तीन डाक्टर संविदा पर मिली। जिनमें से एक डाक्टर को पिछड़े मोहल्लों के छोटे अस्पताल मे काम करने के लिये लगाया गया। लगभग डेढ़ लाख की आबादी के जिला मुख्यालय और जिले भी के गांवों से आने वाली महिलाओं के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी केवल इन्हीं महिला डाक्टरों पर है। अब ऐसे में मुख्य चिकित्साधिकारी द्वारा शासन से बार-बार मांग किये जाने के बाद भी सृजित पदों के सापेक्ष महिला डाक्टरों की तैनाती न होने के कारण लोगों को भारी निराशा है। &lt;br /&gt;मुख्य चिकित्साधिकारी डा. आरडी राम कहते हैं कि हमारे पास महिला चिकित्सक नही हैं फिर भी हम महिलाओं को बेहतर इलाज देने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आशा जताई कि आने वाले साल में और भी महिला चिकित्सक मिलेगी जिससे महिला मरीजों को भी सुविधा होगी। उधर नसबंदी कार्यक्रम के बारे में पूछे जाने पर कहा कि जहां महिलायें नसबंदी कराने के लिये हर साल आगे आती है इस बार विभाग के प्रचार प्रसार का फायदा पुरुष नसबंदी पर हो रहा है। हालिया पांच कैंम्पों में लगभग पांच दर्जन पुरुषों की नसबंदी इस बात का प्रमाण है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-5900481773498325602?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/5900481773498325602/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2009/12/blog-post_28.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/5900481773498325602'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/5900481773498325602'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2009/12/blog-post_28.html' title='नये साल में मिल जायें और भी महिला चिकित्सक'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-3142549637018003130</id><published>2009-12-23T07:52:00.000-08:00</published><updated>2009-12-23T07:52:09.130-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='चित्रकूट का'/><title type='text'>मानव बने रहना ही सबसे बड़ा पुरस्कार</title><content type='html'>चित्रकूट। भले ही गुजरता वक्त किसी की परवाह न करे और हौले हौले 2009 के कदम 2010 तक पहुंच गये हो पर नयी उम्मीदों का यह साल हर अच्छा काम करने वाले व्यक्ति के जीवन में वह क्षण लाये जो उसे आनंदित कर सकें। समाज के हितों में काम करने वाले अधिकतर लोगों के यही विचार हैं। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. ज्ञानेन्द्र सिंह ने इस अलौकिक स्थान को विश्व पटल पर स्थापित करने के उद्देश्य से एक बड़ा कदम उठाया है। यूनिवर्सिटी आफ थर्ड एज की ओर से यहां फरवरी माह में होने वाले कार्यक्रम में लगभग सौ देशों के विद्वान जुटेंगे। इससे जहां यहां के पर्यटन को बढ़ावा मिलने की दिशा में काफी सार्थक प्रयास होंगे वहीं चित्रकूट का नाम ग्लोबल स्तर पर और ज्यादा ख्याति अर्जित करेगा। &lt;br /&gt;भागवत कथा आचार्य नवलेश दीक्षित कहते हैं कि हर व्यक्ति को एक लक्ष्य बना कर ही योजनाबद्ध तरीके से काम करना चाहिये। लक्ष्यहीन व्यक्ति को कभी सफलता नही मिलती है। शिक्षा, खेल और समाजसेवा के क्षेत्र में काम करने वालों को पहचान कर पुरस्कार देना मानवता है। &lt;br /&gt;शिक्षक आनंद राव तैलंग कहते हैं कि हर विद्यार्थी अपने जीवन के चरमोत्कर्ष को प्राप्त करे यही अभिलाषा है। उन्होंने कहा कि भले ही पुरस्कार व्यक्ति के जीवन के आनंद में वृद्धि करते हो पर कहीं यह क्षण सफलता की अगली सीढ़ी के बाधक न बन जायें इसलिये व्यक्ति को आगे बढ़ते रहना चाहिये। व्यापारी राजेश सोनी आशा जताते हैं कि यहां साल नई उम्मीदें लेकर आयेगा।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-3142549637018003130?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/3142549637018003130/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2009/12/blog-post_23.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/3142549637018003130'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/3142549637018003130'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2009/12/blog-post_23.html' title='मानव बने रहना ही सबसे बड़ा पुरस्कार'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-4023446152720275247</id><published>2009-12-10T22:13:00.001-08:00</published><updated>2009-12-10T22:13:27.110-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='लोकप्रिय बनाने'/><title type='text'>बुंदेलखंडी संगीत को आगे ले जाने की ख्वाहिश</title><content type='html'>चित्रकूट। इंडियन आइडियल के टाप टेन में पहुंचकर बुंदेलखंड का नाम रोशन कर चुके गायक कुलदीप सिंह चौहान का मानना है कि शास्त्रीय संगीत ही संगीत की जड़ है। बगैर इसके किसी भी विधा में गाया जाने वाला गीत सफल हो ही नहीं सकता। जिस संगीत में अपने घरों की खुशबू न हो उसका मतलब भी कुछ नही होता। इसलिए अब वे बुंदेलखंड के संगीत को विश्व स्तर पर ले जाने का प्रयास करेंगे। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मंगलवार को एक कार्यक्रम में आये बांदा निवासी कुलदीप सिंह चौहान ने बातचीत में कहा कि बढ़ती पश्चिमी सभ्यता के चलते पाश्चात्य संगीत हावी होता जा रहा है। आधुनिक पीढ़ी इसे ज्यादा पसंद करती है परंतु यह शौक स्थायी नहीं होता। किसी भी गायक व संगीतकार को शास्त्रीय संगीत की मदद लेनी ही पड़ती है। शास्त्रीय संगीत किसी भी संगीत की प्राइमरी पाठशाला है। बगैर इसमें पढ़े कोई भी तरक्की नहीं कर सकता। कुलदीप ने बताया कि वह संगीत में पीएचडी करने के बाद बुंदेलखंड के गीत संगीत को विश्व स्तर पर लोकप्रिय बनाने के लिए काम करेंगे।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-4023446152720275247?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/4023446152720275247/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2009/12/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/4023446152720275247'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/4023446152720275247'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2009/12/blog-post.html' title='बुंदेलखंडी संगीत को आगे ले जाने की ख्वाहिश'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-7098401986926799145</id><published>2009-08-12T06:27:00.000-07:00</published><updated>2009-08-12T06:28:11.351-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='बुरे संस्कार समाप्त हो जाते'/><title type='text'>सूर्य का उपहार</title><content type='html'>चित्रकूट के पास एक जगह है सूरज कुंड, जहां लोग साधना करने जाते हैं।&lt;br /&gt;एक समय की बात है। महर्षि भगुनंदनजमदग्निधनुष-बाण से खेल रहे थे। वे किसी खाली स्थान पर बार-बार बाण चला रहे थे। उनकी पत्नी रेणुका बार-बार बाण लाकर दे रही थीं, लेकिन जेठ माह के तपते सूर्य ने उन्हें परेशान कर दिया। इस वजह से उन्हें बाण लाने में देरी भी हो जाती। महर्षि ने उनसे इसकी वजह पूछी। उन्होंने जवाब दिया कि सूर्य की तेज रोशनी न केवल हमारे सिर को तपा रही है, बल्कि पैर भी जला रही है। इतना सुनते ही महर्षि क्रोधित हो गए और कहा-देवी जिस सूर्य ने तुम्हें कष्ट पहुंचाया, उसे मैं अपने अग्निअस्त्र से गिरा दूंगा। जैसे ही उन्होंने धनुष पर बाण चढाया, भयभीत होकर भगवान सूर्य ने ब्राह्मण का वेश धारण कर लिया और उनके सामने प्रकट हो गए। उन्होंने उनसे विनती की कि मुझे अपनी गलती का अहसास हो गया है।&lt;br /&gt;साथ ही, उन्होंने एक जोडी पादुका और एक छत्र महर्षि को उपहार स्वरूप प्रदान कर दिए। उन्होंने कहा कि यह छत्र सिर पर पडने वाली किरणों से आपका बचाव करेगा और पादुकाएं तपती जमीन पर पैर रखने में सहायता करेंगे। मान्यता है कि यह घटना चित्रकूट से दस किलोमीटर की दूरी पर सूरजकुंड में हुई थी। महाभारत में भी इस घटना का उल्लेख मिलता है। भक्त मानते हैं कि यह स्थान प्रकृति का अनमोल वरदान है। इसलिए यह कई ऋषि-मुनियों की तपस्थलीभी है। आज भी लोग साधना और ध्यान के लिए सूरजकुंड जाते हैं।&lt;br /&gt;मान्यता है कि वहां जाने के बाद न केवल हमारे सभी बुरे संस्कार समाप्त हो जाते हैं, बल्कि हमारा अंतस भी पवित्र हो जाता है। संभवत:यही संस्कार परमात्मा के नजदीक जाने के लिए आवश्यक कारक बनते हैं।&lt;br /&gt;-[संदीप रिछारिया]&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-7098401986926799145?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/7098401986926799145/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2009/08/blog-post.html#comment-form' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/7098401986926799145'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/7098401986926799145'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2009/08/blog-post.html' title='सूर्य का उपहार'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-2696853738592339979</id><published>2009-07-29T07:53:00.000-07:00</published><updated>2009-07-29T07:58:33.682-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='बाबा तुलसी दास का लगाया'/><title type='text'>..यहीं पर लिखा गया था अयोध्या कांड</title><content type='html'>Jul 27, 10:10 pm&lt;br /&gt;चित्रकूट [संदीप रिछारिया]। आज का 'रामबोला' कल गोस्वामी तुलसीदास बन श्री राम कथा का अमर गायक बन पूरे विश्व में आदर का पात्र बन जायेगा, यह राजापुर के निवासियों ने कभी सोचा भी न था। यह बात और थी कि यह विलक्षण योगी स्वामी नरहरिदास को राजापुर के ही समीप हरिपुर के पास एक पेड़ के नीचे मिल गया और वे उसे उठाकर अपने साथ ले गये। मर्यादा पुरुषोत्तम राम के नाम व उनकी महिमा से परिचित कराने के साथ ही उन्होंने राम बोला को संस्कार व काशी ले जाकर शिक्षा दी तब वह गोस्वामी तुलसीदास बन सके।&lt;br /&gt;तुलसी पीठाधीश्वर जगतगुरु स्वामी रामभद्राचार्य बताते हैं कि वैसे तो संत तुलसीदास चित्रकूट में अपने गुरु स्थान नरहरिदास आश्रम पर कई वर्षो तक रहे और यहां पर उन्होंने मर्यादा पुरुषोत्तम राम व भ्राता लक्ष्मण के दो बार साक्षात् दर्शन भी किये। उन्होंने यहीं पर रहकर रामचरित मानस का पूरा अयोध्या कांड व विनय पत्रिका पूर्वाद्ध भी लिखा।&lt;br /&gt;अभी तक ज्यादातर लोग सिर्फ यही जानते हैं कि तुलसीदास की हस्तलिखित रामचरित मानस की प्रति सिर्फ राजापुर में है पर इस दुर्लभ प्रति को चित्रकूट परिक्रमा मार्ग स्थित नरहरिदास आश्रम में देखा जा सकता है। यही स्थान गोस्वामी तुलसीदास जी का गुरु स्थान है, इसे महल मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यहां पर पिछले चालीस वर्षो से मंदिर की व्यवस्था का काम देखने वाले स्वामी रघुवर दास बताते हैं कि स्वामी नरहरिदास ने अपने जीवन काल का अधिकांश समय चित्रकूट में ही व्यतीत किया। गोस्वामी जी चित्रकूट में ही पले व बडे़ हुए। वह हमेशा अपने गुरु स्थान पर आते रहे और यहां पर भी वे रामचरित मानस के साथ ही अन्य ग्रंथों की रचना में तल्लीन रहते थे।&lt;br /&gt;उन्होंने रामचरित मानस की एक मूल हस्तलिखित प्रति दिखाते हुए कहा कि यह गोस्वामी जी के हाथ की लिखी गयी प्रति है। इसके लगभग पांच सौ पेज अभी भी सुरक्षित हैं जिसमें सभी कांडों के थोड़े-थोड़े पन्ने हैं। आर्थिक अभावों के चलते वे इसका संरक्षण कराने में अपने आपको असमर्थ बताते हैं। कहा कि न तो मंदिर में आमदनी का कोई स्रोत है और न ही उनके पास किसी तरह की मदद आती है।&lt;br /&gt;उन्होंने बताया कि संत तुलसीदास का लगाया गया पीपल का पेड़ भी यहीं पर है जो उचित संरक्षण के अभाव में गिरने के कगार पर है। चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बाबा तुलसी दास का लगाया पेड़ तो सबकी नजरों के सामने ही है पर उसके संरक्षण और संवर्धन का कोई प्रयास नही करता।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-2696853738592339979?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/2696853738592339979/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2009/07/blog-post_29.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/2696853738592339979'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/2696853738592339979'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2009/07/blog-post_29.html' title='..यहीं पर लिखा गया था अयोध्या कांड'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-3223111429137373004</id><published>2009-07-03T09:53:00.000-07:00</published><updated>2009-07-03T09:54:50.976-07:00</updated><title type='text'>चित्रकूट : सुबह...सुबह</title><content type='html'>&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/Sk43ny3hwQI/AAAAAAAAAOg/hFhbQfHssgI/s1600-h/3250739098_b5efbcd5e5.jpg"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 272px; DISPLAY: block; HEIGHT: 400px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5354278163799195906" border="0" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/Sk43ny3hwQI/AAAAAAAAAOg/hFhbQfHssgI/s400/3250739098_b5efbcd5e5.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-3223111429137373004?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/3223111429137373004/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2009/07/blog-post_1002.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/3223111429137373004'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/3223111429137373004'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2009/07/blog-post_1002.html' title='चित्रकूट : सुबह...सुबह'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/Sk43ny3hwQI/AAAAAAAAAOg/hFhbQfHssgI/s72-c/3250739098_b5efbcd5e5.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-4375673204489347427</id><published>2009-07-03T09:50:00.000-07:00</published><updated>2009-07-03T09:52:25.405-07:00</updated><title type='text'>चित्रकूट : सुबह...सुबह...</title><content type='html'>&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/Sk43BmFv0KI/AAAAAAAAAOY/AV5LYNLGPiQ/s1600-h/3249908933_8ffb11dfaf_m.jpg"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 240px; DISPLAY: block; HEIGHT: 187px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5354277507534147746" border="0" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/Sk43BmFv0KI/AAAAAAAAAOY/AV5LYNLGPiQ/s400/3249908933_8ffb11dfaf_m.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-4375673204489347427?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/4375673204489347427/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2009/07/blog-post_03.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/4375673204489347427'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/4375673204489347427'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2009/07/blog-post_03.html' title='चित्रकूट : सुबह...सुबह...'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/Sk43BmFv0KI/AAAAAAAAAOY/AV5LYNLGPiQ/s72-c/3249908933_8ffb11dfaf_m.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-3279941269460894805</id><published>2009-07-03T09:44:00.000-07:00</published><updated>2009-07-03T09:46:41.647-07:00</updated><title type='text'>चित्रकूट : सुबह...सुबह ...</title><content type='html'>&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/Sk41tC6txMI/AAAAAAAAAOQ/BaZcxaaZa5c/s1600-h/Chitrakut.jpg"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; DISPLAY: block; HEIGHT: 266px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5354276054983623874" border="0" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/Sk41tC6txMI/AAAAAAAAAOQ/BaZcxaaZa5c/s400/Chitrakut.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-3279941269460894805?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/3279941269460894805/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2009/07/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/3279941269460894805'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/3279941269460894805'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2009/07/blog-post.html' title='चित्रकूट : सुबह...सुबह ...'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/Sk41tC6txMI/AAAAAAAAAOQ/BaZcxaaZa5c/s72-c/Chitrakut.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-5844704092788437043</id><published>2009-05-26T21:58:00.000-07:00</published><updated>2009-05-26T22:02:57.579-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='अहोभाग्य समझते हैं।'/><title type='text'>स्वर्ग से आयी स्वर्ण गंगा है मंदाकिनी</title><content type='html'>May 27, 02:08 am&lt;br /&gt;चित्रकूट। चित्रकूट की धरती के गौरव राम का परिचय परमात्मा राम के रूप में आम आदमी से परिचय कराने वाले गोस्वामी तुलसीदास ने अपनी अमर कृति श्री राम चरित मानस में जब यह पंक्तियां लिखी थी तभी उनके पास इस बात के पूरे प्रमाण मौजूद थे कि यह मां अनुसुइया के दस हजार सालों के कठोर तप से निकली मंदाकिनी कोई साधारण नदी नही हैं। मां मंदाकिनी की स्तुतियां हर एक वेद में हैं मिलती है। यह तो सीधे स्वर्ग से अवतरित होकर आई स्वर्ण गंगा है।&lt;br /&gt;मंदाकिनी के स्वर्ण गंगा होने की पुष्टि श्री मद् भागवत के पंचम स्कंध में हो जाती है। उनके अनुसार जब राजा बलि तीन पग पृथ्वी नाप रहे थे तो उनका बायां पैर स्वर्ग पहुंच गया और उस पैर की स्वर्ण रज को तरल रूप में सृष्टि के निर्माता प्रजापति ब्रह्मा ने अपने कमंडल में ले लिया। इसकी तीन धारायें बनी। पहली गंगा दूसरी भागीरथी और तीसरी मंदाकिनी। यह तीनों नदियां तीनों भुवनों से प्रकट की गई। स्वर्ग से मंदाकिनी, पृथ्वी से गंगा तो पाताल से प्रभावती प्रकट हुई। राजा भागीरथ ने भागीरथ प्रयास कर गंगा को अपने पूर्वजों को तारने के लिये अवतरित कराया तो प्रभावती भूलोक में भागीरथी के नाम से प्रकट हुई।&lt;br /&gt;चित्रकूटांचल में प्रवाहित मां मंदाकिनी को सीधे स्वर्ग से अत्रिप्रिया मां अनुसुइया ने स्वर्ण गंगा का प्रार्दूभूत किया। इसका प्रमाण वेद भी देते हैं 'मंदाकिनी वियद् गंगा इत्यभरे' अर्थात मंदाकिनी ही स्वर्ण गंगा है। इसलिये तमाम वेदों और पुराणों ने मंदाकिनी की स्तुति गायी है और भगवान श्री राम ने खुद ही इस पर स्नान किया व अपने पिता का पिंड दान किया।&lt;br /&gt;क्षेत्र के पुराने महात्मा राम लोचन दास बताते हैं कि भागीरथी गंगा जहां लोगों के पापों को धोती है वहीं मंदाकिनी गंगा लोगों के पापों का भक्षण करती है। देवलोक से आई इस विशेष स्वर्ण गंगा में स्नान कर देवता भी अपने अहोभाग्य समझते हैं। इसलिये मंदाकिनी गंगा से भी श्रेष्ठ है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-5844704092788437043?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/5844704092788437043/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2009/05/blog-post_26.html#comment-form' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/5844704092788437043'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/5844704092788437043'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2009/05/blog-post_26.html' title='स्वर्ग से आयी स्वर्ण गंगा है मंदाकिनी'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-8942825290866991312</id><published>2009-05-24T22:03:00.000-07:00</published><updated>2009-05-24T22:05:24.406-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='श्रद्धालुओं की मजबूरी'/><title type='text'>चिलचिलाती धूप में श्रद्धालुओं ने मंदाकिनी में लगाई डुबकी</title><content type='html'>May 25, 02:18 am&lt;br /&gt;चित्रकूट। चिलचिलाती धूप भी श्रद्धालुओं की आस्था डिगा न सकी। ज्येष्ठ मास की अमावस्या के मौके पर लाखों श्रद्धालुओं ने मंदाकिनी में डुबकी लगायी और फिर भगवान मत्स्यगजयेंद्र नाथ का जलाभिषेक कर भगवान कामतानाथ की परिक्रमा की। वट सावित्री अमावस्या होने से सुहागिनों ने अपने पति के दीर्घायु की कामना के साथ वट वृक्ष की पूजा अर्चना की।&lt;br /&gt;भीषण गर्मी के बावजूद अमावस्या में पूरे दिन श्रद्धालुओं की भीड़ धर्मनगरी में दिखी। दोपहर में परिक्रमा मार्ग में कुछ कम भीड़ दिखी, परंतु शाम होते ही श्रद्धालुओं का फिर से तांता लग गया। सैकड़ों लोगों ने लेटी परिक्रमा भी की। रामघाट के बाद कामतानाथ प्रमुख द्वार में भीड़ का सर्वाधिक दबाव देखा गया। परिक्रमा करने के बाद श्रद्धालुओं ने हनुमान धारा, स्फटिक शिला, सती अनुसूइया व गुप्त गोदावरी पहुंचकर दर्शन किये। परिक्रमा मार्ग व मेला क्षेत्र में प्रशासन ने पेयजल व्यवस्था की थी। हालांकि मुख्यालय के बस स्टैड व शिवरामपुर रेलवे स्टेशन पर यात्री पानी के लिये भटकते दिखे। कर्वी रेलवे स्टेशन में श्रीनाथ सेवा समिति ने यात्रियों को पेयजल पिलाया। जिसमें डा. प्रकाश दीनानाथ, आनंद राव तैलंग व लल्लूराम शुक्ल आदि मौजूद रहे। तीर्थ यात्रियों के आवागमन के लिये दो मेला स्पेशल ट्रेन व एक दर्जन अतिरिक्त परिवहन निगम की बसें संचालित की गई। जिन्हे ठसाठस भरकर आते जाते देखा गया।&lt;br /&gt;सुहागिनों ने पूजा वट वृक्ष&lt;br /&gt;ज्येष्ठ अमावस्या पर ही सुहागिनें अपने पति की दीर्घायु के लिये बरगद के वृक्ष की पूजा अर्चना की। मुख्यालय में सुबह से ही महिलाओं ने पूजा की थाल सजाकर बरगद वृक्ष के पास पहुंची। पूरे विधिविधान से पूजा करने के बाद महिलाओं ने सावित्री सत्यवान की कथा का श्रवण किया। कई महिलाओं ने परिवार सहित बरगद के नीचे बैठकर खाना बनाकर भी खाया।&lt;br /&gt;टैक्सी वालों ने काटी चांदी&lt;br /&gt;भीषण गर्मी में पैदल चलना मुश्किल था इससे लोग टैपो टैक्सी से आ जा रहे थे। श्रद्धालुओं की मजबूरी का टैक्सी चालकों ने जमकर फायदा उठाया। रामघाट से स्टेशन तक 15 रुपये सवारी तक वसूला गया। कई जगह इन गाड़ियों ने जाम लगाया मगर पुलिस वालों ने इन्हे हटाना गवारा नहीं समझा&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-8942825290866991312?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/8942825290866991312/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2009/05/blog-post_24.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/8942825290866991312'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/8942825290866991312'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2009/05/blog-post_24.html' title='चिलचिलाती धूप में श्रद्धालुओं ने मंदाकिनी में लगाई डुबकी'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3t5Akk/S220/Picture+040.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5592806166467368878.post-3293162471802419458</id><published>2009-05-22T23:49:00.000-07:00</published><updated>2009-05-22T23:54:57.961-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='मंदिर परिसर'/><title type='text'>रावण के वंशजों ने किया लंकेश का श्राद्ध</title><content type='html'>जोधपुर। जोधपुर शहर में लंकाधिपति रावण के वंशजों ने बुधवार को श्राद्ध पक्ष की दशमी को रावण का श्राद्ध किया तथा अमरनाथ मंदिर परिसर में उसकी मूर्ति की विशेष पूजा अर्चना की।&lt;br /&gt;अक्षय ज्योति अनुसंधान केंद्र के सचिव अजय दवेके अनुसार दवे,गोधा एवं श्रीमाली समाज के लोगों ने गत वर्ष स्थापित रावण मंदिर में पूजा-अर्चना की तथा बाद में हमेकरणनाडी पर तर्पण एवं पिंडदान किया। इसके बाद रावण की प्रतिमा एवं उसकी कुलदेवीमां खारानाको खीर, पूडी का भोग लगाया तथा ब्राह्माणों को भोजन कराया।&lt;br /&gt;उन्होंने बताया कि श्रीलंका में राम-रावण युद्ध में रावण के मारे जाने पर उसके वंशज यहां जोधपुर आकर बस गए थे और ये लोग रावण को प्रकांड पंडित एवं विद्वान मानते हुए उसमें अटूट आस्था रखते हैं। हर साल रावण का श्राद्ध भी किया जाता हैं। दशहरा के पर्व पर जहां खुशी मनाई जाती हैं तथा रावण दहन किया जाता हैं वहीं हमारे समाज के लोग इस दिन को सूतक मानते हुए स्नान करते हैं।&lt;br /&gt;श्री दवेने कहा कि लंकाधिपति की सुसराल भी जोधपुर मानी जाती हैं तथा उनकी रानी मंदोदरी का संबंध यहां की राजधानी मंडोरसे माना जाता हैं। उन्होंने कहा कि रावण के प्रति इसी आस्था के कारण ही गत वर्ष अमरनाथ मंदिर परिसर में रावण के मंदिर का निर्माण कराया गया और उसकी पूजा अर्चना की जाती है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5592806166467368878-3293162471802419458?l=apnachitrakoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/feeds/3293162471802419458/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2009/05/blog-post_3644.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/3293162471802419458'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5592806166467368878/posts/default/3293162471802419458'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://apnachitrakoot.blogspot.com/2009/05/blog-post_3644.html' title='रावण के वंशजों ने किया लंकेश का श्राद्ध'/><author><name>चित्रकूट/रायबरेली</name><uri>http://www.blogger.com/profile/00866667496259062419</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_qByXgD9y5NI/SeBaZ85WRlI/AAAAAAAAAAM/KNT1H3
